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राहुल को अमेठी में मिली सबसे बड़ी चोट, भूल नहीं पाएंगे 23 मई का दिन

Fri, 24 May 2019 01:14 AM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Fri, 24 May 2019 01:14 AM IST
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Lok Sabha Chunav 2019 Result News Update: Rahul gandhi Smriti Irani Amethi seat
राहुल गांधी ने मानी हार - फोटो : ANI
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए 23 मई का दिन कभी न भूलने वाला दिन साबित हो गया है। इस दिन वह सालों से कांग्रेस की परंपरागत सीट रही अमेठी गंवा बैठे। हालांकि दूसरी सीट वह बड़ी जीत की ओर बढ़ हैं। एक तरह से कहा जाए तो उन्हें अमेठी में सबसे बड़ी चोट मिली साथ ही दूसरी जगह बड़ा वोट भी मिला। 
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अमेठी से लगातार पिछड़ रहे राहुल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अब अमेठी की देखभाल स्मृति ईरानी करें। उन्होंने पीएम मोदी को जीत की बधाई भी दी। इस तरह से उन्होंने अमेठी में अपनी हार मान ली। स्मृति पहले कुछ चरण की मतगणना के बाद से ही लगातार बढ़त बनाए हुए थीं, जो आखिर तक कायम रही और कांग्रेस ने हार भी मान ली। 
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वहीं, स्मृति ने अपनी जीत पर ये ट्वीट किया-
 


 
एक तरफ जहां उन्हें अमेठी में सबसे बड़ी चोट मिली वहीं केरल के वायनाड में बंपर वोट भी मिले। यहां उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी से करीब साढ़े लाख वोटों से बढ़त बना ली। हालांकि इससे पहले वह साढ़े 8 लाख वोटों से आगे थे। 

अमेठी की हार राहुल के लिए कभी न भुलाने वाली हार साबित होगी। इस सीट से उनके पिता राजीव गांधी और संजय गांधी चुने जाते रहे हैं। पीढ़ियों की विरासत को राहुल गांधी संभाल नहीं सके। अब अमेठी स्मृति ईरानी के हवाले हो गया है और वह राहुल गांधी की जगह लेंगी। 

अमेठी: कांग्रेस के गढ़ से गांधी परिवार की सीट तक 

अमेठी संसदीय पर अबतक 16 लोकसभा चुनाव और दो उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की है, वहीं 1977 में लोकदल और 1998 में भाजपा को जीत मिली है। 1967 में परिसीमन के बाद अमेठी लोकसभा सीट वजूद में आई और कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी सासंद बने। 1971 में फिर जीते, लेकिन 1977 में नए प्रत्याशी बनाए गए संजय सिंह चुनाव हार गए। 1980 में इंदिरा गांधी ने बेटे संजय गांधी को रण में उतारा और तब से यह गांधी परिवार की पारंपरिक सीट हो गई। 1980 में ही दुर्घटना में संजय के निधन के बाद उनके भाई राजीव गांधी अमेठी से सांसद बने। 

सोनिया ने बेटे राहुल के लिए छोड़ी सीट

1989 और 1991 में राजीव गांधी फिर चुनाव जीते, लेकिन 1991 के नतीजे आने से पहले उनकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद कांग्रेस के ही कैप्टन सतीश शर्मा चुनाव जीते। 1998 में वह भाजपा के संजय सिंह से हार गए। 1999 में अमेठी से सोनिया ने आम चुनाव में कदम रखा और पहली बार सांसद बनीं। 2004 में उन्होंने बेटे राहुल गांधी के लिए यह सीट छोड़ दी और रायबरेली चली गईं। राहुल गांधी पिछले तीन बार से यहां के सांसद हैं, लेकिन इस बार स्मृति उनके लिए कड़ी चुनौती है। 

 
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