वाराणसी उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से सबसे हाई-प्रोफाइल सीट है। साल 2019 के 17वें लोकसभा चुनाव में सबकी नजरें इस सीट पर हैं। यहां से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किस्मत दांव पर है। पीएम मोदी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन ने बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर को मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ कांग्रेस से अजय राय मैदान में हैं। साल 2014 में इस सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंपर वोटों के साथ जीत हासिल की थी। पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को करीब 3.37 लाख वोटों से हराया था। वाराणसी में 19 मई को आखिरी चरण में मतदान होना है। 2014 के आम चुनाव में वाराणसी में कुल मतदाताओं की संख्या 1,767,486 थी। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 986,224 और महिला मतदाता की संख्या 781,262 थी। उस वक्त इस निर्वाचन क्षेत्र में 58.31% फीसदी मतदान हुआ था। आइए इस सीट के सियासी समीकरणों पर एक नजर डालते हैं..
वाराणसी सीट का सियासी इतिहास, 16 आम चुनाव में एक बार भी नहीं जीती सपा-बसपा
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वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के तहत पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। ये रोहणिया, वाराणसी उत्तरी, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी और सेवापुरी हैं। इनमें से एक भी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं है।जब देश में 1951-52 में पहली बार आम चुनाव हुए थे उस वक्त वाराणसी जिले में लोकसभा की 3 सीटें थी। ये सीटें बनारस मध्य, बनारस पूर्व और बनारस-मीरजापुर थी। साल 2014 के बाद वाराणसी सीट का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।
2014 से पहले 2009 में भी यह सीट भाजपा के ही कब्जे में थी। 2009 का चुनाव इस सीट से भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने जीता था। 2014 में उन्होंने इस सीट को मोदी के लिए छोड़ा था। पहले आम चुनाव में वाराणसी से कांग्रेस के रघुनाथ शर्मा ने सोशलिस्ट पार्टी के विश्वनाथ शर्मा को चुनाव हराया था। अगली स्लाइड में पढि़ए कौन-सी पार्टी इस सीट से कितनी बार जीती
वाराणसी लोकसभा सीट से कई दिग्गज नेता चुनाव जीतकर आए हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर से लेकर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी शामिल हैं। इस सीट से मुरली मनोहर जोशी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री भी विजयी रहे हैं।