धौरहरा उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से एक है। यहां 6 मई को पांचवें चरण में वोटिंग होनी है। धौरहरा लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं। ये- धौरहरा, कास्ता, मोहम्मदी, मोहाली और हरगांव हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में ये पांचों सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी। यह सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट को लखीमपुर और सीतापुर के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया था। इसके बाद साल 2009 में इस सीट पर चुनाव हुए और कांग्रेस से जितिन प्रसाद सांसद चुने गए। 2014 में मोदी लहर के चलते यह सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में आई। आइए इस लोकसभा सीट पर एक नजर डालते हैं...
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धौरहरा सीट: चंबल के डकैत रहे मलखान सिंह दे रहे हैं जितिन प्रसाद को चुनौती
Fri, 03 May 2019 07:57 PM IST
ललित फुलारा
चुनाव डेस्क, अमर उजाला
चुनाव डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Fri, 03 May 2019 07:57 PM IST
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लोकसभा चुनाव 2019
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जितिन प्रसाद
2019 में इन प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर..
इस सीट पर इस बार भी भारतीय जनता पार्टी ने वर्तमान सांसद रेखा वर्मा पर दांव खेला है। जबकि कांग्रेस से जितिन प्रसाद मैदान में हैं। महागठबंधन ने इस सीट पर अरशद इलियास सिद्दीकी को टिकट दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन से इस सीट की लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई है। इस सीट पर 2019 लोकसभा चुनाव में कुल 16 लाख 34 हजार 417 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें से पुरुष मतदाताओं की संख्या 8 लाख 79 हजार 400 है। वहीं, महिला मतदाताओं की संख्या 7 लाख 54 हजार 920 है। इस सीट पर ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 97 है।
इस सीट पर इस बार भी भारतीय जनता पार्टी ने वर्तमान सांसद रेखा वर्मा पर दांव खेला है। जबकि कांग्रेस से जितिन प्रसाद मैदान में हैं। महागठबंधन ने इस सीट पर अरशद इलियास सिद्दीकी को टिकट दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन से इस सीट की लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई है। इस सीट पर 2019 लोकसभा चुनाव में कुल 16 लाख 34 हजार 417 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें से पुरुष मतदाताओं की संख्या 8 लाख 79 हजार 400 है। वहीं, महिला मतदाताओं की संख्या 7 लाख 54 हजार 920 है। इस सीट पर ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 97 है।
मलखान सिंह
- फोटो : अमर उजाला
चंबल के खूंखार डाकू मलखान सिंह भी लड़ रहे हैं चुनाव
धौरहरा लोकसभा सीट से शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी ने कुख्यात डकैत रहे मलखान सिंह को मैदान में उतारा है। 70 के दशक में मलखान सिंह के गिरोह का चंबल में खौफ था। उनके खिलाफ 94 मामले दर्ज थे। इनमें डकैती के 18 मामले और हत्या के प्रयास के 19 मामले शामिल हैं। मलखान ने 1982 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष आत्मसर्मपण किया था। कहा जा रहा है कि मलखान सिंह के मैदान में उतरने के बाद गठबंधन प्रत्याशी अरशद इलियास सिद्दीकी और भाजपा एवं कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए इस सीट का मुकाबला चुनौती भरा हो गया है।
धौरहरा लोकसभा सीट से शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी ने कुख्यात डकैत रहे मलखान सिंह को मैदान में उतारा है। 70 के दशक में मलखान सिंह के गिरोह का चंबल में खौफ था। उनके खिलाफ 94 मामले दर्ज थे। इनमें डकैती के 18 मामले और हत्या के प्रयास के 19 मामले शामिल हैं। मलखान ने 1982 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष आत्मसर्मपण किया था। कहा जा रहा है कि मलखान सिंह के मैदान में उतरने के बाद गठबंधन प्रत्याशी अरशद इलियास सिद्दीकी और भाजपा एवं कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए इस सीट का मुकाबला चुनौती भरा हो गया है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद
- फोटो : अमर उजाला
जितिन प्रसाद के इस सीट से चुनाव लड़ने को लेकर रहा था काफी सस्पेंस
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के धौरहरा लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने को लेकर काफी सस्पेंस रहा। पार्टी आलाकमान उन्हें लखनऊ से चुनाव लड़ना चाहता था। लेकिन जितिन प्रसाद धौरहरा से ही चुनाव लड़ने पर अड़े रहे और उन्होंने भाजपा में शामिल होने तक की धमकी दे डाली थी। इस पूरे मामले ने खूब सुर्खियां बंटोरी और आखिरकार कांग्रेस ने उन्हें धौरहरा से ही टिकट दिया। हालांकि वह खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा कर चुके थे कि वह धौरहरा छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के धौरहरा लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने को लेकर काफी सस्पेंस रहा। पार्टी आलाकमान उन्हें लखनऊ से चुनाव लड़ना चाहता था। लेकिन जितिन प्रसाद धौरहरा से ही चुनाव लड़ने पर अड़े रहे और उन्होंने भाजपा में शामिल होने तक की धमकी दे डाली थी। इस पूरे मामले ने खूब सुर्खियां बंटोरी और आखिरकार कांग्रेस ने उन्हें धौरहरा से ही टिकट दिया। हालांकि वह खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा कर चुके थे कि वह धौरहरा छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।