दिल्ली में शीला से जनाधार बचाने में जुटी आम आदमी पार्टी, भाजपा के चेहरे पर मुस्कान
भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर भाजपा के जीत जाने की उम्मीद पाले हैं। टीम शीला के राजेश लिलौठिया इसे दिन में देखा गया सपना बताते हैं, वहीं आम आदमी पार्टी को दिल्ली में केवल भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच में चुनावी लड़ाई होने की उम्मीद है। लेकिन अंदरखाने में बड़ी लड़ाई दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच में है। इस अंदरुनी जंग ने भाजपा के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित अपना खोया जनाधार पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्हें लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। शीला हर जगह लोगों को अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुए कामकाज की याद ताजा करके मौजूदा दौर पर बड़ी मासूमियत से हमला कर रही हैं। शीला का यह सवाल लोगों के मन में कौंध भी रहा है, लेकिन दिल्ली का एक तबका अरविंद केजरीवाल में भरोसा रखता है। मनोज तिवारी का कहना है कि अभी यह सब चलने दीजिए। लोग समझ रहे हैं कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को फिर प्रधानमंत्री बनाना है। देश के लोगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति इज्जत है और उसका भाजपा को भरपूर लाभ मिलना तय है।
असली लड़ाई तो कांग्रेस और आम आदमी के बीच
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच में कभी गठबंधन की खबरें चल रही थीं, अब सीधी जंग चल रही है। शीला दीक्षित की टीम अपने पुराने वोट बैंक को पाने और आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल इसे बचाने की लड़ाई में जुटे हैं। सबसे बड़ा खतरा अल्पसंख्यक वोटों को लेकर है। भाजपा के लिए काम करने वाले सचिन गुप्ता कहते हैं कि पहले कांग्रेस को दिल्ली में एक तरफा अल्पसंख्क वोट पड़ता था। आम आदमी पार्टी के आने के बाद कांग्रेस के इस वोटबैंक में सेंध लग गई।
सचिन का मानना है कि अब यह वोट बैंक कांग्रेस की तरफ खिसक सकता है। इसी तरह से झुग्गी-झोपड़ी, अनाधिकृत कालोनी, निम्न वर्ग समेत अन्य में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपने समय में लॉलीपाप दिखाकर कांग्रेस से जोड़ लेती थी। अब कांग्रेस का यह वोट बैंक ज्यादा संख्या में आम आदमी पार्टी से चिपक गया है। सचिन का कहना है कि दोनों दलों की लड़ाई में भाजपा को हर सीट पर सीधा फायदा मिलेगा।
भाजपा की घबड़ाहट और कांग्रेस की चाल है
आम आदमी पार्टी के सक्रिय जमीनी कार्यकर्ता राजेश चौधरी ने मनीष सिसोदिया को जीत दिलाने में कड़ी मेहनत की थी। राजेश काफी सक्रिय हैं। राजेश का कहना है कि 12 मई आने दीजिए, कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजेश इस तरह की अफवाह को टीम शीला दीक्षित द्वारा पैदा की गई अफवाह और भाजपा की घबड़ाहट का नतीजा बताते हैं।
राजेश कहते हैं कि 200 यूनिट तक महीने में बिजली इस्तेमाल करने वालों के बिल में सब्सिडी साफ दिखाई देती है। पूरी दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक चल रही है। जलबोर्ड की पुरानी पाइप बदली जा रही है। गली-मोहल्ले की सड़कें करीब-करीब आरसीसी की हो चुकी हैं। राजेश कहते हैं कि मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने जा रहे हैं और स्कूल सुधार का काम अब लोगों को बताने की जरूरत नहीं है। इतना ही दिल्ली में पब्लिक स्कूल मनमानी फीस नहीं वसूल पा रहे हैं।
राजेश सवाल पूछते हुए कहते हैं कि क्या इसे दिल्ली के लोग नहीं समझते? लेकिन राजेश से जब पूछा गया कि दिल्ली के बल पर क्या केजरीवाल देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे तो राजेश ने कहा कि दिल्ली की बस्तियों में केजरीवाल की अहमियत पता है। वहां के लोग जानते हैं कि केजरीवाल ही उनके हितों के लिए लड़ेगा।
2014 में क्या हुआ था?
डा. बिनोद चौबे पूर्वी दिल्ली में नर्सिंग होम चलाते हैं। डा. बिनोद चौबे का कहना है कि आम आदमी का अपना वोट बैंक बन चुका है। यह उन्हें उसका साथ आसानी से छोड़ता नहीं दिखाई देता, लेकिन शीला दीक्षित के काम को दिल्ली के लोग याद करते हैं।
बस, फ्लाईओवर, फुटपाथ सब दिखता है। लेकिन चौबे एक सवाल उठाते हैं? उनका कहना है कि 2014 में क्या हुआ था? भाजपा दिल्ली की सभी सात सीटें जीत गई थी। इसके कुछ ही महीने बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुआ तो भाजपा किसी तरह से तीन सीट जीत पाई, कांग्रेस का खाता नहीं खुला और आम आदमी पार्टी 70 में से 67 सीटें जीत गई।
इसलिए दिल्ली में लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले आम आदमी पार्टी कमजोर रह सकती है। डा. चौबे का कहना है कि देश का प्रधानमंत्री तो भाजपा या कांग्रेस अथवा इन दलों के सहयोग से ही बनेगा और इस सच्चाई को दिल्लीवासी समझते हैं।