17वीं लोकसभा ने पारित किया पहला विधेयक, विशेष आर्थिक जोन संशोधन 2019 को मंजूरी
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लोकसभा ने बुधवार को विशेष आर्थिक जोन संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी। इसमें न्यासों को विशेष आर्थिक क्षेत्र में इकाई स्थापित करने की अनुमति प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है। सत्रहवीं लोकसभा द्वारा पारित किया गया यह पहला विधेयक है। यह अध्यादेश पिछली सरकार में लागू किया गया था।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में विशेष आर्थिक क्षेत्र संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान की। लोकसभा में पारित विधेयक कानून बनने के बाद इससे संबंधित अध्यादेश का स्थान लेगा। इस विधेयक के माध्यम से विशेष आर्थिक जोन अधिनियम 2005 का संशोधन करने का प्रस्ताव है ।
लोकसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भारत में निवेश को लेकर विश्वास मजबूत बनाने की जरूरत थी, ऐसे में पिछली सरकार में हमने कई कार्यो एवं पहल को आगे बढ़ाया था। लेकिन कई बार सदन में शोरशराबे के कारण व्यवधान आए और कई बार विधेयक लोकसभा में पारित होने के बावजूद राज्यसभा में मंजूर नहीं हो सका।
हम चाहते हैं कि दुनिया भारत में निवेश करे : गोयल
अध्यादेश लाने के औचित्य को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि इन्हीं स्थितियों में अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ी। विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के संबंध में भी अध्यादेश लाया गया क्योंकि हम चाहते हैं कि दुनिया भारत में निवेश करे। गोयल ने कहा कि अध्यादेश लागू होने के बाद इस संबंध में अब तक छह आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें एक को मंजूरी दी गई है और पांच आवेदन मंजूरी की प्रक्रिया में है।
उन्होंने कहा कि सेज के संबंध में बाबा कल्याण समिति की अनेक सिफारिशों को लागू किया गया है और कुछ सिफारिशों को लागू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की परिभाषा में धर्मार्थ ट्रस्ट की परिभाषा में कोई छिपी मंशा नहीं है। हम पारदर्शी ढंग से काम करने वाले लोग हैं। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि विशेष आर्थिक जोन संशोधन विधेयक 2019 विशेष आर्थिक जोन संशोधन अध्यादेश 2019 को प्रतिस्थापित करने के लिए है और इसमें धारा के खंड ‘फ’ के संशोधन का उपबंध करने का प्रावधान है जिससे ‘व्यक्ति’ की परिभाषा में ‘न्याय’ या ‘अस्तित्व’ पद को सम्मिलित किया जा सके।
इसमें कहा गया कि चूंकि संसद सत्र में नहीं थी और विधान बनाया जाना आवश्यक था, इसलिये राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 123 के खंड 1 के अधीन विशेष आर्थिक जोन संशोधन अध्यादेश 2019 लागू किया था। इससे पहले विशेष आर्थिक जोन (संशोधन विधेयक-2019) चर्चा के लिये रखते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पहले के कानून में ‘व्यक्तियों’ की परिभाषा में ‘ट्रस्ट’ भी जोड़ा जाए क्योंकि व्यापार की नई विधा में वैकल्पिक निवेश फंड का चलन आया है जो एक ट्रस्ट के रूप में काम करता है।
बदलती दुनिया के साथ चलेगा भारत
गोयल ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और भारत भी बदलाव करते हुए दुनिया के साथ चलेगा। मंत्री ने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों की स्थापना के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यह विधेयक इसी साल दो मार्च को जारी अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है।
भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार यह कदम भी देशहित में उठाने जा रही है और ऐसे में सभी को इसका समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में विशेष आर्थिक जोन का निर्माण नहीं किया जा सका।
विपक्षियों ने किया विरोध
इससे पहले विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने अध्यादेश लाने का विरोध किया और सवाल किया कि आखिर क्या आपात स्थिति पैदा हो गई थी जिस वजह से सरकार को यह अध्यादेश चुनाव आचार संहिता लागू होने से कुछ दिनों पहले लाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यादेश का रास्ता अपनाकर सरकार ने संसद के प्राधिकार को कमतर किया है।
कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि इस संबंध में अध्यादेश लाने की कौन सी आपात स्थिति थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश के आर्थिक विकास पर गर्व होता है लेकिन सरकार को सही चीजें, सही तरीके से करनी चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने विधेयक का और एसईजेड परियोजना के विस्तार का विरोध करते हुए कहा कि जबरन भूमि अधिग्रहण के भी हम खिलाफ हैं। उन्होंने चीन की तरह ही भारत में भी गैर कृषि भूमि पर इस तरह की परियोजनाएं लगाये जाने की मांग की।
द्रमुक के डीएनवी सेंथिल कुमार ने भी इस संबंध में अध्यादेश लाये जाने को गैर-जरूरी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के करीबी उद्यमियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह अध्यादेश लाया गया और इसके मूल मकसद को प्रभावित किया गया।