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लोढ़ा कमेटी की सिफारशें ठाकुर के लिए खड़ी करेंगी दिक्कतें
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 23 May 2016 02:17 AM IST
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अनुराग ठाकुर के लिए नई चुनौतियां
- फोटो : Getty
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महज 25 साल की उम्र में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनना, साल 2011 में बीसीसीआई का संयुक्त सचिव बनना, चार साल बाद बोर्ड का सचिव पद और साल बाद ही बीसीसीआई अध्यक्ष की गद्दी पर आसीन होना। 16 सालों के अंदर क्रिकेट प्रशासन में अनुराग ठाकुर के अलावा उतनी ऊंचाईयां अन्य किसी को हासिल नहीं हुई हैं। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि अब ठाकुर के लिए बीसीसीआई में आने वाला समय उतना आसान नहीं है। इसका एकमात्र कारण है जस्टिस आरएम लोढ़ा की सिफारिशें।
सुप्रीम कोर्ट ने अगर इन सिफारशों को लागू करने का फरमान सुना दिया तो ठाकुर मुश्किलों में घिर जाएंगे। उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा। यही नहीं वह तीन सालों तक बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव तक नहीं लड़ पाएंगे। यहां तक उन्हें एचपीसीए अध्यक्ष पद भी छोड़ना होगा। हालांकि ठाकुर ने रविवार को मुंबई में कहा है कि नई चुनौतियां नए अवसरों को भी खोलती हैं, लेकिन यह देखने वाली बात होगी कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू होने पर ठाकुर अपने लिए बचाव का कौन सा रास्ता निकालते हैं।
लोढ़ा कमेटी की सिफारशों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 29 जून को कोर्ट की गर्मियों की छुट्टियों के बाद आना है। जिस तरह से कोर्ट ने इस मामले पर अपनी राय व्यक्त की है उससे यही लगता है कि बोर्ड के लिए बचाव के रास्ते कम हैं। सिफारशों में कहा गया है कि एक पद से दूसरे पद का चुनाव लड़ने के लिए तीन साल के कूलिंग पीरियड की जरूरत पड़ेगी। ठाकुर ने ऐसा नहीं किया है। उन्हें अगले वर्ष तक इस अध्यक्ष पद रहना है। सिफारिशें लागू होने पर उनके लिए अपने इस कार्यकाल को आगे खीचना मुश्किल होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने अगर इन सिफारशों को लागू करने का फरमान सुना दिया तो ठाकुर मुश्किलों में घिर जाएंगे। उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा। यही नहीं वह तीन सालों तक बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव तक नहीं लड़ पाएंगे। यहां तक उन्हें एचपीसीए अध्यक्ष पद भी छोड़ना होगा। हालांकि ठाकुर ने रविवार को मुंबई में कहा है कि नई चुनौतियां नए अवसरों को भी खोलती हैं, लेकिन यह देखने वाली बात होगी कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू होने पर ठाकुर अपने लिए बचाव का कौन सा रास्ता निकालते हैं।
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लोढ़ा कमेटी की सिफारशों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 29 जून को कोर्ट की गर्मियों की छुट्टियों के बाद आना है। जिस तरह से कोर्ट ने इस मामले पर अपनी राय व्यक्त की है उससे यही लगता है कि बोर्ड के लिए बचाव के रास्ते कम हैं। सिफारशों में कहा गया है कि एक पद से दूसरे पद का चुनाव लड़ने के लिए तीन साल के कूलिंग पीरियड की जरूरत पड़ेगी। ठाकुर ने ऐसा नहीं किया है। उन्हें अगले वर्ष तक इस अध्यक्ष पद रहना है। सिफारिशें लागू होने पर उनके लिए अपने इस कार्यकाल को आगे खीचना मुश्किल होगा।
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