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मोरेटोरियम: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- ब्याज नहीं कर सकते माफ, अगली सुनवाई 10 को
Thu, 03 Sep 2020 04:36 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 03 Sep 2020 04:36 PM IST
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लोन मोरेटोरियम: सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
उच्चतम न्यायालय गुरुवार को लॉकडाउन के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से दिए गए लोन मोरेटोरियम को आगे बढ़ाने और ब्याज में छूट देने की याचिकाओं पर सुनवाई की। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। केंद्र सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, 'बैंकिंग क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, हम ऐसा कोई भी निर्णय नहीं ले सकते हैं जो अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है। हमने ब्याज माफ नहीं करने का फैसला लिया है लेकिन भुगतान के दबाव को कम किया जाएगा।'
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अगले आदेश तक खातों को एनपीए घोषित न करें बैंक: सुप्रीम कोर्ट
बैंक अगले आदेश तक कर्ज नहीं चुका पा रहे खातों को एनपीए घोषित नहीं कर सकेेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को मोरेटोरियम मामले में आईं याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत दी है। हालांकि यह निर्देश सिर्फ उन खातों पर लागू होगा जिन्हें 31 अगस्त तक एनपीए घोषित नहीं किया गया है।
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जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ मोरेटोरियम की अवधि में ब्याज वसूले जाने के विरोध में दाखिल याचिकाओें पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान बैंकों के संघ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, दो महीने तक कोई भी खाता एनपीए घोषित नहीं किया जाना चाहिए। साल्वे की दलील पर ध्यान देते हुए पीठ ने आदेश दिया कि 31 अगस्त तक घोषित नहीं किए गए खातों को अगले आदेश तक एनपीए नहीं किया जाएगा। पीठ अब 10 सितंबर को इस मामले में सुनवाई करेगी।
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केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि महामारी के दौरान मोरेटोरियम के तहत ईएमआई जमा करने में दी गई राहत की अवधि पर ब्याज माफ करना वित्तीय सिद्धांतों के खिलाफ है और उन लोगों के साथ नाइंसाफी है जिन्होंने समय पर ईएमआई का भुगतान किया। वहीं आरबीआई ने कुछ कर्जदारों के लिए मोरेटोरियम में दो साल का विस्तार देने का सुझाव दिया है।
बैंकिंग क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़
तुषार मेहता: केंद्र व आरबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि बैंकिंग क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव है। पूरी दुनिया में यह स्वीकार्य स्थिति है कि ब्याज को माफ करना किसी सूरत में अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए ठीक नहीं है।
पीठ: याचिकाकर्ताओं की मुश्किलों पर भी ध्यान देना होगा। हम मोरेटोरियम के दौरान ब्याज पर लगाए गए ब्याज को लेकर चिंतित हैं।
मेहता: केंद्र ने हाल ही में हलफनामा देकर बताया है कि आरबीआई के मुताबिक मोरेटोरियम कर्ज लेने वालों को राहत देता है क्योंकि इस दौरान किस्त जमा नहीं किए जाने पर खाता एनपीए घोषित नहीं किया जाता।
पीठ: आप दलील दे रहे हैं कि दो महीने तक खाते एनपीए नहीं हुए। तो हम निर्देश देते हैं कि जब तक इस मामले में सुनवाई हो रही है बैंक कर्जदारों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।
मेहता: वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने महामारी की स्थिति से निपटने के कदम उठाए हैं। महामारी का हर सेक्टर पर अलग अलग प्रभाव पड़ा है। जैसे फार्मा और आईटी सेक्टर के लिए यह सकारात्मक रहा। यह तय किया गया था कि मोरेटोरियम ब्याज की माफी के लिए नहीं बल्कि सिर्फ किस्तों के पुनर्भुगतान के दबाव को कम करने के लिए है।
पीठ: याचिकाकर्ताओं की मुश्किल है कि सरकार और आरबीआई के इतने प्रयासों के बाद भी उन्हें वह राहत नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। चक्रवर्ती ब्याज पर सवाल उठता है। यहां मुद्दा यह है कि क्या मोरेटोरियम और दंडात्मक ब्याज एक साथ चल सकते हैं।
मेहता: आरबीआई ने अपने 6 अगस्त को जारी सर्कुलर में याचिकाकर्ताओं के ज्यादातर मुद्दों का ख्याल रखा है।
पीठ : दलील में दिए गए तर्क किसी निर्णय की ओर नहीं पहुंचते। हम इस मामले पर अब 10 सितंबर को सुनवाई करेंगे।