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आतंकी हाफिज सईद की बातें सुनना हराम, आला हजरत दरगाह ने जारी किया फतवा
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Updated Fri, 19 Aug 2016 01:47 AM IST
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फतवे में कहा गया, हाफिज को मुसलमान मानने वाला काफिर, दूर रहें मुसलमान
- फोटो : Getty Images
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आला हजरत दरगाह से पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ फतवा जारी हुआ है। दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम के मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी बरेलवी ने फतवा देते हुए कहा है कि हाफिज सईद की बातों को सुनना नाजायज है और जो उसे मुसलमान मानेगा, वह काफिर होगा।
मुफ्ती सलीम ने फतवे में साफ किया है कि अल्लाह और रसूल की शान में गुस्ताखी करने वाले इस्लाम से खारिज हैं। जो उन्हें मुसलमान माने, वे भी काफिर हैं। उनके साथ सलाम व कलाम जैसा कोई भी ताल्लुक रखना हराम है। इनकी बातों को सुनना और उन्हें मुसलमान मानना नाजायज है। हाफिज सईद आतंकी विचारधारा रखने वाला शख्स है जो अपनी आतंकी गतिविधियों से इस्लाम और मुसलमानों को पूरी दुनिया में बदनाम और शर्मसार कर रहा है। वह गैर इस्लामी है। ऐसे शख्स को न मुसलमान मानें और न उसकी किसी बात पर यकीन करें। उससे किसी किस्म का कोई ताल्लुक न रखें। खुद भी उससे दूर रहें और अपने लोगों को भी इससे दूर रखें।
हाफिज सईद के संबंध में जयपुर के मोहम्मद मोईनुद्दीन ने पत्र भेज कर सवाल किया था कि वह लोगों को खून खराबे और आतंकी घटनाओं के लिए उकसाता है। क्या ऐसा शख्स मुसलमान कहलाने का हक रखता है? क्या ऐसे शख्स की बातों और तकरीरों को सुनना जायज है? इन्हीं सवालों के जवाब में दारुल इफ्ता के मुफ्ती सलीम बरेलवी ने फतवा दिया है।
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मुफ्ती सलीम ने फतवे में साफ किया है कि अल्लाह और रसूल की शान में गुस्ताखी करने वाले इस्लाम से खारिज हैं। जो उन्हें मुसलमान माने, वे भी काफिर हैं। उनके साथ सलाम व कलाम जैसा कोई भी ताल्लुक रखना हराम है। इनकी बातों को सुनना और उन्हें मुसलमान मानना नाजायज है। हाफिज सईद आतंकी विचारधारा रखने वाला शख्स है जो अपनी आतंकी गतिविधियों से इस्लाम और मुसलमानों को पूरी दुनिया में बदनाम और शर्मसार कर रहा है। वह गैर इस्लामी है। ऐसे शख्स को न मुसलमान मानें और न उसकी किसी बात पर यकीन करें। उससे किसी किस्म का कोई ताल्लुक न रखें। खुद भी उससे दूर रहें और अपने लोगों को भी इससे दूर रखें।
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हाफिज सईद के संबंध में जयपुर के मोहम्मद मोईनुद्दीन ने पत्र भेज कर सवाल किया था कि वह लोगों को खून खराबे और आतंकी घटनाओं के लिए उकसाता है। क्या ऐसा शख्स मुसलमान कहलाने का हक रखता है? क्या ऐसे शख्स की बातों और तकरीरों को सुनना जायज है? इन्हीं सवालों के जवाब में दारुल इफ्ता के मुफ्ती सलीम बरेलवी ने फतवा दिया है।
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