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प्रकाश प्रदूषण: समुद्री जीवों का प्रजनन और हार्मोनल चक्र बिगड़ा, वैज्ञानिकों के अध्ययन में खुलासा

Sun, 17 Sep 2023 05:35 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 17 Sep 2023 05:35 AM IST
सार

Light Pollution: न्यूयॉर्क स्थित कॉर्नेल विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार पर पता लगाया है कि यह कृत्रिम प्रकाश प्रवाल, प्लैंकटन, कछुओं और छोटी मछलियों से लेकर विशाल व्हेल तक सभी तरह के समुद्री जीवों पर असर डाल रहा है। यह उनमें प्रजनन से लेकर हार्मोनल चक्र तक में गड़बड़ी की वजह बन रहा है।

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Light pollution impairs reproduction and hormonal cycles of marine creatures, scientists' study reveals
प्रकाश प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

विस्तार

मानव निर्मित कृत्रिम प्रकाश ने दिन-रात के अंतर को दूर कर दिया है। यह अब प्रदूषण का रूप ले चुका है जो अपने आप में एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यह प्रकाश प्रदूषण  इंसानों के साथ-साथ जमीन पर रहने वाले दूसरे जीवों (जुगनू और पक्षियों से लेकर हाथी जैसे विशाल जीव) को भी प्रभावित कर रहा है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इसका असर समुद्री जीवों के प्रजनन से लेकर हार्मोनल चक्र तक पर पड़ रहा है।

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न्यूयॉर्क स्थित कॉर्नेल विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार पर पता लगाया है कि यह कृत्रिम प्रकाश प्रवाल, प्लैंकटन, कछुओं और छोटी मछलियों से लेकर विशाल व्हेल तक सभी तरह के समुद्री जीवों पर असर डाल रहा है। यह उनमें प्रजनन से लेकर हार्मोनल चक्र तक में गड़बड़ी की वजह बन रहा है। इस अध्ययन के नतीजे जर्नल एक्वेटिक कंजर्वेशन में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों ने बढ़ते एलईडी बल्ब के उपयोग को इस समस्या की एक प्रमुख वजह बताया है।

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कृत्रिम प्रकाश के कारण पथ से भटक जाते हैं जलीय जीव
अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि समुद्री जीव प्राकृतिक प्रकाश की तीव्रता और पैटर्न के अनुकूल होने के लिए लाखों वर्षों में विकसित हुए हैं, लेकिन अब उन्हें तटीय क्षेत्रों में प्रकाश प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। चांद और तारों की रोशनी, अंधेरे में समुद्री जीवों के लिए महत्वपूर्ण संकेत के रूप में काम करती है। यह उनको नेविगेशन में मदद करती है । वहीं, कृत्रिम प्रकाश में उनकी चमक आसानी से धूमिल पड़ सकती है जो समुद्री जीवों को उनके पथ से भटका देती है।

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इस तरह पहुंच रहा नुकसान
अध्ययन से पता चला है कि रात में बढ़ती कृत्रिम रोशनी समुद्री कछुओं के लिए दो तरह से हानिकारक है। पहला मादाएं अपने अंडे देने के लिए तटों के आसपास शांत अंधेरी जगहों की तलाश करती हैं, लेकिन बढ़ते कृत्रिम प्रकाश के चलते वो किनारे पर नहीं आ पातीं। वहीं, दूसरी तरफ अंडों से निकले बच्चे चांद की रोशनी की जगह विपरीत दिशा में कृत्रिम प्रकाश की ओर बढ़ते हैं और फिर पानी की कमी व भूख के कारण मर जाते हैं।
 

एलईडी बल्ब की रोशनी पहुंचती है गहराई तक
अध्ययन के अनुसार, जैसे-जैसे एलईडी बल्ब का उपयोग बढ़ रहा है उसके साथ-साथ कृत्रिम प्रकाश की प्रकृति भी बदल रही है। एलईडी में आमतौर पर पुरानी तकनीकों की तुलना में अधिक छोटी तरंग दैर्ध्य वाली रोशनी होती है जो पानी में गहराई तक प्रवेश कर सकती है। इसकी वजह से यह तटीय क्षेत्रों में गहराई में रहने वाले समुद्री जीवों को प्रभावित करती है। प्रकाश प्रदूषण समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक तत्काल चिंता का विषय है, क्योंकि समुद्री जीवों का प्राकृतिक पर्यावरण के साथ गहरा नाता होता है।

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