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सावधान, आप सबकी औसतन जीवन रेखा डेढ़ साल कम हो गई है...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 07 Dec 2018 03:53 AM IST
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air pollution
यह खबर चौंकाने वाली हो सकती है।देश में रह रहे लोगों की जीवन रेखा डेढ़ साल कम हो गई है। राजस्थान में यह जीवन रेखा ढाई साल छोटी तो उत्तरप्रदेश में दो साल और दो माह, जबकि हरियाणा में दो साल एक महीना छोटी हो गई है। यह सब वायु प्रदूषण की वजह से हुआ है। इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा वीरवार को जारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। पिछले साल आठ लोगों की मौत का विश्लेषण बताता है कि इनमें से एक व्यक्ति की मौत का कारण कहीं न कहीं प्रदूषण या उसे जुड़े कारक रहे हैं।2017 में 12.4 लाख मौतों में से 6.7 लाख आउटडोर पर्टिकुलर मेटर वायु प्रदूषण से तो 4.8 लाख लोग घर में होने वाले विभिन्न तरह के इंडोर वायु प्रदूषण के चलते मारे गए हैं।
रिपोर्ट पेश करते हुए आईसीएमआर के डीजी प्रो. बलिराम भगत ने कहा, वायु प्रदूषण अब एक खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। वायु प्रदूषण की वजह से मरने वालों में आधे ऐसे हैं, जिनकी उम्र सत्तर साल से कम है। गत वर्ष के आंकडे बताते हैं कि करीब 77 फीसदी आबादी किसी न किसी वजह से वायु प्रदूषण का सामना कर रही है।पीएम-2 का लेवल देखें तो यह विश्व में सर्वाधिक है। आज भी शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में 56 फीसदी आबादी सॉलिड फ़्यूल का इस्तेमाल कर रही है।
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रिपोर्ट पेश करते हुए आईसीएमआर के डीजी प्रो. बलिराम भगत ने कहा, वायु प्रदूषण अब एक खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। वायु प्रदूषण की वजह से मरने वालों में आधे ऐसे हैं, जिनकी उम्र सत्तर साल से कम है। गत वर्ष के आंकडे बताते हैं कि करीब 77 फीसदी आबादी किसी न किसी वजह से वायु प्रदूषण का सामना कर रही है।पीएम-2 का लेवल देखें तो यह विश्व में सर्वाधिक है। आज भी शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में 56 फीसदी आबादी सॉलिड फ़्यूल का इस्तेमाल कर रही है।
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हालांकि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से पांच करोड़ घरों में एलपीजी का इस्तेमाल होने लगा है और अब 2020 तक आठ करोड़ घरों में एलपीजी पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इससे घरों के भीतर होने वाले प्रदूषण में कुछ कमी आई है।पीएम 2.5 एक बड़ी चुनौती है।इस पर काबू पाने के लिए कई मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।
पर्यावरण मंत्रालय के एडवायजर डॉ. तुषार कुमार जोशी का कहना है कि अगले पांच साल में वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार आएगा।एयर क्वालिटी मॉनिटर की संख्या में इजाफा किया जा रहा है।पराली जलाने की समस्या को जड़ से खत्म करने की योजना पर काम शुरु हो गया है।सरकार ने इसके लिए 11 हजार करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।इससे किसानों को नए उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।
पर्यावरण मंत्रालय के एडवायजर डॉ. तुषार कुमार जोशी का कहना है कि अगले पांच साल में वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार आएगा।एयर क्वालिटी मॉनिटर की संख्या में इजाफा किया जा रहा है।पराली जलाने की समस्या को जड़ से खत्म करने की योजना पर काम शुरु हो गया है।सरकार ने इसके लिए 11 हजार करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।इससे किसानों को नए उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।
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सीबीआई और मेट्रो भवन का भी एयर क्वालिटी स्तर ठीक नहीं था...
घर में अगरबत्ती वायु प्रदूषण की वजह...
डॉ. जोशी ने कहा, घरों के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह अगरबत्ती है।आजकल वैसे भी सिंथेटिक अगरबत्ती आ रही हैं। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।मच्छर भगाने वाले उपकरण, बीड़ी-सिगरेट और चूल्हे का धूंआ भी प्रदूषण फैलाता है।अगर कोई इन वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे कमरे की खिड़की खोल देनी चाहियें।
इन दोनों बहुमंजिला इमारतों में एयर क्वालिटी स्तर ठीक नहीं रहा। मेट्रो के तत्कालीन चेयरमैन रहे ई-श्रीधरन ने तो इस बाबत पर्यावरण मंत्रालय से शिकायत भी की थी।डॉ. तुषार कुमार जोशी का कहना है कि श्रीधरन ने बताया था कि उन्होंने सबसे उपरी मंजिल पर अपना दफ़्तर बनाया है, लेकिन फिर भी लग रहा है कि वायु की गुणवत्ता ठीक नहीं है।इंडोर एयर पोल्यूशन का खतरा बना हुआ है।
बतौर जोशी, जब मैने जांच पड़ताल की तो वही स्थिति थी। बाद में कुछ उपाय करने पर सब ठीक हो गया।कई बार बड़े भवनों में हीटर के चलते सूखापन आ जाता है।यदि इमारत की बनावट सही नहीं है तो भी इस तरह की दिक़्क़तें सामने आती हैं।सीबीआई की नई बिल्डिंग में भी कुछ ऐसी ही शिकायत रही थी।जाँच एजेन्सी के अफ़सरों के मुताबिक़, 10-11 वीं मंजिल पर इंडोर एयर पोल्यूशन रहता है।कई बार एक दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर में बदलाव के चलते भी ऐसा महसूस होता है।
डॉ. जोशी ने कहा, घरों के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह अगरबत्ती है।आजकल वैसे भी सिंथेटिक अगरबत्ती आ रही हैं। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।मच्छर भगाने वाले उपकरण, बीड़ी-सिगरेट और चूल्हे का धूंआ भी प्रदूषण फैलाता है।अगर कोई इन वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे कमरे की खिड़की खोल देनी चाहियें।
इन दोनों बहुमंजिला इमारतों में एयर क्वालिटी स्तर ठीक नहीं रहा। मेट्रो के तत्कालीन चेयरमैन रहे ई-श्रीधरन ने तो इस बाबत पर्यावरण मंत्रालय से शिकायत भी की थी।डॉ. तुषार कुमार जोशी का कहना है कि श्रीधरन ने बताया था कि उन्होंने सबसे उपरी मंजिल पर अपना दफ़्तर बनाया है, लेकिन फिर भी लग रहा है कि वायु की गुणवत्ता ठीक नहीं है।इंडोर एयर पोल्यूशन का खतरा बना हुआ है।
बतौर जोशी, जब मैने जांच पड़ताल की तो वही स्थिति थी। बाद में कुछ उपाय करने पर सब ठीक हो गया।कई बार बड़े भवनों में हीटर के चलते सूखापन आ जाता है।यदि इमारत की बनावट सही नहीं है तो भी इस तरह की दिक़्क़तें सामने आती हैं।सीबीआई की नई बिल्डिंग में भी कुछ ऐसी ही शिकायत रही थी।जाँच एजेन्सी के अफ़सरों के मुताबिक़, 10-11 वीं मंजिल पर इंडोर एयर पोल्यूशन रहता है।कई बार एक दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर में बदलाव के चलते भी ऐसा महसूस होता है।