Adani Issue: 'हम अदाणी के हैं कौन' के तहत कांग्रेस ने PM मोदी से पूछे तीन और नए सवाल, LIC और SBI को लेकर घेरा
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि क्या अदाणी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद एलआईसी और एसबीआई को अडानी एंटरप्राइजेज एफपीओ में निवेश करने के निर्देश जारी किए गए थे जिससे इसके शेयर की कीमत में भारी गिरावट आई थी।
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अदाणी मामले में कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार पर लगातार हमलावर है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का हवाला देकर कांग्रेस के कई नेता सीधे प्रधानमंत्री मोदी से लगातार सवाल कर रहे हैं। इसी क्रम में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पार्टी की 'हम अदाणी के हैं कौन' सीरीज के तहत सरकार से तीन सवाल पूछे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने को कहा। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि क्या अदाणी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद एलआईसी और एसबीआई को अडानी एंटरप्राइजेज एफपीओ में निवेश करने के निर्देश जारी किए गए थे जिससे इसके शेयर की कीमत में भारी गिरावट आई थी।
बाजार मूल्य के निर्गम मूल्य से कम होने के बावजूद LIC और SBI ने जोखिम उठाया
जयराम रमेश ने दावा किया कि अदाणी एंटरप्राइजेज फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग (एफपीओ) में एंकर निवेशकों में भारतीय जीवन बीमा निगम ने 299 करोड़ रुपये की बोली लगाई, भारतीय स्टेट बैंक कर्मचारी पेंशन फंड ने 99 करोड़ रुपये की बोली लगाई और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस जिस कंपनी ने 125 करोड़ रुपये की बोली लगाई। उन्होंने कहा कि इन सार्वजनिक स्वामित्व वाली संस्थाओं ने इस तथ्य के बावजूद एफपीओ में भाग लिया कि बाजार मूल्य निर्गम मूल्य से काफी नीचे गिर गया था और एलआईसी और एसबीआई दोनों के पास पहले से ही अदाणी समूह की इक्विटी का बड़ा हिस्सा था। अदाणी समूह को उबारने के लिए करोड़ों भारतीयों की बचत को एलआईसी और एसबीआई ने संकट में डाल दिया।
कांग्रेस ने दिग्गज केंद्रीय मंत्री के फोन कॉल को लेकर पूछा सवाल
प्रधानमंत्री को अपने नवीनतम प्रश्नों में, कांग्रेस ने पूछा कि क्या यह सच है कि लंबे समय से व्यावसायिक संबंधों वाले एक हाई-प्रोफाइल केंद्रीय मंत्री ने गौतम अदाणी की ओर से सबसे प्रसिद्ध व्यवसायियों में से पांच-छह को व्यक्तिगत कॉल की और उनसे गौतम भाई को शर्मिंदगी से बचाने के लिए एफपीओ में अपने व्यक्तिगत धन का निवेश करने के लिए कहा? क्या यह जांच के लायक हितों के टकराव का प्रतिनिधित्व नहीं करता? क्या इस केंद्रीय मंत्री ने आपके निर्देश पर काम किया?
क्या कुछ चुनिंदा निवेशकों को लाभ नहीं पहुंचाया गया?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने यह भी पूछा कि क्या अदाणी एफपीओ को उबारने के लिए दबाव डालने वाले पारिवारिक कार्यालयों ने आश्वासन दिया कि यह केवल गौतम अदाणी की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए है और एफपीओ को बाद में रद्द कर दिया जाएगा और निवेशकों को पैसा वापस कर दिया जाएगा। उन्होंने पूछा कि क्या इस प्रासंगिक जानकारी को अधिकांश निवेशकों से छिपाना और केवल कुछ चुनिंदा लोगों के साथ साझा करना भारतीय प्रतिभूति नियमों का उल्लंघन नहीं है? क्या एफपीओ निवेशकों को इस तरह से धोखा देना नैतिक है?