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नए सियासी हालात से नेताओं-सांसदों में हड़कंप, करियर बचाने 'कमल' में ढूंढ़ रहे आशियाना

Thu, 01 Aug 2019 09:47 PM IST
अमित मंडल शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Thu, 01 Aug 2019 09:47 PM IST
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Leaders like Neeraj Shekhar concerned for political career and quitting old party
चुनाव जीतने के बाद अभिवादन करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : पीटीआई

पहले कांग्रेसी और बाद में कांग्रेस और भाजपा के विरोध की राजनीति करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र, समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर पार्टी और सदन से इस्तीफा देकर भाजपाई बन चुके हैं। कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पत्नी अमिता सिंह के साथ सदन की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। कारण राजनीतिक भविष्य। देश के दर्जन भर राजनीतिक दलों के सांसद और नेता संजय सिंह की ही पीड़ा से गुजर रहे हैं। राजनीतिक करियर को लेकर समाजवादी पार्टी और बसपा के कई सांसद अपने भविष्य की सुनिश्चतता तलाश रहे हैं। राज्यसभा के एक सांसद खुद इस मनोदशा के शिकार हैं और उनका कहना है कि कई संसद सदस्य राजनीतिक करियर को लेकर चिंतित हैं।

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लोकसभा चुनाव के नतीजे से फैलाई हताशा

राज्यसभा सांसद का मानना है कि लोकसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद अब संदेह कहां रह गया। अब तो देश के नेता नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हैं। हालांकि अभी सांसद महोदय बहुत कुछ गोपनीय रखना चाह रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी से कोई पद मिल जाए या फिर सांसदी बची रहे तो मिलने वालों की लाइन लगी रहती है। हर कोई पूछता है। जब यह दोनों नहीं होता तो वीरानी छा जाती है। सूत्र का कहना है अच्छे से अच्छे नेता पद और संसद में सदस्यता छिनने पर सिमट गए। बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी के एक और सांसद अपनी पार्टी की हालत से काफी निराश हैं। राष्ट्रीय जनता दल के एक सांसद की मनोदशा भी इसी तरह की है। सूत्र का कहना है कि आने वाले समय में भाजपा का दामन थामने वाले सांसदों की संख्या बढ़ सकती है।
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अखिलेश राज में कमजोर हुई सपा

समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने निजी चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी अजीत सिंह का हश्र देख लीजिए। पिता, पुत्र राजनीतिक पहचान के लिए अब संघर्ष कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के बड़े नेता रहे शिवपाल सिंह यादव का भी कुछ ऐसा ही हाल होने वाला है। सूत्र का कहना है कि मुलायम सिंह यादव में नेतृत्व की क्षमता कूट-कूटकर भरी थी। मुलायम सिंह यादव अब उम्रदराज और स्वास्थ्य से क्षीण हो गए हैं। वहीं, मुलायम सिंह यादव वाली बात उ.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव में नहीं है। वह समाजवादी पार्टी के भीतर की न तो निराशा दूर कर पा रहे हैं और न ही पार्टी को नई दिशा दे पा रहे हैं। पार्टी राजनीतिक अभियानों से भी लगातार दूर होती जा रही है। सूत्र का कहना है कि इस स्थिति को लेकर हम जैसे तमाम समाजवादी पार्टी के नेता काफी चिंतित हैं।
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बसपा का देख लीजिए हाल 

लोकसभा के एक सांसद कभी बसपाई थे। उनका कहना है कि अब बसपा अपने किसी व्यक्ति को राज्यसभा सदस्य बनाने की राजनीतिक ताकत खो चुकी है। उन्होंने कहा कि मैंने अपना करियर की खातिर बसपा छोड़ी। आज संतुष्ट हूं। क्योंकि राजनीतिक करियर बचा है। सूत्र का कहना है कि उन्होंने संपर्क जोड़कर अपनी पुरानी पार्टी के एक सहयोगी की भाजपा के नेताओं से मीटिंग कराई है। सबकुछ ठीक रहा तो यह चेहरा जल्द भाजपा में शामिल होगा। बताते हैं यह हालत संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की कमजोर हो रही स्थिति के कारण आ रही है। अलग से हुई चर्चा में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के एक सांसद भी इससे सहमत दिखाई दिए। सबका मानना है कि तीन तलाक का बिल हो या सूचना का अधिकार का बिल, यह राज्यसभा से पारित होने के लायक नहीं था। लेकिन दोनों बिल डंके की चोट पर पारित हो गए। 

सरकार का टॉप का फ्लोर प्रबंधन और विपक्ष का विखराव 

विपक्षी दलों के सांसद मान रहे हैं कि विपक्ष का फ्लोर प्रबंधन है ही नहीं। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष की ताकत कम है। लेकिन मौजूदा सत्र में किसी मुद्दे पर एकजुटता नहीं बन पाई। विपक्ष का बिखराव बना रहा। राज्यसभा में विपक्ष की अभी ताकत है। प्रभावी है, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष का कोई फ्लोर प्रबंधन ही नहीं है। सूत्र का कहना है कि तीन तलाक का विधेयक पेश होने के बाद विपक्ष के फ्लोर प्रबंधन की विफलता खुलकर सतह पर आ गई। बताते हैं, इस तरह के हालात लगातार निराशा के माहौल को बढ़ावा दे रहे हैं। 


कांग्रेस एक पूर्व मंत्री का दुखड़ा 

कांग्रेस पार्टी के पूर्व मंत्री अब संसद सदस्य हैं। मंत्री जी समाजवादी पार्टी के सांसद के तर्क सहमत हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद का कहना है कि विपक्ष की एकता न बन पाने का एक कारण मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की स्थिति है। कांग्रेस कमांडर विहीन चल रही है। इससे सदनों का फ्लोर प्रबंधन और विपक्षी एकता प्रभावित हो रही है। सूत्र का कहना है कि जब विपक्ष राजनीतिक ताकत में क्षीण दिखेगा तो इसका नुकसान विपक्षी दलों को होगा। बताते हैं आजम खान को जिस तरीके से लोकसभा में माफी मांगने की स्थिति का सामना करना पड़ा उसका कारण यही कमजोरी है।

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