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LCH Prachand: कैसे भारत सरकार को मालामाल सकता है यह लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड? बस HAL को करना होगा ये काम
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लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड।
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अमर उजाला।
विस्तार
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने हिदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड के लिए 156 हेलीकॉप्टर्स का रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है। इनमें से 90 हेलीकॉप्टर भारतीय थल सेना को और 66 एलसीएच भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे। वहीं रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एलसीएच प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर मार्केट में निर्यात की नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। यह न केवल रेगिस्तानी इलाकों बल्कि हाई एल्टीट्यूड एरिया जैसे सियाचिन में भी अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है।सेना को पांच से छह साल में मिलेंगे 156 प्रचंड
सरकार की 'मेक इन इंडिया' या 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के तहत लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड बनाने वाली कंपनी हिदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 156 हेलीकॉप्टर्स का रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया गया है। सेना के सूत्रों के मुताबिक इस RFP की अनुमानित लागत लगभग 50,000 करोड़ रुपये आने वाली है। वहीं इस खरीद से रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की बढ़ेगी, बल्कि हथियारों के स्वदेशीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। अभी तक एचएएल ने 15 प्रचंड हेलीकॉप्टर बनाए हैं, जिनमें भारतीय वायुसेना के लिए दस और सेना के लिए पांच एलसीएच प्रचंड शामिल हैं। वहीं 156 हेलीकॉप्टरों के अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के बाद इस ऑर्डर को पूरा होने में पांच से छह साल का वक्त लग जाएगा।
यूरोकॉप्टर टाइगर और अपाचे हैं पहुंच से बाहर
वहीं रक्षा विशेषज्ञ एलसीएच प्रचंड में बड़े निर्यात की संभावनाएं देख रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ और सेना से रिटायर्ड अधिकारी वत्स रोहित कहते हैं कि एलसीएच प्रचंड के बड़े प्रतिद्वंद्वी यूएस अपाचे और एएच-1जेड वाइपर जैसे पारंपरिक खिलाड़ी निस्संदेह ताकतवर हैं, लेकिन अपाचे की महंगी कीमत (30 मिलियन डॉलर से अधिक) और एएच-1जेड वाइपर की कीमत (20 मिलियन डॉलर से अधिक) के साथ ही, अमेरिकी विदेश नीति के चलते निर्यात पर लगी सीमाओं की वजह से उन्हें हासिल करना इतना आसान नहीं है। वहीं अपाचे के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखे जाने वाले यूरोकॉप्टर टाइगर की कीमत 40 मिलियन डॉलर से अधिक है, जिसके चलते उसे खरीद पाना हर देश के बस में नहीं हैं। फ्रांस और स्पेन यूरोकॉप्टर टाइगर के अपग्रेड पर विचार कर रहे हैं, जबकि जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया अपाचे AH-64 से रिप्लेस करने की सोच रहे हैं। जिसकी वजह से कई यूरोपीय देशों की निगाहें अब प्रचंड की ओर हैं।
रूसी हेलीकॉप्टर बेहद महंगे
रोहित कहते हैं कि वहीं रूस में बने एमआई-28एन और केए-52 (15 मिलियन डॉलर से 18 मिलियन डॉलर के बीच कीमत) भी ताकतवर टैंक रोधी हेलीकॉप्टर हैं, लेकिन कम निर्यात और कम उत्पादन संख्या के चलते बाजार में उनकी पहुंच सीमित है। वहीं तकनीकी रूप से भी दोनों बहुत एडवांस नहीं हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में अटैक हेलीकॉप्टर केए-52 की क्षमता दुनिया देख चुकी है, लेकिन यह काफी महंगा है। खुद रूसी सेना में भी इनकी संख्या 300 से कम है।
चीन के Z-10E और Z-19 को देता है टक्कर
तुर्की और इटली के सहयोग से बने T129 ATAK की बात करें, तो इसकी कीमत 40 मिलियन डॉलर से ज्यादा है। वहीं इसका प्रोडक्शन भी सीमित है। इसमें अमेरिका का दिया हुआ LHTEC T800-4A इंजन लगा है। वहीं, चीन निर्मित मीडियम अटैक हेलीकॉप्टर Z-10E कीमत (17 मिलियन डॉलर से 20 मिलियन डॉलर के बीच) के मामले में तो प्रचंड के लगभग समान है, लेकिन एलसीएच प्रचंड इससे आगे है। वहीं, चीन का दूसरा अटैक हेलीकॉप्टर Z-19 और प्रचंड का वजन लगभग एकसमान है। हालांकि चीन ज्योपॉलिटिक्स का इस्तेमाल करके हथियार बेचने के लिए लोन डिप्लोमेसी का सहारा लेता है, जो कई देशों को अखर सकता है।
लागत में कमी से एचएएल बन सकता है मालामाल
रोहित वत्स के मुताबिक एलसीएच प्रचंड की कीमत करीब 16 मिलियन डॉलर है, लेकिन उत्पादन बढ़ने के साथ लागत में कमी आने की पूरी संभावना है। वहीं प्रचंड अपने अधिकांश प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ देता है। इसका कम वजनी डिजाइन इसे मुश्किल हालात में हाई एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए एकदम उपयुक्त बनाता है। वह कहते हैं कि सेना जो मौजूदा प्रचंड इस्तेमाल कर रही है, उससे आतंकी और घुसपैठियों पर लगाम लगाने में मदद मिल रही है। प्रचंड हेलिकॉप्टर्स से कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू, डिस्ट्रक्शन ऑफ एनेमी एयर डिफेंस, काउंटर इनसर्जेंसी ऑपरेशन, रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट को मार गिराने में आसानी होगी और हाई एल्टीट्यूड बंकर बस्टिंग ऑपरेशंस में मदद मिलेगी।
प्रचंड में लगा है फ्रांसिसी इंजन
वत्स कहते हैं कि प्रचंड में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी लगी है, जो पश्चिमी देशों की जरूरत पूरा करती है। प्रचंड में फ्रांस में बना इंजन लगाया गया है, जिससे इसके निर्यात के लिए अमेरिकी की अनुमति लेनी जरूरी नहीं रह गई है। वह कहते हैं कि प्रचंड न केवल एंटी टैंक ऑपरेशन बल्कि बल्के हमलों और स्काउटिंग के लिए भी उपयुक्त है। इसके अलावा एलसीएच प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर के मामले में यूरोकॉप्टर टाइगर की कमी को भी पूरा करता है। अगर हम इसे और कैपेबल बनाएं और इसकी लागत पर ध्यान दें, तो प्रचंड उन देशों के लिए पसंदीदा विकल्प बन सकता है, जो कम लागत में एक आधुनिक हमलावर हेलीकॉप्टर की तलाश में हैं।
प्रचंड की खूबियां
एलसीएच प्रचंड में दो लोग बैठ सकते हैं। यह 51.10 फीट लंबा, 15.5 फीट ऊंचा है। पूरे सैन्य साजो सामान के साथ इसका वजन 5800 किग्रा है। इसपर 700 किग्रा के हथियार लगाए जा सकते हैं। वहीं अधिकतम रफ्तार 268 किमी प्रतिघंटा है। प्रचंड की रेंज 550 किमी है। यह लगातार 3 घंटे 10 मिनट तक उड़ान भर सकता है। यह वजन के साथ 16,400 फीट की ऊंचाई पर भी टेकऑफ कर सकता है। इसके अलावा प्रचंड में 20 मिमी की एक तोप भी लगी है।