{"_id":"6371853aa50e3c52117ee09a","slug":"lawyer-who-signed-the-petition-with-remarks-against-the-judges-is-also-guilty-of-contempt","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: जजों के खिलाफ टिप्पणी वाली याचिका पर हस्ताक्षर करने वाला वकील भी अवमानना का दोषी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: जजों के खिलाफ टिप्पणी वाली याचिका पर हस्ताक्षर करने वाला वकील भी अवमानना का दोषी
Mon, 14 Nov 2022 05:30 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 14 Nov 2022 05:30 AM IST
सार
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 11 नवंबर को पारित आदेश में याचिकाकर्ता मोहन चंद्र पी. के साथ अधिवक्ता विपिन कुमार जय को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता और उसकी ओर से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता को यह कहते हुए नोटिस जारी किया है कि अगर याचिका में न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई है तो वादियों की ओर से याचिका दायर करने वाले वकील अदालती कार्यवाही की अवमानना के लिए जिम्मेदार होंगे।
विज्ञापन
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 11 नवंबर को पारित आदेश में याचिकाकर्ता मोहन चंद्र पी. के साथ अधिवक्ता विपिन कुमार जय को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। दोनों को सुनवाई की अगली तारीख 2 दिसंबर, 2022 को हाजिर रहने को भी कहा गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका में की गईं टिप्पणियां न केवल कर्नाटक हाईकोर्ट के लिए अपमानजनक हैं बल्कि प्रकृति में अत्यधिक अवमाननापूर्ण भी हैं।
विज्ञापन
यह था मामला
शीर्ष अदालत कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर विशेष याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट ने कर्नाटक में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के चयन को चुनौती देने वाली मोहन चंद्र पी की याचिका को खारिज कर दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विशेष अनुमति याचिका में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश और खंडपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए न्यायाधीशों के खिलाफ टिप्पणियां कीं और उन पर सस्ते प्रचार के लिए याचिका खारिज करने का आरोप लगाया।
विज्ञापन