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Law For Transgenders: संशोधित बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी, 'ट्रांसजेंडर अधिकार' से जुड़े कानून में बदलाव लागू
Wed, 01 Apr 2026 11:06 AM IST
Asmita Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Asmita Tripathi
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:06 AM IST
सार
राष्ट्रपति से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित संशोधित बिल को मंजूरी मिल गई है। इस बिल में ट्रांसजेंडर के अधिकार से जुड़े कानून में बदलाव लागू होगा।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : एक्स/भारत की राष्ट्रपति
विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित संशोधित बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में शारीरिक नुकसान पहुंचाने के लिए श्रेणीबद्ध सजा का प्रावधान भी मौजूद है। विपक्षी सांसदों ने समलैंगिकों और समलैंगिक महिलाओं को इसके दायरे से बाहर रखने के लिए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 की कड़ी आलोचना की थी।
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बिल पर सरकार ने क्या कहा?
इस बिल में किसी व्यक्ति के ट्रांसजेंडर होने का निर्धारण करने के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना की गई है। इस प्रावधान का भी विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है। कानून मंत्रालय की 30 मार्च की अधिसूचना के अनुसार, संशोधित कानून केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित तिथि से प्रभावी होगा। संसद के दोनों सदनों में हुई बहस के दौरान, सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की रक्षा करना है। वहीं, विपक्ष ने प्रस्तावित कानून की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं जैसे व्यक्तियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को छीन लेता है। इसके साथ ही मांग की कि इसे उचित परामर्श के लिए एक स्थायी समिति को भेजा जाए।
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संशोधित बिल में क्या है?
इस विधेयक का उद्देश्य ट्रांसजेंडर शब्द की सटीक परिभाषा देना । इसके साथ ही और प्रस्तावित कानून के दायरे से विभिन्न यौन अभिविन्यासों और स्वयं द्वारा मानी जाने वाली यौन पहचानों को बाहर करना है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति में अलग-अलग यौन अभिविन्यास और स्वयं द्वारा मानी जाने वाली यौन पहचान वाले व्यक्ति शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही इन्हें न ही कभी शामिल किए गए होंगे। इस अधिनियम का उद्देश्य, लक्ष्य और प्रयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से ट्रांसजेंडर लोगों के रूप में जाने जाने वाले एक विशिष्ट वर्ग के व्यक्तियों की रक्षा करना है, जो अत्यधिक और दमनकारी प्रकृति के सामाजिक भेदभाव का सामना करते हैं।" विधेयक में कहा गया है, "इसका उद्देश्य विभिन्न लैंगिक पहचानों, स्व-अनुभूत यौन/लैंगिक पहचानों या लैंगिक तरलता वाले व्यक्तियों के प्रत्येक वर्ग की रक्षा करना नहीं था और न ही है।"