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POCSO: सहमति की उम्र में बदलाव के लिए विधि आयोग ने महिला एवं बाल विकास अधिकारियों के साथ की बैठक, यह है वजह

Fri, 16 Jun 2023 07:20 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 16 Jun 2023 07:20 PM IST
सार

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वर्षों से पॉक्सो सहित अन्य कानूनों में किशोरों के बीच संबंधों का निर्धारण करने में सहमति के कारण परेशानी होती है। पॉक्सो में 18 साल से कम उम्र के लोगों को बच्चा या फिर नाबालिग माना जाता है।

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Law Commission holds meeting with women and child development for change in age of consent
पॉक्सो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ 22वें विधि आयोग ने शुक्रवार को बैठक आयोजित की। आयोग ने सहमति की उम्र में बदलाव करने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों से जानकारी मांगी है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रितु राज अवस्थी ने बैठक की अध्यक्षता की।

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इस समस्या के कारण आयोजित हुई बैठक
मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वर्षों से पॉक्सो सहित अन्य कानूनों में किशोर और किशोरियों के बीच सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों का निर्धारण करने में सहमति के कारण परेशानी होती है। पॉक्सो में 18 साल से कम उम्र के लोगों को बच्चा या फिर नाबालिग माना जाता है। इसी मामले में कुछ जानकारियां देने के लिए बैठक की गई थी।

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हर तीन साल में आयोग का होता है गठन
पिछले साल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 साल की युवती से शादी करने वाले एक युवक को जमानत देते हुए कहा था कि पॉक्सो का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है। पॉक्सो के तहत वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंध के कारण किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता। बता दें, हर तीन साल में विधि आयोग का गठन किया जाता है, जो सरकार को कठिन मामलों में सलाह देता है।

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एक विशेषज्ञ पैनल का गठन
मध्यस्थता अधिनियम में सुधार की सिफारिश के लिए पूर्व कानून सचिव टी के विश्वनाथन के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ दल का गठन किया गया है। कानून मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल एन वेंकटरमानी, अतिरिक्त सचिव राजीव मणि, वरिष्ठ अधिवक्ता, नीति आयोग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, रेलवे और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों को भी शामिल किया है। समिति मध्यस्थता अधिनियम के कामकाज सहित इसके संचालन का मूल्यांकन और विश्लेषण करेगी। समिति विदेशी न्यायालयों के साथ तुलना कर सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी अवगत कराएगी।

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