फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Lathi is not a weapon of murder, it is the identity of the villagers, the Supreme Court gave an important decision in a case

लाठी हत्या का हथियार नहीं, यह ग्रामीणों की पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनाया अहम फैसला

Fri, 18 Sep 2020 04:48 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Fri, 18 Sep 2020 04:48 PM IST
विज्ञापन
Lathi is not a weapon of murder, it is the identity of the villagers, the Supreme Court gave an important decision in a case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

लाठी ग्रामीणों की पहचान से जुड़ी है, इसे हत्या का हथियार नहीं कह सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिपण्णी की और हत्या की एक धारा को गैर इरादतन हत्या की धारा में बदल दिया। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी के जेल में रहने की अवधि को सजा मानते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश भी दिया।

विज्ञापन


छत्तीसगढ़ के एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरएफ नरीमन की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा कि गांव के लोग लाठी लेकर चलते हैं, जो उनकी पहचान है। यह तथ्य है कि लाठी को हमले के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे सामान्य तौर पर हमला करने या हमले का हथियार नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन


जस्टिस आरएफ नरीमन, इंदिरा बनर्जी और नवीन सिन्हा की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मामले में आरोपी ने लाठी से सिर पर हमला किया। इसके बाद पीड़ित की दो दिन बाद मौत हो गई। ऐसे मामले में अदालत को हत्या के पीछे के कारण का पता लगाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत को मारपीट के तरीके, हत्या की प्रकृति, चोटों की संख्या समेत कई अन्य तथ्यों पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला देना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


गौरतलब है कि आरोपी जुगत राम ने भूमि विवाद में एक व्यक्ति के सिर पर लाठी से हमला किया था, हमले की वजह से पीड़ित की दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद साल 2004 में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया और फिर सेशन कोर्ट ने जुगत राम को उम्रकैद की सजा सुना दी। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि यह हत्या पहले से योजना बना कर नहीं की गई थी बल्कि गुस्से में हो गई थी, हालांकि अदालत ने धारा 302 के तहत सजा बरकरार रखी थी जिसके बाद इस फैसले को आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed