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लता मंगेशकर: भारत के बाहर इस देश में था स्वर कोकिला का पहला गायन कार्यक्रम, दिलीप कुमार ने कराया था पूरा आयोजन

Sun, 06 Feb 2022 05:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 06 Feb 2022 05:15 PM IST
सार

इस शो के दौरान उन्होंने बॉलीवुड में अपने समकालीन गायकों और संगीतज्ञों की यादें भी साझा कीं। लता जी ने यहां किशोर कुमार, हेमंत कुमार के अलावा एसडी बर्मन और नौशाद का भी जिक्र किया था।

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Lata Mangeshkar First performance in a concert outside India when Actor Dilip Kumar introduced her to the international audience
लता मंगेशकर ने 1974 में पहली बार विदेश में दिया था लाइव परफॉर्मेंस। - फोटो : Social Media

विस्तार

भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर का रविवार, छह फरवरी को निधन हो गया। उनके अवसान पर देश से लेकर विदेश तक में शोक की लहर है। अमेरिका से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक में लोगों ने लता ताई के निधन पर शोक जाहिर किया है। इस बीच कई लोगों को शायद इस बात की जानकारी भी नहीं है कि लता मंगेशकर आखिर विदेश में इतनी चर्चित हस्ती बनीं कैसे और विदेश में उनका पहला कॉन्सर्ट किस देश में आयोजित हुआ था। 
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विदेश में कहां हुआ था लता मंगेशकर का पहला गायन कार्यक्रम
लता मंगेशकर ने पहली बार विदेश में अपने गायन की प्रस्तुति 1974 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में दी थी। तब उन्हें लंदन के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम मंच रॉयल अल्बर्ट हॉल में अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिला था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस हॉल में लता मंगेशकर से पहले किसी भी भारतीय को परफॉर्म करने का मौका नहीं मिला था। उन्होंने हिंदी में अपने संक्षिप्त भाषण में कहा था, 'यह भारत से बाहर मेरा पहला संगीत कार्यक्रम है। मैं काफी नर्वस थी, लेकिन गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं आभारी हूं।'
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बताया जाता है कि लता मंगेशकर ने रॉयल अल्बर्ट हॉल में उन्हें सुनने आए दर्शकों के दिल में अपनी मधुर आवाज की छाप छोड़ी। इस शो के दौरान उन्होंने बॉलीवुड में अपने समकालीन गायकों और संगीतज्ञों की यादें भी साझा कीं। लता जी ने यहां किशोर कुमार, हेमंत कुमार के अलावा एसडी बर्मन और नौशाद का भी जिक्र किया था। इसके साथ ही उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी हास्यवृत्ति की झलक भी दी। 
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स्टेज पर लता का कैसे हुआ था परिचय? 
इस कार्यक्रम में दर्शकों के सामने लता मंगेशकर की पहचान कराने वाले अभिनेता दिलीप कुमार थे, जिन्हें लता जी यूसुफ भाई भी बुलाती थीं। उन्होंने स्टेज से कहा था कि जिस तरह एक फूल की सुगंध का कोई रंग नहीं होता, जिस तरह बहते पानी और हवा की कोई सीमा नहीं होती और जिस तरह सूर्य की किरणों का कोई धार्मिक बंटवारा नहीं होता, उसी तरह लता मंगेशकर की आवाज प्रकृति का चमत्कार है। दिलीप कुमार ने यह पूरा परिचय भाषण उर्दू में दिया था और लता मंगेशकर के स्टेज पर आते ही हॉल ताली की गड़गड़ाहटों से गूंज उठा था। 


कार्यक्रम के दौरान मंगेशकर ने 'मधुमती' फिल्म का 'आजा रे परदेसी', 'पाकीज़ा' फिल्म का 'इन्हीं लोगों ने' और 'महल' फिल्म का 'आएगा आने वाला' गीत गाया था। इस लाइव शो की रिकॉर्डिंग की 1,33,000 से अधिक प्रतियां बिकी थीं।
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