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लश्कर ने बनाया ऐसा ऐप जिसे सेना की मशीनें भी नहीं कर सकतीं डिटेक्ट

Sun, 05 Jun 2016 11:34 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 05 Jun 2016 11:34 PM IST
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Lashker's new app 'calculator' which avoid them surveillance by army
फाइल फोटो - फोटो : PTI

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के स्मार्ट फोन में नया ऐप पाया गया है जिसका नाम है ‘कैलकुलेटर’, इस एेप का इस्तेमाल आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बैठे अपने आकाओं से संपर्क में बने रहने और सेना की ओर से की जाने वाली निगरानी से बचने के लिए करते हैं। 

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इस साल पीओके से घुसपैठ करने वाले आतंकियों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद सेना ने पाया कि आतंकवादी स्मार्टफोन लेकर आए जिनमें कोई संदेश नहीं था। जिससे एक बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकी संगठन भी खुद को तकनीकि रूप से मजबूत करने में लगे हैं।
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एजेंसियों को यह जानकारी लश्कर-ए-तैयबा के कुछ आतंकियों से पूछताछ के दौरान मिली, आतंकियों से पूंछताछ में पता चला है कि इस आतंकी संगठन ने खुद को आधुनिक बना लिया है और ‘कैलकुलेटर’ नामक एक ऐप्लीकेशन तैयार किया है। इस एप्प की खास बात यह है कि यह मोबाइल नेटवर्क नहीं होने की स्थिति में भी काम करता है। यह प्रौद्योगिकी ‘कॉगनिटिव डिजिटल रेडियो’ की परिकल्पना पर आधारित है इससे यह आतंकी संगठन स्मार्टफोन को बिना नेटवर्क वाले संचार उपकरणों के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
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इस नेटवर्क की खास बात यह है कि यह अपना खुद का सिग्नल तैयार कर लेता है और सीमित दायरे में मौजूद दूसरी यूनिट के साथ भी खुद ही संपर्क स्थापित कर लेता है। संपर्क स्थापित करने के बाद दोनों एक दूसरे से संदेशों का आदान प्रदान, जीपीएस स्थलों को साझा कर सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सीमा पर अपने रेडियो सेट एवं फोन के साथ पकड़े गए आतंकवादियों को रास्तों और इलाके के बारे में निर्देश मिलते थे। हालांकि, सेना इससे निपटने का पूरी प्रयास कर रही है।

घुसपैठ करने वाले आतंकी समूहों की ओर से वायरलैस और मोबाइल फोन पर नजर रखने काम का करने वाले सेना की सिग्नल यूनिट और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) तथा दूसरी एजेंसियों को आतंकवादियों की ओर से उपयोग में लाई जा रही प्रणाली तक पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल पहले अमेरिका में ‘कैटरीना’ चक्रवाती तूफान के दौरान एक कंपनी ने किया ताकि प्रभावित लोग एक दूसरे से संपर्क में रह सकें। 


इस साल कश्मीर में अप्रैल के अंत तक आतंकियों की घुसपैठ की संख्या मात्र 35 रही। हाल ही में सेना ने वहां घुसपैठ की तीन कोशिशों को नाकाम किया है। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में घुसपैठ करने वाले आतंकवादी पहले बांदीपोरा के ऊंचे इलाकों में पहुंचे और वहां से कश्मीर के मध्य और दक्षिण इलाकों की ओर चले गए।  आतंकियों की घुसपैठ सबसे कम सर्दियों में होती है, और इस बार तो सर्दी भी लंबे समय तक नहीं रही, हो सकता है कि आतंकियों ने इसका फायदा उठाया हो। साल 2015 में घुसपैठ की 121 प्रयास हुए थे जिनमें से 33 सफल हो गए थे। जबकि 2014 में 222 बार घुसपैठ की कोशिश हुईं जिनमें 65 बार आतंकी घुसने में सफल रहे।

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