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Antibiotic Use:  लैंसेट की रिपोर्ट को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया भ्रामक, कहा- कई देशों में हमसे अधिक खपत

Wed, 14 Sep 2022 06:04 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 14 Sep 2022 06:04 PM IST
सार

अधिकारी ने कहा कि पिछले हफ्ते लैंसेट अध्ययन पर मीडिया रिपोर्ट पढ़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया चिंतित हो गए थे और विस्तृत विश्लेषण के बाद इस मुद्दे अधिक जानकारी के लिए सुबह 6 बजे उन्हें फोन किया था।

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Lancet report on unapproved antibiotic use in India is 'misleading, inappropriate': Govt official
एंटीबायोटिक - फोटो : pixabay

विस्तार

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने लैंसेट की उस रिपोर्ट को भ्रामक और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है जिसमें दावा किया गया है कि 2019 में भारत के निजी क्षेत्र में इस्तेमाल किए गए 47 प्रतिशत से अधिक एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन अस्वीकृत थे। आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) तैयार करने वाले वरिष्ठ फार्माकोलॉजिस्ट और नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स (एसएनसीएम) के उपाध्यक्ष प्रो. वाई के गुप्ता ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के एक कार्यक्रम में कहा कि इन फॉर्मूलेशन को राज्य दवा नियामक प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित किया गया था। 

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फॉर्मूलेशन को राज्य दवा नियामक प्राधिकरणों द्वारा स्वीकृति 
प्रो. गुप्ता ने कहा कि हालांकि लेखकों ने सीडीएससीओ द्वारा अनुमोदित फॉर्मूलेशन के लिए अस्वीकृत शब्द का इस्तेमाल किया है। यह ध्यान रखना उचित है कि इन फॉर्मूलेशन को राज्य दवा नियामक प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित किया गया था। इसलिए, 'अस्वीकृत' शब्द इस मामले में अनुचित लगता है। । केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) फार्मास्युटिका एलएस के लिए राष्ट्रीय नियामक निकाय है। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते लैंसेट अध्ययन पर मीडिया रिपोर्ट पढ़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया चिंतित हो गए थे और विस्तृत विश्लेषण के बाद इस मुद्दे अधिक जानकारी के लिए सुबह 6 बजे उन्हें फोन किया था।
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ब्राजील, रूस और यूरोप की तुलना में कम इस्तेमाल 
लैंसेट अध्ययन पर आधारित मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए प्रो. गुप्ता ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि भारत में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बहुत अधिक हुआ है और यह बताया कि देश में उनका उपयोग ब्राजील, रूस और यूरोप की तुलना में कम है। प्रो. गुप्ता ने कहा कि भले ही भारत मात्रा के मामले में सबसे बड़ा एंटीबायोटिक उपभोक्ता है, भारत में एंटीबायोटिक दवाओं की प्रति व्यक्ति खपत दर कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है।  
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उन्होंने कहा कि भारत बताई गई डीआईडी (प्रति 1000 निवासी प्रतिदिन परिभाषित दैनिक खुराक) 10.4 थी। वैश्विक तुलना में यूरोप, ब्राजील, रूस, श्रीलंका और पाकिस्तान में एंटीबॉयोटिक्स के अधिक इस्तेमाल की सूचना मिली है। मौजूदा अध्ययन 10.4 डीआईडी की प्रणालीगत एंटीबायोटिक दवाओं की प्रति व्यक्ति खपत दर में सुधार के बारे में बताता है जो कि 2015 में रिपोर्ट की गई दर (13.6 डीआईडी) की तुलना में कम है। 


2019 में एजिथ्रोमाइसिन की सबसे अधिक खपत 
उन्होंने कहा कि लेखकों के अनुसार, यह कुछ दवाओं की बिक्री को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से देश में नियामक बदलावों के कारण हो सकता है, हालांकि आगे की जांच करनी होगी। 2019 में एजिथ्रोमाइसिन सबसे अधिक खपत वाला एंटीबायोटिक था, लेकिन यह एनएलईएम में था और इसलिए मैं निश्चित रूप से सहमत हूं कि जागरूकता पैदा करने और एंटीबायोटिक के सही तरीके से काम करने को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। हालांकि बाजार में केवल लगभग 10 प्रतिशत फॉर्मूलेशन एनएलईएम में सूचीबद्ध हैं, लगभग 50 प्रतिशत डीडीडी (परिभाषित दैनिक खुराक) इन फॉर्मूलेशन से आए थे जो एनएलईएम-सूचीबद्ध दवाओं की अपेक्षाकृत अधिक खपत का संकेत देते हैं।

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