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पढ़ाई का जूनून: 78 की उम्र में नौंवीं में लिया दाखिला; तीन किमी चलकर जाते हैं स्कूल, बस खबर पढ़ने की है इच्छा

Thu, 03 Aug 2023 09:04 PM IST
शक्तिराज सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आईजॉल/गुवाहाटी
अमर उजाला ब्यूरो, आईजॉल/गुवाहाटी Published by: शक्तिराज सिंह Updated Thu, 03 Aug 2023 09:04 PM IST
सार

मिजोरम-म्यांमार के जिला चंफाई के रहने वाले लालरिंगथारा का कहना है कि उम्र मुझे ज्ञान हासिल करने से नहीं रोक सकती। वह 78 साल की उम्र में रोज तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते हैं।
 

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Lalringthara of Mizoram have Passion for study, took admission in 9 class at age of 78; Walk 3 KM to go school
लालरिंगतारा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कहते हैं सिखने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सही साबित करके दिखाया है मिजोरम-म्यामांर की सीमावर्ती जिले चंफाई के 78 वर्षीय लालरिंगतारा ने। सिखने की लालसा ऐसी कि इस उम्र में उन्होंने स्कूल में दाखिला लिया। मौसम कैसा भी हर दिन तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते हैं। महत्वकांक्षा केवल इतनी, अंग्रेजी में प्रार्थन पत्र लिख सकें और टेलीविजन में प्रसारित खबरों को समझ सकें।
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जानकारी के मुताबिक बचपन में ही पिता को खोने वाले लालचिंगथारा का जन्म 1945 में चंफाई जिले के के खुआन-ग्लेंग गांव में हुआ। आर्थिक परेशानियों के चलते उनको स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लेकिन जब भी मौका मिलता वे पढ़ाई करते थे। खेतों में मां का हाथ बंटाने खेत में जाना पड़ता। घोर गरीबी और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उनकी शिक्षा में कई बार रुकावटें आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके अंदर का उत्साह देखकर हर कोई हैरान होता। जब भी कभी मौका मिला, उन्होंने पढ़ाई फिर से शुरू कर दी। बारिश, धूप और गर्मी की परवाह किए बिना हर दिन स्कूल जाने वाले लालरिंगथारा कहते हैं, उम्र मुझे ज्ञान हासिल करने से नहीं रोक सकती। लालरिंगथारा की एक ही सपना है, अंग्रेजी में प्रार्थना पत्र लिखना और टेलीविजन पर प्रसारित समाचारों को समझने में सक्षम होना है।
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वे कक्षा दो तक ही पढ़ पाए थे कि 1995 पढ़ाई में विराम लग गया, जब उनकी मां दूसरे गांव में चली गई। इसके करीब तीन वर्ष के बाद वे पांचवीं कक्षा में दाखिला दिलाने में कामयाब रहे। लेकिन, पढ़ाई जारी रखने का उनका सपना पिर टूट गया। उनको फिर से आजीविका के लिए से खेतों में काम करने पड़ा। इतना कुछ होने के बावजूद वे मिज़ो भाषा में पढ़ाई करने में सक्षम हो गए। वे फिलहाल एक चर्च चौकीदार के रूप में कार्यरत हैं।
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अंतत: लालरिंगथारा ने आठवीं कक्षा पास की। इस वर्ष अप्रैल में उन्होंने हुराईकॉन में स्थानीय राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान हाई स्कूल में प्रवेश लिया। पहले पहल तो सब आश्चर्य हुए लेकिन स्कूल के अधिकारियों ने उसे कक्षा 9 में दाखिला दिया।


अधिकारियों ने कहना है कि अंग्रेजी सीखने की उनकी ललक ने उन्हें इस उम्र में भी स्कूल लौटने पर मजबूर कर दिया। उनकी महत्वाकांक्षा केवल अंग्रेजी में एप्लिकेशन लिखने और टेलीविजन पर प्रसारित समाचारों को समझने में सक्षम होना है।
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