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लखीमपुर हिंसा: अजय मिश्र पर जल्द फैसला संभव, आपराधिक से अधिक राजनीतिक मामला बनने से पार्टी असहज

Tue, 12 Oct 2021 05:03 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 12 Oct 2021 05:03 AM IST
सार

अभी तक भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से सीएम योगी आदित्यनाथ तक सभी भाजपा नेता ‘कानून अपना काम कर रहा है’ और ‘भाजपा पुलिस पर कोई दबाव नहीं डाल रही’ जैसे बयान दे रहे थे। पर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के बयान से पार्टी के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

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Lakhimpur Violence possibility of decision on Ajay Mishra soon party uneasy due to political issue becoming more than criminal matter
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री, अजय मिश्र टेनी - फोटो : ANI

विस्तार

लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र की गाड़ी से किसानों को कुचले जाने का मामला आपराधिक से कहीं अधिक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सोमवार को महाराष्ट्र में सरकार प्रायोजित बंद और विपक्ष के देशभर में प्रदर्शन का यही सार है। समझौता हो जाने के बावजूद किसान भी अब मिश्र के इस्तीफे पर अड़ गए हैं। ऐसे में जनता में बन रही धारणा के मद्देनजर पार्टी मिश्र पर जल्द कोई फैसला ले सकती है।

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हालांकि, पुलिस अधिकारियों का पहले मानना था कि यदि मंत्री-पुत्र आशीष वह एसयूवी नहीं चला रहा था, जिससे किसान कुचले गए, तो उसके खिलाफ कोई संगीन आपराधिक मामला नहीं बनेगा। लेकिन मौका-ए-वारदात पर उसकी मौजूदगी के सुबूतों से स्थिति बदल रही है। हालांकि, पूर्व डीजीपी डॉ एनसी अस्थाना का कहना है, यदि आशीष उस गाड़ी में मौजूद भी था, तो भी हत्या या गैरइरादतन हत्या का मामला नहीं बनता।
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लेकिन आशीष का दंगल में मौजूदगी का दावा तो अब तक जांच में गलत ही साबित हो रहा है। ऐसे में आपराधिक साजिश के आरोप से तो वह शायद ही बच पाए। चूंकि मामले को विपक्षी दलों ने इतना अधिक तूल दे दिया और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसपर स्वत:संज्ञान लेकर सख्त टिप्पणियां की हैं, इसलिए भाजपा को कोई-ना-कोई कदम तो उठाना ही पड़ेगा। अवकाश के बाद होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट कोई निर्णय ले लेता है तो पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।
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बदलता रुख
अभी तक भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से सीएम योगी आदित्यनाथ तक सभी भाजपा नेता ‘कानून अपना काम कर रहा है’ और ‘भाजपा पुलिस पर कोई दबाव नहीं डाल रही’ जैसे बयान दे रहे थे। पर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के बयान से पार्टी के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा है, हम कार से लोगों को कुचलने के लिए तो राजनीति में नहीं आए हैं।

यह है वजह
माना जा रहा है कि चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव और अदालत के कड़े रुख के चलते जनता में बनने वाली धारणा के मद्देनजर पार्टी कोई सख्त फैसला ले सकती है। यदि अजय मिश्र इस्तीफा देते भी हैं तो उनके स्थान पर किसी अन्य ब्राह्मण नेता को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह दी जा सकती है।


आशीष तीन दिन की रिमांड पर
कार से कुचलकर किसानों की हत्या मामले में आशीष मिश्र 'मोनू' को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। सुरक्षा कारणों से सोमवार को उसे सीजेएम चिंताराम के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। सीजेएम ने कुछ शर्तों के साथ आशीष को 15 अक्तूबर सुबह दस बजे तक पुलिस हिरासत में भेजने का फैसला किया।

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