लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष मिश्रा की रिहाई भाजपा के लिए 'फायदे का सौदा' या बनेगी मुसीबत! लगाए जा रहे हैं यह अनुमान
लखीमपुर में हुए आंदोलन में शिरकत करने गए मुजफ्फरनगर के किसान नेता शमशेर टिकैत कहते हैं कि फैसला कोर्ट का जरूर है लेकिन किसानों की नाराजगी बरकरार है। शमशेर कहते हैं कि जिस मंत्री के बेटे के ऊपर इतने आरोप लगे हों, उसको चुनाव के दौर में रिहाई मिलने से नाराजगी किसानों की और बढ़ेगी...
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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्र की जमानत के आदेश हो चुके हैं। हाई कोर्ट के आदेशों के बाद आशीष मिश्रा जमानत पर बाहर तो आ जाएंगे। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की शुरू हो गई हैं कि इसका असर दूसरे चरण से सातवें चरण तक के चुनावों पर कितना पड़ेगा। कुछ लोगों का मानना है कि ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए आशीष मिश्रा की रिहाई भाजपा के लिए बूस्टर टॉनिक की तरह होगी, तो कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जिस पूरे मुद्दे पर बवाल मचा था, उसकी रिहाई का नकारात्मक असर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में आशीष मिश्रा की रिहाई के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक नब्ज को बखूबी समझने वाले डॉ. आरएस चौधरी कहते हैं कि भाजपा के लिए लखीमपुर में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई घटना गले की फांस बन गई थी। किसानों की इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी रही थी। जब पहले चरण के मतदान का आधा वक्त बाकी है, तब इस फैसले का आना निश्चित तौर पर किसानों में नाराजगी के तौर पर देखा जा सकता है।
बढ़ेगी किसानों की नाराजगी
लखीमपुर में हुए आंदोलन में शिरकत करने गए मुजफ्फरनगर के किसान नेता शमशेर टिकैत कहते हैं कि फैसला कोर्ट का जरूर है लेकिन किसानों की नाराजगी बरकरार है। शमशेर कहते हैं कि जिस मंत्री के बेटे के ऊपर इतने आरोप लगे हों, उसको चुनाव के दौर में रिहाई मिलने से नाराजगी किसानों की और बढ़ेगी। वे कहते हैं कि अभी पहले चरण के मतदान में कुछ घंटे बाकी हैं और लोगों में इस बात का संदेश जाने लगा है कि लखीमपुर कांड का मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा जमानत पर रिहा हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक आरएस चौधरी कहते हैं कि पहले और दूसरे चरण में किसान बहुत प्रभावी मतदाता है। उनका मानना है इस रिहाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का वोटर और किसान मतदाता भाजपा के पक्ष में बिल्कुल नहीं देख रहा है। इस लिहाज से आशीष मिश्रा की रिहाई भाजपा के लिए दिक्कत भरी भी हो सकती है।
ब्राह्मणों को एकजुट करने का पैंतरा
हालांकि वहीं दूसरी ओर आशीष मिश्रा की रिहाई को कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ भाजपा के लिए फायदे के सौदे की रिहाई मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक डीएस शर्मा कहते हैं कि आशीष मिश्रा की रिहाई उस वक्त हुई है जब ब्राह्मणों को एकजुट करने के चुनावी पैंतरे चले जा रहे हैं। खासतौर से तीसरे चरण के मतदान के बाद से लेकर सातवें चरण के मतदान में ब्राह्मणों का झुकाव चुनाव की दशा और दिशा बदल देता है, उसमें आशीष मिश्रा की रिहाई को चुनावी नजरिए से देखा ही जाएगा। वे कहते हैं, हाई कोर्ट के फैसले पर कोई सवाल नहीं, लेकिन राजनैतिक ग्राउंड पर इसके तमाम मायने निकाले जा रहे हैं। शर्मा कहते हैं कि अजय मिश्र टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्रा को लेकर भाजपा का रवैया बहुत सख्त कभी नहीं रहा। अगर रवैया सख्त होता तो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री टेनी मोदी कैबिनेट में नहीं रहते। ऐसे में आशीष मिश्रा की जमानत से भाजपा के लिए ब्राह्मणों के बीच में एक सॉफ्ट झुकाव देखने को मिल सकता है।
लखीमपुर खीरी में चौथे चरण में मतदान 23 फरवरी को होना है। राजनीतिक विशेषज्ञ महेंद्र सिंह मानते हैं कि आशीष मिश्रा की जमानत से लखीमपुर खीरी की ब्राह्मण राजनीति और आसपास के जिलों में होने वाले मतदान की राजनीति पर असर दिखाई पड़ सकता है। वे कहते हैं कि खीरी में ब्राह्मण मतदाता पहले से ही अजय मिश्र टेनी और उनके बेटे के पक्ष में रहा है। जबकि किसान उनके पक्षधर लखीमपुर में हुई हिंसा का विरोध लगातार करते आए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता रहे प्रोफ़ेसर नंद किशोर अग्रवाल बताते हैं कि इतनी बड़ी घटना के मुख्य आरोपी की चुनाव के दौरान मिलने वाली जमानत का राजनीतिक असर न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। वे कहते हैं इसमें भाजपा को फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी। यह नुकसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर देखने को मिल सकता है। क्योंकि अभी दूसरे चरण का मतदान बाकी है और आशीष मिश्रा की रिहाई का संदेश किसानों में नाराजगी के तौर पर ही देखा जाएगा। जबकि फायदा बचे हुए चरणों में खासतौर से ब्राह्मण सीटों और ब्राह्मण बाहुल्य इलाकों में दिख सकता है।