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संघ का एक और संगठन नोटबंदी के खिलाफ, कहा- कैशलेस अर्थव्यवस्था रातों रात संभव नहीं
एम संजय/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 13 Dec 2016 11:16 PM IST
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नोटबंदी के 36 दिन बाद भी जमीन पर कैश की किल्लत को देख संघ के संगठनों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ के बाद लघु उद्योग भारती ने भी नोटबंदी से हो रही कठिनाइयों पर चिंता जताते हुए सरकार को भविष्य में पैदा होने वाले खतरों को लेकर आगाह किया है। वैसे सरकार की ओर से वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बुधवार को लघु उद्योग भारती के पदाधिकारियों संग बैठक कर उनकी चिंताओं का निराकरण करने का प्रयास करेंगे।
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लघु उद्योग भारती का कहना है कि नोटबंदी के बाद कैश की कमी से जो हालात पैदा हुए हैं उससे लघु उद्योग, ग्रामीण उद्योग और कृषि को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कैश की कमी से मजदूरों के रोजगार भी छीनने लगे हैं। कैशलेस अर्थव्यवस्था रातों रात संभव नहीं है। जल्द से जल्द नकदी का प्रवाह तेज होना चाहिए।
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अमर उजाला से बातचीत में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश मित्तल ने कहा कि आतंकवाद, काला धन, हवाला और नकली नोटों पर लगाम कसने के लिए नोटबंदी सही तो है, मगर इसके बाद कैश की किल्लत से जो हालात पैदा हुए हैं, उससे लघु, मझोले, ग्रामीण और कृषि उद्योग को संकट का सामना करना पड़ रहा है। निचले स्तर पर नकदी की सप्लाई जल्द सामान्य न हुई तो हालात बिगड़ने लगेंगे।
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कई ऐसी जगह हैं जहां चेक और ई-बैंकिंग से कामकाज संभव नहीं
मित्तल ने कहा कि कई ऐसी जगह हैं जहां चेक और ई-बैंकिंग से कामकाज संभव नहीं है। छोटे, मझोले, ट्रेड और कृषि क्षेत्र में नकदी की जरूरत पड़ती है। श्रमिकों को नकद भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि नकदी की कमी से पैदा समस्या के लिए वे छोटे और मझोले उद्योगों के बीच सर्वे करा रहे हैं।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष ने छोटे और मझोले उद्योगों के लिए बैंक से नकदी निकासी की सीमा 2 लाख करने की मांग की है, वर्तमान में यह सीमा 50 हजार है। उनका कहना है कि उन्होंने सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यम मंत्रालय के सचिव और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी है।
इससे पहले भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष बैद्यनाथ राय बेरोजगारी की समस्या पर चिंता जताते हुए कह चुके हैं कि रोजगार सृजन के मामले में मोदी सरकार भी पूर्ववर्ती सरकार के नक्शे कदम पर है। बीते दो साल में 20 लाख लोगों के रोजगार छीने हैं तो महज 1.35 लाख लोगों को रोजगार मिले हैं।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष ने छोटे और मझोले उद्योगों के लिए बैंक से नकदी निकासी की सीमा 2 लाख करने की मांग की है, वर्तमान में यह सीमा 50 हजार है। उनका कहना है कि उन्होंने सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यम मंत्रालय के सचिव और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी है।
इससे पहले भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष बैद्यनाथ राय बेरोजगारी की समस्या पर चिंता जताते हुए कह चुके हैं कि रोजगार सृजन के मामले में मोदी सरकार भी पूर्ववर्ती सरकार के नक्शे कदम पर है। बीते दो साल में 20 लाख लोगों के रोजगार छीने हैं तो महज 1.35 लाख लोगों को रोजगार मिले हैं।