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भारत में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी: सिर्फ 1% महिलाएं करती हैं मैमोग्राफी; केरल में स्थिति बेहतर

Fri, 04 Apr 2025 07:45 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 04 Apr 2025 07:45 AM IST
सार

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामले भारत के लिए चिंता का विषय है। एक शोध की माने तो कह सहते है कि इन बढ़ते मामलों का एक और ब़ड़ा कारण जागरूकता का अभाव है। हालांकि भारत का केरल एकमात्र ऐसा राज्य जहां की स्थिति जागरूकता के मामले में अन्य राज्यों के मुताबिक बेहतर है। 

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Lack of awareness about breast cancer in India Only 1% of women undergo mammography News In Hindi
ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com

विस्तार

भारत में हर साल लाखों महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के कारण अपनी जान गंवा देती हैं। अध्ययनों की मानें तो प्रति एक लाख महिला पर मृत्युदर 12.7 है और ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित के पांच वर्ष तक जीवित रहने की संभावना 66.4 फीसदी होती है। इसके बावजूद जानलेवा रोग के प्रति जागरूकता का बेहद अभाव है। एक ताजा अध्ययन में पाया गया कि भारत में 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र की सिर्फ एक फीसदी महिलाएं ही मैमोग्राफी कराती हैं।
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शोध में ये बातें आई सामने
मुंबई और वाराणसी स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर के शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी कराने में केरल की महिलाएं सबसे आगे हैं और नगालैंड में यह दर सबसे कम है। भारत में यह दर दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बेहद कम है। अफ्रीकी देशों में जहां 4.5 फीसदी महिलाएं मैमोग्राफी कराती हैं, वहीं कोरिया और जापान जैसे एशियाई देशों में यह दर 40 से 60 फीसदी और यूरोपीय देशों व अमेरिका में 84 फीसदी है।
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देश के अंदर राज्यवार आंकड़ों के विश्लेषण के दौरान पाया गया कि मैमोग्राफी का सबसे अधिक चलन केरल और कर्नाटक में है, जहां यह दर क्रमश: 4.5 फीसदी और 2.9 फीसदी दर्ज की गई। नगालैंड में आंकड़ा शून्य के करीब रहा, जबकि आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड में यह दर क्रमश: 0.1 फीसदी और 0.27 फीसदी रही। बायोमेड सेंट्रल (बीएमसी) पब्लिक हेल्थ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि ब्रेस्ट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के उद्देश्य से शुरू किए एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम का कवरेज अपर्याप्त है। एजेंसी

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45 वर्ष से ऊपर की महिलाओं पर अध्ययन
शोधकर्ताओं ने लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी ऑफ इंडिया से 35,000 से अधिक महिलाओं के डाटा का विश्लेषण किया, जो 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के 73,000 से अधिक लोगों का राष्ट्रीय प्रतिनिधि अध्ययन है। विश्लेषण के परिणामों से पता चला कि 45 वर्ष और उससे अधिक आयु की भारतीय महिलाओं में मैमोग्राफी का प्रचलन 1.3 फीसदी था। 45-59 वर्ष की आयु में यह 1.7 फीसदी और 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में 0.9 फीसदी था।
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