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कुरुक्षेत्रः कट्टरपंथियों की बिगाड़ को संभाल रहे हैं मोदी के अपने

Thu, 07 May 2020 04:33 PM IST
Harendra Chaudhary विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 07 May 2020 04:33 PM IST
सार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय विदेश नीति को लेकर बेहद सक्रिय और संवेदनशील
  • मनमोहन सिंह की तुलना में प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम देशों की ज्यादा यात्राएं की
  • प्रधानमंत्री चाहते हैं कि रमजान का महीना बेहद शांति और भाईचारे के माहौल में संपन्न हो

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Kurukshetra: PM Modi is very cautious for his image, his team is handling the mess of fundamentalists
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Social Media (सांकेतिक)

विस्तार

कोराना संक्रमण के खिलाफ जारी लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है। एक तरफ तो देश में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जांच और इलाज के लिए जरूरी सभी चिकित्सकीय संसाधन जुटाने और लगातार डेढ़ महीने से भी ज्यादा जारी देशव्यापी तालाबंदी (लॉकडाउन) की वजह ठप पड़ी अर्थव्यवस्था की गाड़ी को पटरी पर लाने तो दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को बचाने की दोहरी चुनौती है।

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भारत की छवि बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी मेहनत करते हैं, वहीं खुद को उनका कथित समर्थक बताने वाले कट्टरपंथियों की ऊटपटांग भड़काऊ हरकतें और बयानबाजी किए कराए को बराबर कर देती हैं। इन कट्टरवादियों के बिगाड़ को प्रधानमंत्री की भरोसेमंद टीम संभालने और देश में अमन चैन का माहौल बनाए रखने में जुटी है। जहां विदेश मंत्री एस जयशंकर देश की सीमाओं के बाहर का मोर्चा संभाले हैं, वहीं देश के भीतर अमन चैन और भाईचारा कायम रहे इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल संभाल रहे हैं।
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मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआत से ही सरकार के कुछ फैसलों को लेकर पाकिस्तान और दूसरी भारत विरोधी ताकतों ने दुनिया में भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया कि यहां अल्पसंख्यकों से भेदभाव किया जा रहा है। तीन तलाक कानून, अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य के दर्जे की समाप्ति, नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के दिसंबर 2014 तक भारत में बसे गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारत  की नागरिकता देने और एनआरसी लागू करने की चर्चा, ने पाकिस्तान समेत भारत विरोधी ताकतों को इस दुष्प्रचार का मौका अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर दे दिया कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो रहा है।
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लेकिन भारतीय कूटनीति ने अपने अथक और सक्रिय प्रयासों से हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान और दूसरी भारत विरोधी ताकतों को मुहंतोड़ जवाब देते हुए इस कोशिश को विफल किया और दुनिया के तमाम देशों से सीधा संवाद करके भारत की छवि को बचाए रखा।

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के समय से ही भारतीय कूटनीति के ट्रैक टू चैनल में सक्रिय भूमिका निभाने वाले एक वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ के मुताबिक मई 2014 से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय विदेश नीति को लेकर बेहद सक्रिय और संवेदनशील रहे हैं। खासकर गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी हिंदुत्ववादी छवि की वजह से प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने मुस्लिम देशों विशेषकर खाड़ी के देशों पर खासा ध्यान दिया।

इसके लिए उन्होंने मुस्लिम कूटनीति के कुछ विशेषज्ञों की सेवाएं भी लीं और संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, लेबनान, कुवैत, कतर, ओमान, जॉर्डन आदि देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ सीधा संवाद किया।

उन्होंने मनमोहन सिंह की तुलना में मुस्लिम देशों की ज्यादा यात्राएं की। खाड़ी के साथ-साथ अफगानिस्तान, ईरान, इंडोनेशिया, मलेशिया आदि देशों के साथ भी भारत ने अपने रिश्ते और बेहतर किए। मोदी के इन प्रयासों की वजह से इस्लामिक देशों में भारत के प्रति भरोसा बढ़ा और पाकिस्तान अपनी भारत विरोधी चालों में कामयाब नहीं हो सका। यहां तक कि तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और नागरिकता कानून जैसे मुद्दों पर भी पाकिस्तान भारत विरोधी दुष्प्रचार में अलग थलग पड़ गया।

लेकिन कोरोना संक्रमण काल में दिल्ली के निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात प्रकरण के बाद देश में जिस तरह मीडिया के एक हिस्से और सोशल मीडिया में कुछ लोगों ने जिस तरह इस खतरनाक बीमारी को लेकर मुसलमानों पर निशाना साधा गया और उससे शुरुआती दौर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खासकर खाड़ी क्षेत्र में भारत की छवि को नुकसान हुआ, उसे सुधारने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम को मैदान में उतरना पड़ा।

मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पूरी तत्परता से जिस तरह धड़ाधड कदम उठाए उससे भारत दुनिया में खासकर मध्य पूर्व के खाड़ी के देशों के बीच अलग थलग होने से बच गया।

खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम देशों में भारत को लेकर फैली गलतफहमी को दूर करने के लिए एक तरफ तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत, कतर, ईराक, जॉर्डन, मोरक्को, मिस्र आदि देशों के अपने समकक्षों से बात की।

फिर कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात की और उन्हें कोरोना के खिलाफ भारत में चल रही लडाई की जानकारी दी और इस लड़ाई में उन्हें भी भारत की तरफ से हर तरह की मदद का भरोसा दिया।

सूत्रों के मुताबिक कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से इन देशों को आश्वस्त किया गया कि भारत में मुसलमानों या किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है और देश में सभी धर्मों के समुदायों को समान रूप से संवैधानिक संरक्षण है। खाड़ी के देशों में कुछ कथित हिंदुत्ववादियों ने सोशल मीडिया पर जिस तरह की कट्टर और भड़काऊ बयानबाजी की उससे दुबई, शारजाह, कुवैत, कतर, ओमान
और सऊदी अरब जैसे भारत और भारतीयों के मित्र देशों में तीखी प्रतिक्रिया हुई।

लेकिन बात ज्यादा बिगड़ती इसके पहले ही इन देशों के साथ साथ पूरी दुनिया को संदेश देने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल साइट इंस्टाग्राम पर ब्लॉग लिखकर स्पष्ट किया कि किसी भी बीमारी का किसी जाति व मजहब से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने लिखा कि कोरोना या किसी भी बीमारी को किसी धर्म विशेष नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस लेख का देश और विदेशों में खासा असर पड़ा और खाड़ी के देशों से आने वाली प्रतिक्रियाएं थम गईं। इसी संकट प्रबंधन के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने भी अपने संबोधन में यह कहकर कि कुछ लोगों की हरकतों की वजह से पूरे समुदाय से दूरी बनाना ठीक नहीं है, सरकार को अपनी तरफ और राहत दी।

देवरिया जिले के एक भाजपा विधायक ने जब मुस्लिम सब्जी बेचने वालों ने सब्जी न खरीदने का बयान दिया और सोशल मीडिया व मीडिया में उनका यह वीडियो वायरल हुआ तो अविलंब भाजपा ने विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब तलब किया। बताया जाता है कि प्रदेश भाजपा ने यह फुर्ती राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर की।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को फोन करके इस मामले में कार्रवाई करने को कहा। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने अमर उजाला के लाइव कार्यक्रम में तब्लीगी जमात और कोरोना संक्रमण को लेकर पूछे जाने पर कहा कि तब्लीगी जमात के दिल्ली कार्यक्रम में घनघोर लापरवाही हुई और उसकी वजह से अचानक कोरोना के मामले बढ़े।

लेकिन सिर्फ एक कार्यक्रम और संगठन की गलत हरकत को लेकर पूरे समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। शर्मा ने कहा कि राज्य में जारी लॉकडाउन में मुस्लिम समुदाय भी पूरा सहयोग कर रहा है।

तब्लीगी जमात को लेकर जिस तरह मीडिया के एक हिस्से और सोशल मीडिया में कुछ लोगों द्वारा सांप्रदायिक नफरत फैलाने का नतीजा यह हुआ कि मध्य पूर्व में खाड़ी के भारत के परंपरागत मित्र देशों में इसे लेकर बेचैनी बढ़ गई। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई, शारजाह, अबूधाबी जैसे शहरों जहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं जिनमें हिंदू मुसलमान ईसाई सिख सभी शामिल हैं, इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई।

सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत, इराक आदि देशों में भी इस पर आवाजें उठीं। यहां तक कि इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी में भी इस पर सवाल उठे। यह इसलिए भी भारत के लिए चिंताजनक माना गया क्योंकि धारा 370, तीन तलाक और नागरिकता कानून के मुद्दों पर भी खाड़ी के देशों से कोई प्रतिक्रिया भारत सरकार के खिलाफ नहीं आई थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान तब्लीगी जमात प्रकरण के बाद जिस तरह देश के अनेक हिस्सों में मुसलमानों से भेदभाव की खबरें आईं और उसकी जिस तरह खाड़ी देशों में प्रतिक्रिया हुई वह चौंकाने वाली बात थी।

गुजरात के दिनों से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीब माने जाने वाले मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता जफर सरेशवाला कहते हैं कि दुबई, अबूधाबी, शारजाह, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, मिस्र, सीरिया, इराक आदि देशों में लाखों भारतीय कई तरह के रोजगार और कामधंधों के सिलसिले में रह रहे हैं।

वहां कभी भी उनके साथ धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ और न ही उन्हें धर्म के आधार पर देखा गया। लेकिन इस बार जैसी प्रतिक्रिया इन देशों के शासक वर्गों की हुई वह बेहद फिक्रमंद करने वाली है। सरेशवाला कहते हैं कि सदियों से इन देशों के साथ हिंदुस्तान के दोस्ताना ताल्लुकात हैं औऱ प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने इन रिश्तों को और मजबूत किया है।

उन्होंने इस्राइल से भारत के रिश्ते बढ़ाए औऱ वहां की यात्रा भी की लेकिन मोदी कूटनीति की वजह इस्राइल विरोधी अरब देश भारत से नाराज नहीं हुए और यहां तक कि सऊदी अरब औऱ संयुक्त अऱब अमीरात के सर्वोच्च सम्मानों से भी मोदी को नवाजा गया।

सरेशवाला कहते हैं कि लेकिन कुछ लोगों की बेवकूफाना हरकतों ने भारत को मुश्किल में डाला और बचाव के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी को आगे आना पड़ा। उन्होंने सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास नारे के तहत रमजान शुरू होते ही अपने कार्यक्रम मन की बात में मुसलमानों को रमजान की मुबारकबाद देते हुए उनसे अपील की कि इस रमजान में इतनी इबादत करें कि ईद तक कोरोना की लड़ाई देश जीत जाए।

केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि रमजान का महीना बेहद शांति और भाईचारे के माहौल में संपन्न हो। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि लॉकडाउन का पालन कराते हुए भी रमजान के मौके पर मुस्लिम मोहल्लों में जरूरत से ज्यादा सख्ती न दिखाई जाए।

लोगों को समझा बुझाकर सामाजिक दूरी के लिए प्रेरित किया जाए और जरूरत हो तो स्थानीय मुस्लिम धर्मगुरुओं और प्रतिष्ठित मुस्लिम नेताओं की मदद ली जाए। यही वजह है कि गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, असम, कर्नाटक, त्रिपुरा, गोआ जैसे भाजपा शासित राज्यों में भी रमजान के मौके पर खासी नरमी बरती जा रही है। क्योंकि रमजान के मौके पर अगर माहौल बिगड़ा तो पाकिस्तान और भारत विरोधी ताकतों को फिर दुनिया भर में दुष्प्रचार का मौका मिल जाएगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास रणनीतिकार और विश्वस्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सीधे इस मामले पर नजर रखे हुए हैं कि कहीं भी हालात बिगड़ने न पाएं। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक रमजान और ईद में सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे इसके लिए राज्य सरकार पूरा प्रयास कर रही है और मुस्लिम धर्मगुरु भी पूरा सहयोग कर रहे हैं।

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