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Manipur: 'बर्मा' की मिलिट्री से लड़ रहा ग्रुप मणिपुर हिंसा पर क्यों हुआ शाह से नाराज, यूं जताया भारत का आभार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 11 Aug 2023 07:06 PM IST
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सार
पत्र में कहा गया है कि कुकी नेशनल आर्मी (केएनए-बी), एकमात्र ऐसा संगठन है जो बर्मा में आपरेट करता है। दुनिया जानती है कि केएनए-बी, वहां के सैन्य जुंटा के अत्याचारी शासन से लड़ने वाले जातीय समूहों में से एक है। बर्मा में यह संघर्ष लगातार जारी है।
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Kuki National Organization express displeasure over statement of Home Minister Shah regarding Manipur violence
अमित शाह - फोटो : ANI

विस्तार

म्यांमार स्थित कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ, बर्मा) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। ये वही संगठन है, जो म्यांमार में मिलिट्री शासन के ख़िलाफ लड़ रहा है। केएनओ, बर्मा ने जो पत्र लिखा है, उस पर अध्यक्ष लेटलाम के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर दिए गए एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की गई है। पत्र में लिखा है कि गृह मंत्री ने कहा था, म्यांमार स्थित कुकी डेमोक्रेटिक फ्रंट (केडीएफ), जो एक सशस्त्र समूह है और वहां की मिलिट्री से लड़ रहा है, वह मणिपुर में सरकार के खिलाफ लड़ाई को बढ़ावा दे रहा है। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस तरह का कोई भी समूह 'बर्मा' में नहीं है। 



ध्यान भटकाने के लिए भारी दबाव
पत्र में कहा गया है कि कुकी नेशनल आर्मी (केएनए-बी), एकमात्र ऐसा संगठन है जो बर्मा में आपरेट करता है। दुनिया जानती है कि केएनए-बी, वहां के सैन्य जुंटा के अत्याचारी शासन से लड़ने वाले जातीय समूहों में से एक है। बर्मा में यह संघर्ष लगातार जारी है। ऐसे माहौल में केएनए-बी पर मणिपुर में जातीय समस्या जैसी बातों से ध्यान भटकाने के लिए भारी दबाव है। शाह ने बुधवार को लोकसभा में बोलते हुए, मणिपुर के जातीय संघर्ष के लिए म्यांमार की अशांति को जिम्मेदार ठहराया था। म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता ने हजारों शरणार्थियों को खुली सीमा के माध्यम से मणिपुर में आने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि शाह ने मणिपुर विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को बातचीत के माध्यम से आगे बढ़ने का आग्रह किया था। 




बलि का बकरा बनाने की कल्पना
पत्र में केएनए-बी के अध्यक्ष लेटलाम की तरफ से कहा गया है, बर्मा में हमारे कई गांवों पर लगातार हमले हो रहे हैं। लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इस वजह से लगभग 200 लोग बेघर हो गए थे। उन लोगों के पास भारत में शरण लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। केएनए-बी की तरफ से यह बात भी कही गई है कि भारत ने हमारे लोगों को अस्थायी आश्रय प्रदान किया है। इस दयालुता के लिए केएनए-बी ने भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। बर्मा में हमारे संगठन के सभी लोग मिलिट्री शासन 'जुंटा' के खिलाफ लड़ रहे हैं। ऐसे में हमारा संगठन, भारत में किसी एडवेंचर की तलाश नहीं कर सकता। हम लोग, भारत को सदैव एक मित्र देश और अंतिम आश्रय स्थल के तौर पर देखते हैं। लेटलाम की तरफ से कहा गया, मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि भारतीय क्षेत्र में हमारी किसी भी इकाई की कोई गतिविधि नहीं है। केएनए-बी की इस बात से भारतीय संसद को अवगत कराया जाए। इस तरह के आरोप मणिपुर प्रशासन द्वारा अपनी विफलताओं के लिए बलि का बकरा बनाने की कल्पना के अलावा और कुछ नहीं है।

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