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Manipur: कुकी विधायकों, नागरिक संगठनों का मणिपुर सरकार से बातचीत से इनकार, अलग राज्य की मांग बरकरार

Thu, 18 May 2023 02:18 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 18 May 2023 02:18 PM IST
सार

बैठक में कुकी जनजाति के लिए अलग केंद्र शासित राज्य या कुकी जनजाति के लिए राजनीतिक संरक्षण के लिए कदम उठाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

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Kuki MLA civil society groups decide not talk with Manipur Biren Singh govt
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मणिपुर में कुकी जनजाति के आठ विधायकों और अन्य नागरिक संगठनों ने तय किया है कि वह राज्य की एन बीरेन सिंह सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे। कुकी जनजाति के विधायक उनके लिए अलग राज्य देने की मांग कर रहे हैं लेकिन बातचीत के लिए तैयार हैं। बता दें कि कुकी जनजाति के राज्य में हिंसा के बाद कुकी जनजाति के लोगों के लिए अलग राज्य के गठन की मांग की थी। जिसे मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने ठुकरा दिया था और कहा था कि वह राज्य की एकता से कोई समझौता नहीं करेंगे। 
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'मणिपुर सरकार से नहीं करेंगे बातचीत'
बुधवार को मिजोरम की राजधानी आइजवाल में चिन-कुकी-जोमी-हमार जनजातियों के नागरिक संगठनों और विधायकों की बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा के विधायक भी शामिल थे। इस बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि 'बैठक में तय हुआ है कि वह मौजूदा संकट का एकजुट होकर सामना करेंगे और मणिपुर सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे। बयान में कहा गया है कि वह विचार विमर्श कर रहे हैं ताकि अन्य संगठनों के साथ एक राजनीतिक एजेंडे पर सहमति बन सके।'
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अलग राज्य की मांग बरकरार
बैठक में मौजूद रहे एक प्रतिनिधि ने बताया कि बैठक में कुकी जनजाति के लिए अलग केंद्र शासित राज्य या कुकी जनजाति के लिए राजनीतिक संरक्षण के लिए कदम उठाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बता दें कि 12 मई को कुकी जनजाति के विधायकों की एक बैठक हुई, जिसमें 7 भाजपा विधायक भी शामिल थे, जिसमें चिन-कुकी-मिजो-जोमी-हमार जनजाति के लोगों के लिए अलग राज्य की मांग उठाई गई थी। हालांकि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने उस मांग को ठुकरा दिया था और कहा था कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की किसी भी कीमत पर रक्षा की जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि मणिपुर में मैती समुदाय के लोग जनजातीय आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। जिसके विरोध में बीती 3 मई को ट्राइबल सोलिडैरिटी मार्च निकाला गया था। जिसके बाद राज्य में हिंसा भड़क गई थी। हिंसा में 70 के करीब लोगों की मौत हुई है। मणिपुर में बड़ी संख्या में सेना के जवानों की तैनाती की गई है। साथ ही मणिपुर से करीब छह हजार लोग पलायन करके मिजोरम पहुंच गए हैं। 
 
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