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कोटा में आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बीच कलेक्टर ने की बैठक, इन मुद्दों पर बनी बात
Sat, 29 Dec 2018 09:13 AM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: अजय सिंह
Updated Sat, 29 Dec 2018 09:13 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pexels.com
कोटा में छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस समस्या को हल करने के लिए कोटा के कलेक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने हितधारकों के साथ एक बैठक की है। यह बैठक राज्य सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए की गई। ये दिशानिर्देश देशभर से कोटा में पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों को तनाव मुक्त वातावरण उपलब्ध कराने से जुड़े हैं।
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बैठक में शिक्षा, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में ट्रेनी आईएएस देवेंद्र कुमार और ट्रेनी आईपीएस अमृता को कोटा में कोचिंग छात्रों द्वारा की गई आत्महत्याओं के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए सोशल ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
दोनों अधिकारियों को कहा गया है कि तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के मामलों का विश्लेषण किया जाए। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। जिला कलेक्टर ने छात्रों के लिए तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए अधिकारियों से कहा कि वह दिशानिर्देशों को लेकर सक्रिय रहें। साथ ही ये सुनिश्चित करें की यहां आने वाले छात्रों को किसी भी तरह की समस्या न हो।
इस बैठक में होप संस्थान भी शामिल हुआ। जो कोटा में आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए काम कर रहा है। यह संगठन छात्रों को परामर्श देने का काम भी करता है। बैठक में फैसला लिया गया कि कोटा नगर निगम, यूआईटी और जिला प्रशासन इस संस्थान का सक्रिय रूप से समर्थन करेंगे।
बीएससी नर्सिंग, बायोलॉजी, सोशियोलॉजी और साइकोलॉजी के छात्रों को वॉलेंटियर के तौर पर काम करने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। ताकि ये भी संस्थान के साथ काम कर सकें और छात्रों की परेशानियों का पता लगा सकें। जिला कलेक्टर ने कहा कि उन कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जो राज्य सरकार के जारी दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।