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Telangana Polls 2023: पूर्व विधायक राज गोपाल रेड्डी ने चुनाव से पहले छोड़ी भाजपा, अब इस पार्टी का थामेंगे दामन

Wed, 25 Oct 2023 06:04 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 25 Oct 2023 06:04 PM IST
सार

कोमाटिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी का यह कदम और बयान तब सामने आया है, जब भाजपा ने तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। बता दें कि इस सूची से उनका नाम गायब था। 
 

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Komatireddy Rajagopal Reddy after quitting BJP says Have taken decision to join Congress again
कोमाटीरेड्डी राजगोपाल रेड्डी - फोटो : Facebook

विस्तार

तेलंगाना और मिजोरम समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का एलान कर दिया गया। चुनाव आयोग के मुताबिक, मिजोरम में सात नवंबर और तेलंगाना में 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे।  राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान करने के बाद से ही वोटरों और नेताओं को अपने-अपने पाले में लामबंद करने की लड़ाई शुरू हो गई है। इस बीच, भाजपा के टिकट पर पिछले साल तेलंगाना में मुनुगोड विधानसभा उपचुनाव लड़ने वाले कोमाटिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। अब उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

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चुनाव से ठीक पहले रेड्डी ने भाजपा को कहा अलविदा
रेड्डी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, अपने समर्थकों की राय के अनुसार, मैंने इस उम्मीद में कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया कि मुझे अपने सभी समर्थकों का आशीर्वाद मिलेगा। अक्तूबर में उपचुनाव लड़ने के लिए पूर्व कांग्रेस विधायक ने पिछले साल अगस्त में पार्टी (कांग्रेस) से नाता तोड़ लिया था। वह बीआरएस उम्मीदवार के प्रभाकर रेड्डी से चुनाव हार गए थे।
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इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में  बीआरएस राज्य में हार का सामना करेगी। इस बार सबसे पुरानी पार्टी री विजय होगी। उन्होंने कहा, "हां, मैंने फिर से कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया है। मैं पहले मुनुगोडे से कांग्रेस पार्टी का विधायक था। मैंने देखा है कि इस चुनाव में, तेलंगाना के लोगों का मूड सबसे पुरानी पार्टी की ओर है। तेलंगाना में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इस बार, कांग्रेस केसीआर को हरा देगी। यह एक बड़ा कारण है कि मैंने पार्टी में वापस शामिल होने का फैसला किया।'
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कोमाटिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी का यह कदम और बयान तब सामने आया है, जब भाजपा ने तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। बता दें कि इस सूची से उनका नाम गायब था। 
 
बता दें कि राज गोपाल रेड्डी 2018 में मुनुगोडे विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। बाद में साल 2022 में उन्होंने कांग्रेस से अलविदा कहा साथ ही विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। 2022 में जब मुनुगोडे विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तो उन्होंने भाजपा के बैनर तले चुनाव लड़ा। उपचुनाव में इस सीट पर बीआरएस ने जीत दर्ज की। इस सीट में बीआरएस उम्मीदवार कूसुकुंतला प्रभाकर रेड्डीने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के कोमातीरेड्डी को पराजित किया। इस सीट में उपचुनाव के लिए तीन नवंबर 2022 को मतदान हुआ था। बता दें कि कांग्रेस विधायक कोमातीरेड्डी राज गोपाल रेड्डी के पार्टी से इस्तीफे की वजह से इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा था।

ऐसा है तेलंगाना में चुनाव कार्यक्रम 

  • तेलंगाना: 119 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में मतदान
  • विधानसभा चुनाव के लिए तीन नवंबर को अधिसूचना जारी होगी।
  • 10 नवंबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे।
  • नामांकन पत्रों की जांच 13 नवंबर को की जाएगी
  • 15 नवंबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे।
  • 30 नवंबर को मतदान होगा और तीन दिसंबर को मतगणना होगी।

अभी क्या है विधानसभा की स्थिति?
2018 के चुनाव के बाद 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस की 88, कांग्रेस की 19, आईएमआईएम की सात, टीडीपी की दो, भाजपा की एक, एआईएफबी की एक सीट थी। इसके अलावा एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हुए चार उपचुनावों में से तीन पर सत्ताधारी बीआरएस ने जीत दर्ज की। पहले इनमें से तीन सीटें उसके पास थी जबकि बीआरएस ने एक सीट कांग्रेस ने छीन ली। वहीं, एक सीट भाजपा ने बीआरएस की कब्जाई। इसके अलावा कांग्रेस के 12 विधायकों के बीआरएस में शामिल होने से पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ गई है। इस वक्त 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस के 101, एआईएमआईएम के सात, कांग्रेस के पांच और भाजपा के तीन विधायक हैं। दो सीट पर निर्दलीय विधायक हैं, जबकि एक सीट अभी खाली है। 



इस चुनाव में किसकी तैयारी कैसी है?
2018 में तेलंगाना के चुनाव सात दिसंबर को हुए थे। ऐसे में चुनावों को अब कुछ ही वक्त बचा है। इस चुनाव में बीआरएस के सामने अपनी सत्ता सुरक्षित रखने की चुनौती होगी। वहीं, केंद्र की सत्ताधारी भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल अपने प्रदर्शन को मजबूत करने को देखेंगे।  

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