कोलकाता: मेट्रो की सुरंग खोदने से कई घरों में आईं दरारें, केएमआरसी पर लापरवाही का आरोप
भीड़भाड़ वाले बोबाजार इलाके में दुर्गा पिटुरी लेन में कम से कम नौ क्षतिग्रस्त घरों के 21 परिवारों के 87 लोगों को पास के होटलों में भेजा गया है।
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कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने गुरुवार को बोबाजार इलाके का दौरा किया, जहां भूमिगत मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार करने के लिए सुरंग बनाने के दौरान कई घरों में रातों-रात दरारें आ गईं। उन्होंने इस समस्या के लिए परियोजना को अंजाम देने वाली एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया। क्षतिग्रस्त घरों से लोगों को निकाला गया गै। शहरी विकास मंत्री हाकिम ने दावा किया कि दुर्गा पिटुरी लेन में घरों में दरारें कोलकाता मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन द्वारा सुरंग के काम के दौरान ढाई साल पहले हुई दुर्घटना के कारण मिट्टी धंसने से हुई।
21 परिवारों के 87 लोगों को पास के होटलों में भेजा
केएमआरसी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता इमारतों में और दरारें रोकना है। भीड़भाड़ वाले बोबाजार इलाके में दुर्गा पिटुरी लेन में कम से कम नौ क्षतिग्रस्त घरों के 21 परिवारों के 87 लोगों को पास के होटलों में भेजा गया है। केएमआरसी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि एहतियाती उपायों के बावजूद यह स्थिति पैदा हुई क्योंकि एजेंसी को पहले भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा था। उनकी (केएमआरसी) ओर से कुछ गैरजिम्मेदारी हुई है। मेयर ने घटनास्थल के दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा कि 2019 में दुर्घटना के बाद एक बैठक के दौरान केएमआरसी ने कहा था कि उसने उस क्षेत्र की पूरी इंजीनियरिंग की जिम्मेदारी ली है। एक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) 31 अगस्त 2019 को एक जलीय चट्टानी पर्त से टकराया था जो बोबाजार क्षेत्र में गंभीर रूप से मिट्टी धंसने और कई इमारतों के ढहने का कारण बना।
हकीम ने कहा कि दो से तीन साल बाद ही मिट्टी का दोबारा जुड़ाव होगा। हकीम ने दावा किया कि ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के लिए कार्यकारी एजेंसी केएमआरसी जिम्मेदारी लेने में विफल रही है और कहा कि इमारतों में दरारें बनने से पहले उन्हें इसके बारे में सोचना चाहिए था। लंबे समय से प्रतीक्षित गलियारे की सुरंगें, जो पूर्व में साल्ट लेक सेक्टर- V और पश्चिम में हावड़ा मैदान को जोड़ेगी, बोबाजार के नीचे से गुजरती हैं। उस क्षेत्र की अधिकांश इमारतें एक सदी से अधिक पुरानी हैं। महापौर ने कहा कि कोलकाता नगर निगम के भवन विभाग के महानिदेशक को यह आकलन करने के लिए कहा गया है कि क्षतिग्रस्त इमारतों को रहने देना कितना सुरक्षित होगा और इस पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।