घोषणा पत्र: एससी-एसटी को सालाना 12 हजार, छात्रों को क्रेडिट कार्ड, जानें दीदी के तमाम वादे
- एससी-एसटी को मिलेंगे सालाना 12 हजार रुपये
- विधवाओं को हर महीने दिए जाएंगे एक हजार रुपये
- निम्न वर्ग के लोगों को छह हजार रुपये सालाना
- छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड लाने का वादा
विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी ने बुधवार (17 मार्च) को अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। इस दौरान पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र किया। साथ ही, बताया कि कोरोना काल की वजह से उनकी सरकार कुछ काम पूरे नहीं कर पाई।
दीदी ने यूं गिनाईं अपनी उलब्धियां
ममता बनर्जी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान हमने पश्चिम बंगाल में लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था की। साथ ही, सभी का ध्यान रखा। इसके अलावा टीएमसी सरकार में लोगों की आय में इजाफा हुआ है।
अपनी तबीयत का भी किया जिक्र
ममता बनर्जी ने घोषणा पत्र जारी करते वक्त अपनी तबीयत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मेरा स्वास्थ्य खराब होने के कारण घोषणा पत्र जारी करने में देर हुई। दीदी बोलीं, 'आप जानते हैं कि हमने अपने सभी वादे पूरे किए हैं। हम लोगों ने जो काम किया, उसकी तारीफ दुनियाभर में हो रही है। हमें यूएन से पुरस्कार भी मिला। हम 100 दिन के काम के मामले में नंबर एक पर हैं। हमने राज्य में 40 प्रतिशत गरीबी घटाई और किसानों की आय तीन गुना बढ़ाई।
घोषणा पत्र में किए ये वादे
रोजगार बढ़ाने का भी किया वादा
ममता बनर्जी ने कहा कि हमारी सरकार के कार्यकाल में बेरोजगारी घटी है। अगर हमारी सरकारी दोबारा सत्ता में आती है तो हर साल पांच लाख नौकरियां दी जाएंगी। दीदी ने बताया कि जब टीएमसी सत्ता में आई थी, तब हमारा राजस्व 25 हजार करोड़ था, जो अब 75 हजार करोड़ पहुंच गया है। ममता ने घोषणा पत्र में दुआरे सरकार कार्यक्रम हर साल चार महीने चलाने का वादा किया। साथ ही, घर-घर राशन पहुंचाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक घोषणा पत्र नहीं है। यह विकास की विचारधारा वाला घोषणा पत्र है। यह घोषणा पत्र लोगों का है, लोगों के लिए है और लोगों द्वारा लाया गया है।
चुनाव आयोग के नोटिस का भी दिया जवाब
घोषणा पत्र जारी करने के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के नोटिस पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे लोग पीएम मोदी से क्यों नहीं पूछते कि वह कोरोना वैक्सीन का इतना प्रचार क्यों कर रहे हैं? बता दें कि घर-घर राशन पहुंचाने की सरकार की घोषणा को लेकर चुनाव आयोग ने पुरुलिया के जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।