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Kolkata: मनोजीत को नियमों का उल्लंघन कर संविदा कर्मचारी नियुक्त किया गया; दुष्कर्म केस की जांच जासूसी विभाग को

Wed, 02 Jul 2025 12:50 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 02 Jul 2025 12:50 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने कहा, 'TMC एक कॉलेज कैंपस को सुरक्षित नहीं रख पा रही है अगर कॉलेज कैंपस में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म होता है तो आपकी शिक्षा प्रणाली और कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्न उठता है। ममता बनर्जी स्वयं कह चुकी हैं कि यह एक छोटी घटना है। मुझे लगता है कि इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार गंभीर नहीं है।'

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Kolkata Law College Assault Case: Monojit Mishra was appointed contractual staff violating norms
मनोजीत मिश्रा - फोटो : IANS

विस्तार

कोलकाता लॉ कॉलेज दुष्कर्म के मुख्य आरोपियों में से एक मनोजीत मिश्रा को बुनियादी नियमों का उल्लंघन कर उसी कॉलेज में अस्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया था। इस बीच खबर है कि मामले की जांच का जिम्मा जासूसी विभाग संभालने जा रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक, कुछ महीने पहले जब कॉलेज के पूर्व छात्र मनोजीत की नियुक्ति का प्रस्ताव गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के समक्ष रखा गया था तो आठ गवर्निंग बॉडी सदस्यों में से केवल चार ने ही उस नियुक्ति को मंजूरी देने के पक्ष में मतदान किया था। नियम यह है कि अस्थायी नियुक्तियों के लिए गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी की आवश्यकता होती है।
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सूत्रों के मुताबिक, आठ गवर्निंग बॉडी सदस्यों में से चार मनोजीत की नियुक्ति के खिलाफ थे, क्योंकि मनोजीत का आपराधिक रिकॉर्ड था। उस पर गुंडागर्दी, गंभीर नुकसान पहुंचाना और कॉलेज परिसर में यौन उत्पीड़न जैसे आरोप लग चुके हैं। हालांकि, इसके बावजूद गवर्निंग बॉडी के एक प्रभावशाली सदस्य के आग्रह के बाद उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी गई। मनोजीत उस सदस्य को कथित तौर पर चाचा कहकर संबोधित करते थे।
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मनोजीत की नियुक्ति रद्द, दोनों छात्र भी निष्काषित
दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने मनोजीत की संविदा नियुक्ति को रद्द करने का निर्णय लिया है। यह भी तय किया गया है कि आरोपी को अंतरिम अवधि के दौरान प्राप्त वेतन वापस करना होगा। मामले में दो अन्य आरोपी जैब अहमद और प्रमित मुखोपाध्याय (लॉ कॉलेज के वर्तमान छात्र) को संस्थान से निष्कासित कर दिया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों के नेताओं ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि मनोजीत की नियुक्ति को कैसे मंजूरी दी गई?


यह जवाबदेही नहीं, मिलीभगत है: मालवीय
भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि अब सवाल यह है कि कॉलेज की शासी संस्था में तृणमूल कांग्रेस के विधायक अशोक कुमार देब के अध्यक्ष और उप-प्राचार्य के सचिव रहते हुए मनोजीत की नियुक्ति को किसने मंजूरी दी। इतने लंबे समय तक उन्हें किसने संरक्षण दिया? यह कोई अकेली चूक नहीं है। कॉलेज में महिलाओं को लंबे समय से उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और यहां तक कि हत्या के प्रयास का सामना करना पड़ा है। फिर भी मोनोजीत मिश्रा सत्ता में बैठे लोगों की सुरक्षा में सिस्टम में बने रहे। अब जनता के आक्रोश के बाद वे अपने हाथ धोना चाहते हैं? यह जवाबदेही नहीं है। यह मिलीभगत है। अशोक देब, नयना चटर्जी और मनोजीत मिश्रा की मदद करने या उन्हें बचाने वाले हर सदस्य को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन पर दुष्कर्म के आरोपी की सहायता करने, उसके कुकर्मों को बढ़ावा देने और उसे बचाने का मामला दर्ज होना चाहिए।

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