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कोलकाता: एसआरएफटीआई के बाहर हंगामा, प्रदर्शनकारियों ने की गेट तोड़ने की कोशिश, पुलिस तैनात; क्या है विवाद?

Sun, 04 Oct 2026 07:15 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 04 Oct 2026 07:15 PM IST
सार

कोलकाता के एसआरएफटीआई के बाहर रविवार को प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कुछ लोगों ने गेट तोड़ने का प्रयास भी किया। यह प्रदर्शन 27 सितंबर की झड़प के विरोध में हुआ। आखिर 27 सितंबर को क्या हुआ था? प्रदर्शनकारी एसआरएफटीआई में क्यों जाना चाहते थे? छह दिन से संस्थान में पढ़ाई क्यों बंद है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Kolkata Chaos Outside SRFTI Protesters Try to Break Gate Heavy Police Deployment What Dispute
प्रदर्शन में पुलिस से झड़प - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) के बाहर रविवार को भारी हंगामा हुआ। बांगिया हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने संस्थान परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने गेट तोड़कर अंदर जाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। परिसर के अंदर मौजूद छात्रों और शिक्षकों ने बाहर से पत्थर और पानी की बोतलें फेंके जाने का आरोप लगाया। स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

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प्रदर्शन 27 सितंबर को एसआरएफटीआई परिसर में छात्रों के एक समूह और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के सदस्यों के बीच हुई झड़प के विरोध में आयोजित किया गया था। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा उपभोक्ता जागरूकता संगठन है। रविवार दोपहर प्रदर्शनकारी एसआरएफटीआई के मुख्य गेट के सामने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें परिसर में जाने से रोक दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने गेट खोलने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद वहां धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है।
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प्रदर्शनकारी एसआरएफटीआई के अंदर क्यों जाना चाहते थे?

 

  • बांगिया हिंदू जागरण मंच के एक सदस्य ने कहा कि संगठन ने पहले ही प्रदर्शन का एलान कर दिया था। प्रदर्शनकारियों की ओर से स्वामी विवेकानंद के पोस्टर और तस्वीर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया। दीपशुभ्रो दास ने आरोप लगाया कि वामपंथी संगठनों और सीपीएम से जुड़े लोगों ने बैनर और स्वामी विवेकानंद की तस्वीर को नुकसान पहुंचाया।
  • उन्होंने कहा कि संगठन इसे स्वामी विवेकानंद का अपमान मानता है। प्रदर्शनकारियों ने सनातन धर्म के खिलाफ कथित विरोध का आरोप भी लगाया और हनुमान चालीसा का पाठ करने की बात कही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पोस्टर और तस्वीर को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


परिसर के अंदर मौजूद छात्रों ने क्या आरोप लगाया?
हंगामे के दौरान एसआरएफटीआई परिसर के अंदर कई छात्र और शिक्षक हेलमेट पहने नजर आए। उनका आरोप था कि बाहर से परिसर के अंदर पत्थर और पानी की बोतलें फेंकी गईं। पुलिस ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को गेट के बाहर ही रोक दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि हालात नियंत्रण में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

एसआरएफटीआई में छह दिन से कक्षाएं क्यों बंद हैं?
27 सितंबर की हिंसा के बाद से एसआरएफटीआई में पढ़ाई प्रभावित है। शनिवार को छात्रों ने लगातार छठे दिन भी अकादमिक बहिष्कार जारी रखा। छात्रों की मांग है कि परिसर में हुई झड़प के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार किया जाए। छात्र अपनी सुरक्षा की भी मांग कर रहे हैं। हिंसा के बाद से संस्थान में नियमित कक्षाएं नहीं हो रही हैं। यानी विवाद अब केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। परिसर में पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।



अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
रविवार के प्रदर्शन के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिसर में दोबारा तनाव बढ़ने से रोकना है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संस्थान के अंदर जाने से रोक दिया और मौके पर पर्याप्त बल तैनात किया। फिलहाल पुलिस के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है।

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