AFT: सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के कोलकाता बेंच को साढ़े तीन साल बाद मिला स्थायी सदस्य, इन्होंने संभाला पदभार
शशांक शेखर मिश्रा ने लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) गौतम मूर्ति का स्थान लिया है, जिनकी 16 मई 2019 को सेवानिवृत्ति के बाद से ही यह पद खाली था। बक्सर जिले के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा सेना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर 39 वर्षों की शानदार सेवा दी।
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सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के कोलकाता क्षेत्रीय बेंच को साढ़े तीन साल के बाद आखिरकार स्थायी सदस्य मिल गया है। हाल में रक्षा मंत्रालय से नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) शशांक शेखर मिश्रा ने सदस्य (प्रशासनिक) के रूप में 21 दिसंबर को यहां कार्यभार ग्रहण किया है। यह पद मई 2019 से ही यहां खाली था। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गौतम मूर्ति का स्थान लिया है, जिनकी 16 मई 2019 को सेवानिवृत्ति के बाद से ही यह पद खाली था। मूल रूप से बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा सेना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर 39 वर्षों की शानदार सेवा के बाद इसी साल जुलाई में क्वार्टर मास्टर जनरल (क्यूएमजी) के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। महत्वपूर्ण क्यूएमजी के पद पर वे दो साल रहे, जिसके जिम्मे में मुख्यतः सेना में लॉजिस्टिक्स व रक्षा भूमि का प्रबंधन है।
समय पर न्याय सुनिश्चित करना होगी प्राथमिकता : मिश्रा
मिश्रा ने जून 1983 में कुमाऊं रेजिमेंट की 17वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त किया था। उनके नेतृत्व में उनकी बटालियन पंजाब में पाकिस्तान से लगती सीमा पर 'आपरेशन पराक्रम' का हिस्सा रहने से लेकर अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर भी तैनात रही है। उन्होंने इनफेन्ट्री ब्रिगेड, माउन्टेन डिविजन व माउन्टेन स्ट्राइक कोर की कमान में प्रशंसनीय कार्य किया। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के आइजी ऑप्स के कार्यकाल के पश्चात उन्हें पदोन्नती पर डायरेक्टर जनरल इनफेन्ट्री नियुक्त किया गया। अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी अलंकृत हैं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा ने बताया कि लंबित मामलों का त्वरित निपटारा और समय पर न्याय सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी।
सशस्त्र बलों के कर्मियों की शिकायतों का निवारण के लिए महत्वपूर्ण फोरम है एएफटी
बता दें कि 2007 के अधिनियम के तहत स्थापित सशस्त्र बल न्यायाधिकरण एक सैन्य न्यायाधिकरण है, जो सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना व वायुसेना) के कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की शिकायतों का निवारण व अपील के लिए एक महत्वपूर्ण फोरम है। सेवा शर्तों से संबंधित विवादों, शिकायतों, सेना न्यायालय के आदेशों, निष्कर्षों या दंडादेशों के खिलाफ इसमें अपील की जाती है। इसकी प्रधान पीठ दिल्ली में है, जबकि कोलकाता समेत देश के 10 शहरों में इसकी क्षेत्रीय बेंच (पीठ) है। प्रत्येक बेंच में एक न्यायिक और एक प्रशासनिक सदस्य होते हैं। न्यायिक सदस्य में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जबकि प्रशासनिक सदस्य में मेजर जनरल या उससे उपर रैंक के तीनों सेनाओं में से सेवानिवृत्त अधिकारी होते हैं।
कोलकाता बेंच के क्षेत्राधिकार में हैं पांच राज्य
कोलकाता बेंच के क्षेत्राधिकार में पांच राज्य हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान व निकोबार द्वीप शामिल हैं। बताया गया कि कोलकाता बेंच में न्यायिक सदस्य का पद भी विगत कई वर्षो से खाली है। कोलकाता बेंच के रजिस्ट्रार (प्रभारी) आर के मिश्रा ने बताया कि न्यायिक सदस्य का भी चयन व नियुक्ति हो चुका है। उनके कार्यभार ग्रहण के उपरांत यह बेंच सुचारू रूप से काम करने लगेगा। नियम के अनुसार, न्यायाधिकरण के सदस्य को चार साल की अवधि या 67 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले आए, के रूप में नियुक्त किया जाता है।