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हिमांशु रॉय : जानें क्या है मुंबई के इस सुपरकॉप की पूरी कहानी

Sat, 12 May 2018 09:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Sat, 12 May 2018 09:55 PM IST
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know the whole story of himanshu roy from simple mumbai boy to supercop

मुंबई में सुपरकॉप के नाम से चर्चित पूर्व एटीएस चीफ हिंमांशु रॉय ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। उन्होंने अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। वह एक बेहद सख्त अफसर के रूप में जाने जाते थे जो लंबे समय से कैंसर जैसी बीमारी से लड़ रहे थे। चलिए आपको बताते हैं मुंबई के एक आम लड़के से सुपरकॉप बने हिमांशु रॉय की पूरी कहानी....

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हिमांशु ने मुंबई के सेंट जैवियर कॉलेज से मेडिसन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। पिता पेशे से डॉक्टर थे। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने सीए की पढ़ाई शुरू कर दी। लेकिन कुछ समय बाद सीए भी छोड़ दिया।
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1998- सीए की पढ़ाई छोड़ने के दो साल बाद उन्होंने आईपीएस की परीक्षा दी और पुलिस अफसर बन गए। उन्हें 1998 का बैच मिला।

1991- इस वर्ष उनकी पहली पोस्टिंग मालेगांव में हुई थी। उस समय मुंबई में बाबरी मस्जिद विदवंस के कारण हालात काफी बिगड़ गए थे, उस वक्त रॉय ने ही हालात संभाले थे।

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पहली साइबर क्राइम सेल की शुरुआत की थी

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1992- आईपीएस की परीक्षा के दौरान ही उनकी मुलाकात मशहूर लेखर अमीश त्रिपाठी की बहन भावना से हुई थी। उस समय वही आईपीएस का पेपर ले रही थीं। इसके बाद दोनों ने 1992 में शादी कर ली। लेकिन भावना ने आईएएस की नौकरी छोड़ दी और एचआईवी समेत समाज कल्याण के लिए काम करने लगीं।

2009- यह वो साल था जब रॉय मुंबई के ज्वाइंट कमिश्नर बने थे। इससे पहले वह अहमद नगर के एसपी, इकॉनोमिक ऑफेंस विंग के डीसीपी, डीसीपी ट्रैफिक, डीसीपी जोन एक और नासिक के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके थे। 

2010-14- इस दौरान उन्होंने ही मुंबई में पहली बार साइबर क्राइम सेल की शुरुआत की थी और महिला सेल को बढ़ावा देने का काम भी किया था। 

2016- वह साल 2000 से ही कैंसर की लड़ाई से लड़ रहे थे। लेकिन वह खुद को फिट रखने के लिए भी हर संभव प्रयास करते थे। साल 2016 के बाद से वह मेडिकल लीव पर थे, कैंसर के कारण वह धीरे धीरे डिप्रैशन में जा रहे थे। जो उनकी आत्महत्या का कारण बना।  

सुलझाए थे बड़े केस

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सुलझाए थे ये बड़े हाई प्रोफाइल केस

- कसाब केस
- लैला खान मर्डर केस
- आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग केस
- जे.डे मर्डर केस
- विजय पलांडे केस
- उन्होंने ही आतंकी यासीन भटकल के 4 हजार ईमेल खंगाले थे
- दाऊद की संपत्ति कराई थी जब्त

हिमांशु ऐसे अकेले पुलिस अफसर थे जिन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त थी। यह सुरक्षा उन्हें ही दी जाती है जिनकी जान को खतरा होता है। मुंबई अंडरवर्ल्ड से दाऊद की डी कंपनी को उखाड़ फेंकने में उनका बहुत बड़ा हाथ था। जिस कारण उनकी जान को खतरा बढ़ गया था। बता दें जेड प्लस सिक्योरिटी मुख्यमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को ही दी जाती है। इसमें 36 सुरक्षाकर्मी होते हैं, जिसमें 10 एनएसजी, एसपीजी कमांडो होते हैं। बाकी पुलिस दल के ही लोग होते हैं।

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