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घर-घर में जगह बना चुकी दर्दनिवारक 'पैरासिटामॉल' का इन विवादों से भी है नाता

Fri, 18 Jan 2019 12:11 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Fri, 18 Jan 2019 12:11 PM IST
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सार
  • इस दवा से बच्चों को अस्थमा होने का खतरा 3 साल की उम्र के बाद से दिखाई दे सकता है।
  • वैज्ञानिकों ने दावा किया कि इस दवा से शरीर में फ्री रैडिकल्स बढ़ जाते हैं।
  • पैरासिटामॉल शरीर में मौजूद कॉक्स-2 (एंजाइम) को काम करने से रोकता है।
  • मानसिक विकास को भी करती है प्रभावित।
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Know some controversies related to Paracetamol
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

हर घर में अपनी खास जगह बना चुकी पैरासिटामॉल को सबसे अच्छी दवाईयों में से एक माना जाता है। लोगों का मानना है कि बुखार जैसी बीमारियों को दूर करने में ये दवाई किसी चमत्कार से कम नहीं है।



लेकिन इसे हानिकारक बताने वाली खबरें भी कुछ कम नहीं हैं। पहले जहां कहा जाता था कि ये दवाई गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं के लिए हानिकारक है, लेकिन अब ये भी कहा जा रहा है कि ये 7 साल से छोटे बच्चों के लिए भी हानिकारक है। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि ये दवा सामान्य परिस्थितियों में सबसे सुरक्षित है।


अब एक शोध ने इस दवा को लेकर लोगों की चिंताए और अधिक बढ़ा दी हैं। ये शोध कहता है कि इससे बच्चों को अस्थमा होने का खतरा होता है। ये शोध ब्रिटेन की ब्रिस्टल तथा ओस्लो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है। उनका कहना है कि दवा से बच्चों को अस्थमा होने का खतरा 3 साल की उम्र के बाद से दिखाई दे सकता है।

वैज्ञानिकों ने इस शोध में 1,14,500 महिलाओं के डाटा का अध्ययन किया और उनके बच्चों के सात साल के होने तक जांच की। फिर वैज्ञानिकों ने दावा किया कि इस ड्रग से शरीर में फ्री रैडिकल्स बढ़ जाते हैं। बच्चों के इससे एक तरह की एलर्जी भी हो जाती है, जिससे आगे जाकर दमा का खतरा बढ़ जाता है।

दमा का खतरा 29 फीसदी बढ़ जाता है

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की डॉ. मारिया मागुंस का कहना है कि पैरासिटामॉल बच्चों को बुखार में दी जाने वाली प्रचलित दवा में से एक है। इससे उनमें दमा की चपेट में आने की आशंका 29 फीसदी बढ़ जाती है। वहीं अगर गर्भवती महिलाएं इस दवा का सेवल करें तो बच्चों में 3 साल की अवस्था में पहुंचने तक दमा की शिकायत होने की संभावना 13 फीसदी तक बढ़ जाती है।

मानसिक बीमारी का भी खतरा

एक अन्य शोध में पता चला कि पैरासिटामॉल से मानसिक बमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ये शोध यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने किया। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि गर्भावस्था के दौरान यदि महिलाएं पैरासिटामॉल के सेवन करें तो इससे गर्भस्थ शिशु के दिमाग के विकास पर गलत असर पड़ता है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु के हार्मोन्स में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। जिससे मानसिक विकास प्रभावित होता है।

इस शोध में 1996 से लेकर 2002 के बीच जन्मे 64,000 शिशुओं से जुड़े डाटा का अध्ययन किया गया। लेकिन बाद में इस अध्ययन में सामने आए नुकसान को ब्रिटेन के एनएचएस ने पर्याप्त वैज्ञानिक तथ्यों के न होने के आधार पर खारिज कर दिया।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

वयस्कों को हृदय से जुड़े रोग का खतरा

पैरासिटामॉल का इस्तेमाल वयस्क दर्द से निजात पाने के लिए करते हैं। इससे उनमें हृदय से जुड़े रोग का खतरा बढ़ जाता है। इस बात का दावा ब्रिटेन के 'लीड्स इंस्टीट्यूट ऑफ रूमैटिक एंड मस्क्यूलोस्केलटल मेडिसिन' के वैज्ञानिकों ने किया है।

6.66 लाख मरीजों पर किए परीक्षण के बाद पता चला कि अगर लंबे समय तक दर्द से निजात के लिए दवा का प्रयोग हो तो 63 फीसदी अकस्मात मौत का शिकार, 68 फीसदी को हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक का खतरा और 50 फीसदी को पेट में छाले और रक्त स्राव की समस्या होती है। इन्हें शोध में पता चला कि पैरासिटामॉल शरीर में मौजूद कॉक्स-2 (एंजाइम) को काम करने से रोकता है। इस परीक्षण में उन लोगों को शामिल किया गया जो बीते 14 साल से दर्द की दवा ले रहे थे।

1953 में पहली बार बाजार में उतरी

पैरासिटामॉल की जांच 1947 में गहराई से की गई, इसके बाद 1953 में यह पहली बार बाजार में उतरी। इसका पहला परीक्षण 1887 में हुआ था। लेकिन अगले 60 सालों में भी ये आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली ड्रग नहीं बनी। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे ज्यादा पेनासीटिन नामक दवा को प्रमोट किया गया।

डब्लूएचओ की सलाह

पैरासिटामॉल को आसानी से सहन किया जा सकता है, जिस कारण यह डॉक्टर की प्रेस्क्रिप्शन के बिना भी बाजार में मिल जाती है। डब्ल्यूएचओ की सलाह के मुताबिक ये बच्चों को तभी दी जानी चाहिए जब बुखार 38.5 डिग्री सेंटीग्रेड (101.3 फेरेनहाइट) से ज्यादा हो।

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