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साबरमती आश्रम की 100वीं वर्षगांठ, जानिए 10 महत्वपूर्ण बातें
amarujala.com- Presented by: अरविंद कुमार
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:55 PM IST
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गुजरात में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम की स्थापना के सौ साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह का उदघाटन करने के लिए पीएम मोदी अहमदाबाद में हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 17 जून, 1917 को अहमदाबाद के कोचरब में साबरमती आश्रम की स्थापना की थी। आइए जानते हैं इसके बारे में खास बातेंः
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साबरमती आश्रम की 10 खास बातेंः
1. गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद भारत में उनका पहला आश्रम 25 मई, 1915 को अहमदाबाद के कोचरब क्षेत्र में स्थापित किया गया था। इसके बाद 17 जून, 1917 को आश्रम को साबरमती के किनारों पर खुली जमीन के पास स्थानानतरित कर दिया गया।
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2. बापू ने आश्रम में 1915 से 1933 तक निवास किया। जब वे साबरमती में होते थे, तो एक छोटी सी कुटिया में रहते थे जिसे आज भी 'हृदय-कुंज' कहा जाता है। यह ऐतिहासिक दृष्टि से बेदह खास है जहां उनका डेस्क, खादी का कुर्ता, उनके पत्र आदि मौजूद हैं।
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3. आश्रम के एक मुख्यद्वार से थोडी दूरी पर स्थित है-गेस्ट हाउस नंदिनी। यहां देश के कई जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी जिनमें पं. जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी.राजगोपालाचारी, दीनबंधु एंड्रयूज और रवींद्रनाथ टैगोर आदि जब भी अहमदाबाद आते थे तो यहीं ठहरते थे।
4. आश्रम से प्रारंभ में निवास के लिये कैनवास के खेमे और टीन से छाया हुआ रसोईघर था। सन् 1917 के अंत में यहां के निवासियों की कुल संख्या 40 थी।
5. साबरमती आश्रम (जिसे हरिजन आश्रम भी कहा जाता है) 1917 से 1930 तक मोहनदास गांधी का घर था जो भारत की स्वतंत्रता के आन्दोलन के मुख्य केन्द्रों में से एक था।
6. इसका नाम साबरमती आश्रम रखा गया क्योंकि साबरमती नदी पर स्थित था और इसका निर्माण दोहरे मिशन द्वारा एक ऐसे संस्थान के रूप में करवाया गया जो सत्य की खोज जारी रखे।
7. इस आश्रम से ही 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने आश्रम से 241 मील लम्बी दांडी यात्रा ब्रिटिश नमक कानून के विरूद्ध शुरू की थी।
8. 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने शपथ ली थी कि भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाकर ही वे इस आश्रम में वापस लौटेंगे।
9. 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र देश घोषित हुआ और इसके एक साल बाद उनकी हत्या हो गई।
10.आज आश्रम प्रेरणा और मार्गदर्शन स्त्रोत के रूप में सेवा करता है और गांधीजी के जीवन के मिशन के स्मारक और संघर्षकारियों के लिए के लिए साक्ष्य बन गया।