देश की सुरक्षा की ओर सरकार की तरफ से आज एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिका की ही तरह अब भारत की भी एक महिला स्वैट टीम होगी। इस टीम को गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिल्ली की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। करीब 15 महीनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद ये महिला कॉन्स्टेबल किसी भी परिस्थिति का मुकाबला करने में पूरी तरह तैयार हैं। इस स्वैट टीम में कुल 40 महिला कॉन्स्टेबल हैं जिनमें से 36 उत्तरपूर्वी राज्यों से हैं। चलिए आपको बताते हैं इस स्वैट टीम से जुड़ी कुछ बातें-
दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने दिया टीम बनाने का सुझाव
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दिल्ली पुलिस की स्वैट टीम
इस टीम को बनाने का विचार सबसे दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक का था। उनका मानना था कि आतंकी हमले और बंधक बनाए जाने की स्थिति में ये टीम किसी पर भी भारी पड़ने की क्षमता रखती है। इस टीम में 36 महिलाएं देश के उत्तरपूर्वी राज्यों से हैं। 13 महिला कॉन्स्टेबल असम से हैं, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और मणिपुर से 5-5 महिलाएं हैं। मेघायल की रहने वाली चार हैं, नागालैंड से 2 हैं। साथ ही मिजोरम और त्रिपुरा से 1-1 हैं।
वीवीआईपी सुरक्षा सबसे बेहतर तरीके से कर सकती है
इस टीम को कई प्रकार के विस्फोटकों से संबंधित जानकारी दी गई है। ये टीम वीवीआईपी सुरक्षा सबसे बेहतर तरीके से कर सकती है। इन्हें आईआईडी इस्तेमाल करने के बारे में भी बताया गया है। इसके साथ ही ये टीम बिना हथियार के भी दुश्मन से आसानी से निपट सकती हैं। इन्हें शहर के अलावा जंगल में ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग भी दी गई है।
हथियार न होने की स्थिति में भी लड़ने की ट्रेनिंग दी गई है
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दिल्ली पुलिस की स्वैट टीम
इन्हें हथियार न होने की स्थिति में भी लड़ने की ट्रेनिंग दी गई है। इसके लिए इन्हें इजराइली कर्व मागा की ट्रेनिंग दी गई है। इसके अलावा इन्हें जीलॉक 21 पिस्टल, एमपी5 सबमशीन गन की भी एक्सपर्ट ट्रेनिंग दी गई है। इस तरह की टीम दुनिया के कई बड़े देशों के पास नहीं है। इसी कारण वैश्विक तौर पर भारत के लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले से लोगों को संबोधित करेंगे तो इसी स्वैट टीम पर उनकी सुरक्षा का जिम्मेदारी होगी।
15 महीने की दी गई ट्रेनिंग
इन्हें शहर की रणनीतिक लोकेशन यानि सेंट्रल और साउथ दिल्ली में तैनात किया जाएगा। एक खुफिया रिपोर्ट में को यह बात भी कही गई है कि महिला फिदायीन राजधानी पर हमला करने की तैयारी कर रही हैं लेकिन ये टीम उनसे पूरी तरह निपटने की क्षमता रखती है। इन्हें झारौंदा कलां और एनएसजी के मानेसर स्थित सेंटर पर दी गई है। जहां पुरुष कमांडो को 12 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। वहीं इन महिलाओं को 15 महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी गई है। इन्हें 12 महीनों की कमांडों ट्रेनिंग के अलावा 3 महीने की स्वैट ट्रेनिंग स्वैट एक्सपर्ट द्वारा दी गई है।