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सांसदों को मिलने वाले वेतन-भत्तों को जानकर फट जाएंगी आंखें, खुद पढ़िए

Sat, 25 Mar 2017 01:10 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Sat, 25 Mar 2017 01:10 PM IST
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Know about salary and pension of MP and ex mp

सुप्रीम कोर्ट और देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद के बीच एक बार फिर ठनती दिख रही है, मुद्दा बना है पूर्व सांसदों की पेंशन और भत्तों का। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट के इस नोटिस पर सांसदों का पारा चढ़ा हुआ है, दो दिन पहले इस मुद्दे पर राज्यसभा में भी खूब शोर शराबा हुआ।

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सांसदों ने इसे कार्यपालिका के क्षेत्र में न्यायपालिका का हस्तक्षेप बताया। हालांकि सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया है कि वह संसद सदस्यों के हितों से कोई समझौता नहीं होने देगी और उनका पूरा ख्याल रखेगी। चर्चा के दौरान सपा के राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल ने इस बात का जिक्र किया कि कई सांसद ऐसे हैं जिनके परिवार मुफिलिसी में गुजारा कर रहे हैं इसलिए जरूरी है कि उनका ख्याल रखा जाए।
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वहीं सांसदों की इस 'पीड़ा' पर सोशल मीडिया में भी बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार पहले ही सांसदों पर जरूरत से ज्यादा खर्च करती है फिर उन्हें तमाम सुविधाएं देने की जरूरत क्या है। ऐसे दिमाग में पहला सवाल यही उठता है कि आखिर एक सांसद को क्या क्या सुविधाएं मिलती हैं। तो आइए हम आपको बताते हैं एक सांसद और पूर्व सांसद पर कितना खर्च करती है सरकार।

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सांसद को कितना मिलता है वेतन और भत्ता

Know about salary and pension of MP and ex mp
-द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार एक सांसद पर हर माह कम से कम 2.7 लाख रुपये खर्च करती है
-एक सांसद को हर माह फिलहाल 50 हजार रुपये वेतन के रूप में दिए जाते हैं
-वेतन के अलावा हर सांसद को संसदीय क्षेत्र भत्ता के रूप में 45 हजार रुपये दिए जाते हैं
-इसके अलावा 45 हजार रुपये ऑफिस खर्च के रूप में मिलते हैं, जिसमें से 30 हजार रुपये सहायक और 15 हजार रुपये स्टेशनरी खर्च के लिए
-संसद सत्र के दौरान 2000 रुपये रोजाना भत्ते के रूप में हर सांसद को मिलते हैं

(सरकार ने भी पिछले साल एक ‌लिखित सवाल के जवाब में माना था कि सांसदों के वेतन भत्ते पर हर साल वह 176 करोड़ रुपये खर्च करती है।)

वेतन से इतर मिलने वाली अन्य सुविधाएं
-सरकारी खर्चे पर एक सांसद पत्नी या सहायक के साथ सालभर में 34 हवाई यात्राएं कर सकता है 
-जबकि ट्रेन के लिए यह सीमा असीमित है, वो भी फर्स्ट क्लास कोच में। 
-दिल्‍ली के पॉश इलाके में हर सांसद को बंगले या फ्लैट की सुविधा
-सांसद और उनके आश्रितों के लिए किसी भी सरकारी अस्पताल में पूरी तरह मुफ्त इलाज
-प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज के दौरान कुछ चीजों को छोड़कर बाकी का भुगतान सरकारी खर्चे से
-वाहन खरीदने के लिए 4 लाख तक बिना ब्याज का लोन
-घर में इस्तेमाल करने के लिए तीन टेलीफोन लाइनें, जिन पर हर साल 50000 कॉल मुफ्त
-सालाना 50 हजार यूनिट बिजली मुफ्त, फाल्तू होने पर रियायती दरों पर बिजली की सुविधा
-साल में एक बार घर में फर्नीचर के लिए 75 हजार रुपये 
-घर में सालाना 40 हजार लीटर पानी मुफ्त
-कंप्यूटर खरीदने के लिए सालाना 2 लाख रुपये की सरकारी मदद
-वेतन पर किसी तरह का टैक्स न देने की छूट
(सांसद सदस्य रहने के दौरान किसी भी तरह का व्यापार या कारोबार करने की छूट, बशर्ते उसमें हितों का कोई टकराव न हो)

पूर्व सांसद को मिलने वाली सुविधाएं

Know about salary and pension of MP and ex mp

-मासिक पेंशन के रूप में हर माह 20000 रुपये
-पांच साल पूरे होने पर 1500 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे
-सांसदों को डबल पेंशन लेने का भी हक, मसलन पहले विधायक रहें हैं तो उसकी भी पेंशन और सांसद रहने की भी पेंशन
-पत्नी या आश्रित को फेमिली पेंशन, पूर्व सांसद की मृत्यु होने पर पति या पत्नी को आजीवन आधी पेंशन
-पूर्व सांसद को फ्री में ऐसी फर्स्ट क्लास में असीमित यात्राओं की छूट, सहायक या पत्नी साथ होने पर सेंकेंड क्लास में यात्रा की छूट

सांसदों के वेतन भत्ते और पेंशन को दोगुना करने की सिफारिश
कमाल की बात है कि इतने वेतन भत्तों और पेंशन के बाद भी सांसदों के लिए यह सुविधाएं कम महसूस की जा रही हैं। इसलिए यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री और गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सांसदों के वेतन भत्तों के निर्धारण के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। जिसने अपनी रिपोर्ट में वेतन भत्ते बढ़ाने संबंधी 64 सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी गई थी।

जिनमें सांसदों का वर्तमान वेतन और पेंशन दोगुना करने के साथ ही भत्तों की मद में बढोत्तरी की सिफारिश की गई थी। हालांकि इनमें से आधी से ज्यादा सिफारिशों को सरकार ने नामंजूर कर दिया था। बाकी सिफारिशों पर अभी निर्णय नहीं हो सका है। सांसदों के वेतन भत्ते बढ़ने की संभावनाओं के बीच निजी संस्‍था लोक प्रहरी और एडीआर ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस पर रोक लगाने की मांग की थी।

याचिका में पूर्व सांसदों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाओं को भी खत्म करने की मांग की गई थी जिसे समानता के अधिकार के विरुद्ध बताया गया ‌था। कुछ सांसदों ने भी वेतन भत्ते बढ़ाने का विरोध किया था। माकपा सांसद केएन बालागोपाल ने तो खुद सांसदों को अपने वेतन भत्ते तय करने पर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि इसके लिए स्‍वतंत्र निकाय का गठन किया जाए। 

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