प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने अगले सीजेआई के लिए न्यायमूर्ति गोगोई के नाम की सिफारिश की
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने मंगलवार को केंद्र सरकार को एक पत्र भेजा जिसमें उन्होंने अगले प्रधान न्यायाधीश पद के लिए न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के नाम की सिफारिश की है।न्यायमूर्ति गोगोई को तीन अक्तूबर को अगले प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलायी जाएगी। प्रधान न्यायाधीश मिश्रा ने कानून एवं न्याय मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में अगले प्रधान न्यायाधीश के लिए न्यायमूर्ति गोगोई के नाम की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति गोगोई वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं।
Chief Justice of India office has sent the letter to the Union of India (UOI) recommending Justice Ranjan Gogoi as the next Chief Justice of India: Sources pic.twitter.com/dtGzou2AKp
— ANI (@ANI) September 4, 2018विज्ञापन
दीपक मिश्रा होंगे 2 अक्टूबर को रिटायर
चीफ जस्टिस मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर होने वाले हैं और उन्हें अपने रिटायर होने के कम से कम एक महीने पहले सरकार को अगले चीफ जस्टिस के लिए नाम का सुझाव देना था। नियमों के मुताबिक, सरकार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से उनके उत्तराधिकारी का नाम पूछती है और सीजेआई के सुझाए नाम पर ही सरकार अपनी मुहर लगाती है।
जस्टिस गोगोई ने उठाया था चीफ जस्टिस के कामकाज पर सवाल
बता दें कि जस्टिस रंजन गोगोई असम से हैं और फिलहाल चीफ जस्टिस मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ हैं। जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और चीफ जस्टिस के खिलाफ सवालिया निशान लगाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के तरीके और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए गए थे।
सीजेआई के खिलाफ फूंक चुके हैं बिगुल
सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस कर सभी को चौंका देने वाले चार जजों में से एक जस्टिस रंजन गोगोई भी थे। जस्टिस गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र हैं। चीफ जस्टिस मिश्रा की अगले महीने 2 अक्टूबर को सेवानिवृत्ति के बाद जस्टिस गोगोई इस पद पर नियुक्त होने जा रहे हैं। इसके साथ ही वह पूर्वोत्तर भारत से इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले जज बन जाएंगे।
वर्ष 1978 में गुवाहाटी हाईकोर्ट से वकालत शुरू करने वाले जस्टिस गोगोई 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने थे। वर्ष 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था और इसके बाद वे चुनाव सुधार से लेकर आरक्षण सुधार तक के कई अहम फैसलों में शामिल रहे हैं।
कुछ अहम फैसले
- जाटों को केंद्रीय सेवाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के दायरे से बाहर करने वाली पीठ में थे शामिल
- असम में घुसपैठियों की पहचान के लिए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) बनाने का दिया निर्णय
- सौम्या मर्डर मामले में ब्लॉग लिखने पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू को अदालत में किया था तलब
- जेएनयू छात्रनेता कन्हैया कुमार के मामले में एसआईटी गठन से किया था इनकार
- कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस कर्णन को छह महीने की कैद की सजा देने वाली पीठ में थे शामिल
- लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा व विधान परिषद चुनावों के उम्मीदवारों को संपत्ति, शिक्षा व चल रहे मुकदमों का ब्योरा देने का आदेश देने वाली पीठ में थे शामिल
- अनुसूचित जाति के एक आदमी को दूसरे राज्य में आरक्षण कोटे का लाभ नहीं दिए जाने का निर्णय सुनाया