किसानों का अल्टीमेटम... सरकार ने मांगें न मानीं तो 26 को ट्रैक्टर परेड
- चार जनवरी को प्रस्तावित वार्ता से पहले किसान सख्त
- कहा- आर-पार की लड़ाई में निर्णायक मोड़ पर किसान
- बात न बनने पर राज्यपाल आवास घेरने की दी चेतावनी
विस्तार
तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के लिए 38 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों ने आंदोलन तेज करने का अल्टीमेटम दिया है। किसान नेताओं ने शनिवार को कहा कि अगर अगली वार्ता में सरकार हमारी मांगें नहीं मानती तो 26 जनवरी को जब देश गणतंत्र दिवस मनाएगा, हम ट्रैक्टर परेड निकालेंगे।
चार जनवरी को प्रस्तावित वार्ता से पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि अगर बैठक में बात नहीं बनती तो छह जनवरी को कुंडली, मनेसर पलवल-केएमपी एक्प्रेस वे पर रिहर्सल मार्च निकालेंगे और शाहजहांपुर से किसान दिल्ली कूच करेंगे। छह से 26 जनवरी तक देशव्यापी अभियान चलाकर कानूनों की हकीकत लोगों को बताएंगे। 26 जनवरी को राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह के बाद किसान ट्रैक्टर परेड करेंगे। इसी दिन किसानों को दिल्ली में डेरा डाले दो माह पूरे हाेंगे। गौरतलब है कि ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन गणतंत्र दिवस के समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।
गलत जानकारी दे रही है सरकार
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पिछली बैठक में हमने सरकार से पूछा था कि क्या वह 23 फसलों की एमएसपी पर खरीद करेगी? इस पर उन्होंने कहा, नहीं। इसके बावजूद सरकार जनता को गलत जानकारी दे रही है। अब तक प्रदर्शन के दौरान करीब 50 किसान शहीद हुए हैं। वहीं, स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा, सरकार का 50 प्रतिशत मांगे मानने का दावा झूठ है। हमें अब तक लिखित में कुछ नहीं मिला है।
किसान ऐसे तेज करेंगे आंदोलन
- 13 जनवरी : लोहड़ी-मकर संक्रांति पर किसान संकल्प दिवस। लोहड़ी में जलाएंगे कृषि कानून।
- 18 जनवरी : महिला किसान दिवस में आंदोलन में शामिल महिलाओं के योगदान पर चर्चा होगी।
- 23 जनवरी : नेताजी सुभाषचंद्र बोस की याद में आजाद हिंद किसान दिवस, जिलों में धरना, राज्यपाल निवास का घेराव।
- किसानों को आंदोलन से जोड़ने के लिए देशभर में रैलियां और धरना होगा।
सरकार के पास अब दो ही रास्ते
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि 'सरकार के पास दो रास्ते हैं या तो कृषि कानूनों की बिन मांगी सौगात वापस ले और एमएसपी पर खरीद की गांरटी दे। या हमारा दमन करे, लाठी-गोली चलाए। लड़ाई आर-पार की है और किसान निर्णायक मोड़ पर हैं।'
वहीं केंद्रीय कृषि-किसान कल्याण मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि 'हमें उम्मीद है कि अगले दौर की वार्ता में समाधान निकल आएगा और किसानों का आंदोलन खत्म हो जाएगा। सरकार किसानों की दो मांगें मान चुकी है। तीनों कानून किसानों के हित में हैं और एमएसपी पर कोई संशय नहीं है।'
दिल्ली आंदोलन में शामिल यूपी के किसान ने दी जान
किसान आंदोलन में शामिल बिलासपुर के पसियापुरा निवासी बाबा कश्मीर सिंह (75) ने आत्महत्या कर ली। उनका शव शनिवार को गाजीपुर बॉर्डर पर एक शौचालय में मिला। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला है। खेती के साथ उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे की सेवा करने वाले कश्मीर सिंह ने इसमें लिखा है कि 'कृषि कानून से आहत होकर वह जान दे रहे हैं।'