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कीर्ति आजाद बोले: तीन साल कांग्रेस में नहीं मिला कोई काम, जानिए खास बातचीत में क्या-क्या कहा
Tue, 23 Nov 2021 11:28 PM IST
Jeet Kumar
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 23 Nov 2021 11:28 PM IST
सार
1983 में क्रिकेट विश्वकप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे कीर्ति आजाद ने आज कांग्रेस का हाथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया।
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कीर्ति आजाद
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कीर्ति आजाद ने कांग्रेस पर काम न मिलने का आरोप लगाया और कहा कि ममता बनर्जी 2024 के चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर एक सर्वमान्य हल के तौर पर सामने आ सकती हैं। इस अवसर पर हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने उनसे बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
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प्रश्न- कीर्ति आजाद जी, आपने तीन बार बीजेपी के टिकट पर दरभंगा से चुनाव जीता और 24 वर्ष उस दल में रहते हुए राजनीति की। फिर आपने कांग्रेस ज्वाइन किया और अब तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। आपने कांग्रेस छोड़ने का फैसला क्यों किया?
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कीर्ति आजाद- मैंने भाजपा क्यों छोड़ी, यह दुनिया जानती है। मैंने (दिवंगत भाजपा नेता अरूण जेटली के विरूद्ध) एक भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। मेरे पास भ्रष्टाचार के पूरे सबूत थे, लेकिन मेरे द्वारा उठाए गए मामले की जांच किए जाने की बजाय मुझे ही पार्टी से निकाल दिया गया। इसी से समझ आता है कि भाजपा का भ्रष्टाचार से लड़ाई का दावा कितना खोखला है।
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इसके बाद मैंने कांग्रेस ज्वाइन किया। मेरे पिता भागवत झा कांग्रेस के सबसे कम उम्र के नेताओं में थे। वे इंदिरा जी के काफी करीबी रहे। उसी कांग्रेस को याद कर मैं 2018 में कांग्रेस में आया था। मैं तीन साल कांग्रेस में रहा। इन तीन सालों तक मैं काम मांगता रह गया, लेकिन मुझे कोई काम नहीं दिया गया। आज की राजनीति बहुत अलग है। घर में बैठकर केवल ट्वीट करने से राजनीति नहीं होती है। सड़क पर उतरकर लोगों के लिए आवाज उठानी पड़ती है। लेकिन दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने मुझे वह अवसर नहीं दिया। 2019 के चुनाव में भी मैंने दरभंगा लोकसभा सीट की मांग की थी जो मेरी पारंपरिक सीट थी, लेकिन पार्टी ने मुझे धनबाद भेज दिया। यही कारण है कि मुझे दुखी होकर कांग्रेस छोड़ने का निर्णय करना पड़ा।
प्रश्न- क्या कांग्रेस नेतृत्व से कोई नाराजगी थी?
कीर्ति आजाद- बिल्कुल नहीं। सोनिया गांधी मेरे लिए मां के समान हैं, मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मेरे कोई मतभेद नहीं हैं। लेकिन इतने लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी कांग्रेस ने मुझे कोई जिम्मेदारी नहीं दी। यही कारण रहा कि आज मैंने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय कर लिया।
प्रश्न- कांग्रेस छोड़ने के बाद आपने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने का ही निर्णय क्यों किया? क्या आपको लगता है कि ममता बनर्जी 2024 में विपक्ष की सर्वमान्य नेता के तौर पर उभर सकेंगी?
कीर्ति आजादः ममता बनर्जी स्वयं सड़क पर उतरकर संघर्ष करती हैं। वे जमीनी संघर्ष करती हैं और केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश देने की बजाय सड़क पर उतरकर सच्चे सेनापति की तरह उनका प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी यही खूबी मुझे बहुत पसंद आई और इसी कारण मैंने उनसे जुड़ने का निर्णय लिया। जहां तक विपक्ष की सर्वमान्य चेहरा बनने वाली बात है, मैं केवल यही कहूंगा कि आज जिसे भी केंद्र सरकार की नीतियों से नाराजगी है, उसके लिए ममता बनर्जी ही एक उम्मीद की तरह दिखाई पड़ती हैं। यही कारण है कि पूरे देश से लोग आज ममता बनर्जी के साथ आ रहे हैं। मुझे लगता है कि हर क्षेत्र से उनको लेकर जो उम्मीद लोगों में पैदा हो रही है, वह उन्हें विपक्ष के सर्वमान्य नेता के तौर पर स्थापित करेगी।
प्रश्न- विपक्ष का नेता बनने के कई और दावेदार भी हैं। नीतीश कुमार, शरद पवार सहित अनेक कद्दावर नेता हैं जो विपक्ष का नेतृत्व करने की मंशा रखते हैं। क्या कहेंगे?
कीर्ति आजादः नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर अब बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। कभी उन्होंने भाजपा का विरोध किया तो कभी उसी के साथ चुनाव लड़ा। कभी वे आरजेडी के साथ चुनाव लड़े थे, लेकिन फिर कुछ परेशानी हुई तो भाजपा की गोद में पहुंच गए। अब खबर है कि एक बार फिर उन्हें भाजपा से परेशानी हो रही है और एक बार फिर वे अपनी वापसी की संभावनाएं तलाश रहे हैं। लेकिन इस तरह की राजनीति से विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो जाता है जो राजनीति में सबसे अहम होता है। मेरा मानना है कि ममता बनर्जी में वह सारी खूबियां हैं जो उन्हें विपक्ष की सर्वमान्य नेता के तौर पर स्थापित करने में मदद कर सकती हैं। बाकी सही समय आने दीजिए। कुछ चीजों को समय पर छोड़ देना चाहिए।
प्रश्न- ममता बनर्जी से आपकी नई जिम्मेदारी के मामले में कोई बातचीत हुई है?
कीर्ति आजादः नहीं, मैंने कोई शर्त रखकर तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन नहीं किया है। पार्टी जहां भी चाहेगी, मैं पार्टी के लिए काम करने के लिए तैयार हूं। लेकिन चूंकि बिहार मेरी राजनीतिक जमीन रही है, मैं बिहार में पार्टी के विस्तार के लिए काम करना चाहूंगा। बाकी पार्टी के ऊपर है कि वह क्या निर्णय लेती है।
प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेकर माफी मांगी है और किसानों के प्रति अपनी बेहतर इच्छा को प्रकट किया है। क्या आपको लगता है कि इससे इस समय चल रहे चुनाव का परिदृश्य बदलेगा और भाजपा को कोई लाभ होगा?
कीर्ति आजादः प्रधानमंत्री जी की एक माफी से उन 700 लोगों की जिंदगी नहीं वापस आएगी जिन्होंने इस किसान आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई है। मुझे नहीं लगता कि केवल प्रधानमंत्री के एक आश्वासन पर कोई विश्वास करेगा और सरकार की इस भयानक गलती को माफ कर देगा। भाजपा को इसका कोई लाभ मिलने वाला नहीं है।