दिल्ली पुलिस के समर्थन में उतरीं किरण बेदी, कमिश्नर अमूल्य पटनायक को दी ये सलाह
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को वकीलों के हमले को लेकर पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। जिसमें नारे लगाए गए थे- पुलिस कमिश्नर कैसा हो, 'किरण बेदी जैसा हो।' अब पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने इस मामले पर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को नसीहत दी है।
बेदी ने कहा कि जब पुलिसकर्मी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करते हैं तो उन्हें उनके वरिष्ठों के द्वारा संरक्षण मिलना चाहिए। मंगलवार को पुलिस कमिश्नर प्रदर्शन कर रहे कर्मियों के सामने तो आए लेकिन वह पूरी तरह से उनके साथ नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा की घड़ी है। पुलिसकर्मी अपने उच्च अधिकारियों का समर्थन न मिलने और उनके रवैये से नाराज दिखाई दिए।
किरण बेदी ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'लीडरशिप (नेतृत्व) एक ’चरित्र’ है जो जिम्मेदारी लेता है और कठोर निर्णय लेता है। यह करने का ही जीवन है। कठिन समय चला जाता है लेकिन कठिन समय में की गई कार्रवाईयों की स्मृतियां हमेशा यादों में रह जाती हैं।'
Good #MorningNutrition
— Kiran Bedi (@thekiranbedi) November 6, 2019
Leadership is a ‘Character’ that takes responsibility and takes tough decisions.
It is a ‘life’ of ‘doing’...
Tough times go, Memories of Tough Acts Remain.
वरिष्ठों से मिलना चाहिए संरक्षण
बेदी ने एक बयान जारी करते हुए कहा, 'हम जिम्मेदारियों और अधिकार की बात करते हैं। पुलिस अधिकारियों के पास जीवन, संपत्ति की सुरक्षा और कानून का पालन कराने की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। सुरक्षा में असफल रहना उपेक्षा, कायरता और सह-अपराध भी है। जब पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी को पूरी ईमानदारी, सख्ती, निडरता और जिम्मेदारी से निभाते हैं तो उन्हें अपने वरिष्ठों से संरक्षण मिलना चाहिए।'एक सिक्के के दो पहलू हैं अधिकार और जिम्मेदारियां
बेदी ने ट्विटर पर लिखा, 'अधिकार और जिम्मेदारियां एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक नागरिक के तौर पर हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए। फिर चाहे हम जो भी हो और जहां भी हों। हमें इस संबंध में जोर देने की जरूरत है। जब हम सभी कानून का पालन करने की अपनी जिम्मेदारी को निभाते हैं तो कोई टकराव नहीं होता है।' उन्होंने कहा कि लीडरशिप का यह कर्तव्य है कि वह प्रामाणिक ड्यूटी करने के लिए बिना जांच के किसी को भी दोषी या अपमानित न किया जाए।31 साल पहले की यादें हुईं ताजा
किरण बेदी को लेकर नारे लगाए जाने पर 31 साल पहले पहले के एक घटनाक्रम की यादें ताजा हो गईं। तब किरण बेदी डीसीपी थीं, दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच जमकर बवाल मचा था। तमाम अदालतों को बंद करा दिया गया था।यह घटना 17 फरवरी 1988 की है। इस दिन डीसीपी किरण बेदी के दफ्तर में वकील पहुंचे हुए थे। इस बीच किसी बात पर बहस हो गई जो झड़प में बदल गई, इस दौरान बेकाबू भीड़ के कारण हालात ऐसे हो गए कि किरण बेदी को लाठीचार्ज कराना पड़ा। इस असर यह हुआ कि वकीलों ने दिल्ली की सभी अदालतों को बंद करा दिया। हालांकि इसके बाद भी एक न्यायाधीश ऐसे थे, जिन्होंने अपनी अदालत को खोले रखा और फैसले सुनाए।
बवाल वाले दिन 17 फरवरी 1988 को याद करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एस.एन. ढींगरा बताते हैं कि उस दिन डीसीपी दफ्तर में वकीलों की वजह से हालात बेकाबू हो गए थे, ऐसे में नौबत लाठीचार्ज तक आ पहुंची थी। उन्होंने कहा कि जब तक हालात बेकाबू न हो कोई पुलिस अधिकारी लाठीचार्ज नहीं कराता। आखिर वह बैठे-बिठाए मुसीबत क्यों मोल लेना चाहेगा।
उन्होंने कहा कि आईपीएस किरण बेदी के वकीलों पर लाठीचार्ज कराने के विरोध में दिल्ली हाईकोर्ट सहित राज्य की तमाम अदालतों में ताले पड़ गए थे। हालांकि मैंने अपनी अदालत को बंद नहीं होने दिया और बवाल होते रहने के बावजूद फैसले सुनाए।