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Assam: 'बलूचिस्तान में हो रही लोगों की हत्या मानवाधिकारों का काला अध्याय', CM सरमा का पाकिस्तान पर करारा हमला
Fri, 02 May 2025 02:43 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 02 May 2025 02:43 PM IST
सार
असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के खिलाफ लगातार पोस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सालों से बलूच लोग जबरन गायब किए जा रहे हैं। उन्हें यातना दी जाती है और बाद में उन्हें दूरदराज के बीहड़ों में मृत पाया जाता है। यह प्रथा आतंक का चेहरा बन गई है।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने पाकिस्तान पर करारा हमला बोला है। पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में हो रही लोगों की व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का काला अध्याय हैं।
सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से 20,000 से अधिक लोग लापता हो गए हैं और सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है।
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान निर्वासित होने के कगार पर परिवार, सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
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सीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि सालों से बलूच लोग जबरन गायब किए जा रहे हैं। यहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियों द्वारा अपहरण कर लिया जाता है। उन्हें यातना दी जाती है और बाद में उन्हें दूरदराज के बीहड़ों में मृत पाया जाता है या सुनसान सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। सरमा ने आरोप लगाया कि यह प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है। जहां परिवारों को आशा के बजाय अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में दोहराया था। उन्होंने इस मामले में वैश्विक समुदाय की लंबे समय से कायम चुप्पी को तोड़ा था। बलूचिस्तान से होकर बहने वाली लाल नदियों का जिक्र करते हुए पीएम ने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज दी।
ये भी पढ़ें: असम पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा की छिटपुट घटना, सुबह 11.30 बजे तक 24% से अधिक मतदान
पीएम ने कहा था कि भारत उत्पीड़ित और खामोश लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसका महत्व था। इसे पाकिस्तान की ओर से छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन इस संकट की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सीएम सरमा ने कहा कि कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं। यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह एक मानवीय आपातकाल है।
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सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से 20,000 से अधिक लोग लापता हो गए हैं और सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है।
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सीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि सालों से बलूच लोग जबरन गायब किए जा रहे हैं। यहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियों द्वारा अपहरण कर लिया जाता है। उन्हें यातना दी जाती है और बाद में उन्हें दूरदराज के बीहड़ों में मृत पाया जाता है या सुनसान सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। सरमा ने आरोप लगाया कि यह प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है। जहां परिवारों को आशा के बजाय अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में दोहराया था। उन्होंने इस मामले में वैश्विक समुदाय की लंबे समय से कायम चुप्पी को तोड़ा था। बलूचिस्तान से होकर बहने वाली लाल नदियों का जिक्र करते हुए पीएम ने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज दी।
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पीएम ने कहा था कि भारत उत्पीड़ित और खामोश लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसका महत्व था। इसे पाकिस्तान की ओर से छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन इस संकट की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सीएम सरमा ने कहा कि कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं। यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह एक मानवीय आपातकाल है।
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