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मारे गए 39 भारतीयों को लेकर 2 साल में सरकार ने बदला 6 बार बयान

Thu, 22 Mar 2018 12:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Mar 2018 12:25 PM IST
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 kidnapped Indians are safe and alive Six statements in 2 years by bjp government
चार साल पहले इराक के मोसुल शहर से लापता हुए 39 भारतीय ISIS के हाथों मारे जा चुके हैं। इसका खुलासा खुद केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया है। पिछले  चार सालों में गायब हुए भारतीयों को लेकर कई बार उनके मारे जाने की बात जोर शोर से उठी लेकिन बार बार केंद्र सरकार ने अपने बयान में कहा कि वह जिंदा है और सुरक्षित भी। मजदूरों के जिंदा रहने और सुरक्षित होने को लेकर सरकार ने संसद में करीब छह बार बयान भी दिया। ISIS ने भारतीयों को तब किडनैप किया था जब केंद्र में मोदी सरकार आई ही थी।
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मंगलवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि गायब हुए सभी भारतीयों के शव बरामद कर लिए गए हैं।और उनके डीएनए की भी जांच की जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से 31 पंजाब के रहने वाले थे जबकि चार हिमाचल प्रदेश के निवासी थे। शेष चार पश्चिम बंगाल और बिहार के रहने वाले थे।
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हालांकि यह मालूम नहीं चल पाया है कि भारतीयों की हत्या कब की गई लेकिन मोसुल के उत्तर-पश्चिम में स्थित बादुश नामक गांव में एक सामूहिक कब्र से उनके शव मिले हैं। राज्यसभा में अपनी पहल पर दिए गए बयान में स्वराज ने कहा कि शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया गया। मारे गए भारतीयों के पार्थिव अवशेष को विशेष विमान से भारत लाया जाएगा और उनके संबंधियों को सौंप दिया जाएगा।
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सुषमा स्वराज ने कहा, ‘मैंने कहा था कि बिना ठोस सबूत के मैं किसी को मृत घोषित नहीं करूंगी। आज मैं अपना वह वादा पूरा करने आई हूं। मैंने कहा था कि इस मामले का अंत पूरे सबूत के साथ ही होगा।’ विदेश मंत्री ने यह जानकारी लोकसभा में भी देनी चाही, लेकिन शोर-शराबे के चलते वह पूरा बयान नहीं दे पाईं।

इन मजदूरों को लेकर भारत सरकार ने बार-बार स्टेटमेंट बदले

 kidnapped Indians are safe and alive Six statements in 2 years by bjp government
23 जुलाई -2014:  तत्कालीन विदेश सचिव सैयद अकबरुद्दीन ने कहा:  हमें सूचना मिली है कि भारतीय सुरक्षित हैं। 

25 जुलाई -2014: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में कहा था कि गायब हुए भारतीयों को लेकर सरकार संजीदा है। इस मामले में मैं यही कहना चाहती हूं कि हमारा उनसे कोई सीधा संपर्क नहीं है। लेकिन मैं दूसरे स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह बताना चाहती हूं कि वह सुरक्षित और जिंदा है। उन्हें नियमित खाना भी मिल रहा है।  

 4 अगस्त 2014: स्वराज ने संसद में कहा कि मुझे सिर्फ एक स्रोत से नहीं बल्कि कई स्रोतों ने बताया है और मैं जिम्मेदारी लेते हुए यह कहना चाहती हूं कि वो सभी जिंदा है और ठीक हैं। उन्होंने कहा कि मैंने  केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल से कुछ कागजात भी शेयर किए हैं। चूंकि मैंने देश की सुरक्षा और गोपनीयता की शपथ ली है इसलिए मैं यही कह सकती हूं कि सभी सुरक्षितऔर जिंदा हैं।  

6 अगस्त 2014: सुषमा स्वराज ने राज्य सभा में कहा कि मोसुल में गायब हुए 41 लोगों के लिए मैं देश को अपनी जिम्मेदारी पर यह बताना चाहती हूं कि  वो सभी सुरक्षित और जीवित हैं। हमें अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मैं उनके परिवार वालों से कई बार मिल चुकी हूं। 
यह वही दिन है जब कुर्दिश सरकार की तरफ से खबरें आ रहीं थी कि दावला इस्लामी और इस्लामिक स्टेट ने कई मजदूरों को मार दिया है। और उनके शवों को शाहाजी क्षेत्र के एक बड़े से गड्ढे में फेंक दिया गया है।

परिवार वालों से भी मुलाकात की थी सुषमा स्वराज ने

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22 फरवरी 2015: गायब हुए मजदूरों के परिवार वालों से मिलने के बाद सुषमा स्वराज ने कहा था कि आज मेरी उन लोंगो से छठी मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें छुड़ाने के लिए सरकार हरभरसक प्रयास कर रही है।

उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि जब तक हमें कोई सबूत नहीं मिल जाता है हम उन्हें मरा हुआ नहीं मान सकते हैं। वहीं उन्होंने यह भी कहा था कि हमारे स्रोतों का कहना है कि वे सभी सुरक्षित हैं। और हमारा यह मानना है कि यह सूचना सच है और हमारी उनलोगों को लेकर खोज जारी है। 

22 जुलाई 2015 इसी बीच केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने भी लोक सभा में कहा था कि मोसुल इराक में गायब हुए भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने उस दौरान किसी तीसरे स्रोत का जिक्र करते हुए कहा था कि सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वहां से सुरक्षित निकालने को लेकर सरकार भरपूर कोशिश कर रही है। 

अब जब सुषमा स्वराज ने मान लिया है कि अपहरण किए गए 39 मजदूर मारे जा चुके हैं तब एक अधिकारी का कहना है कि हमें उस समय आशा थी कि वह जीवित हैं और हमारे स्रोत भी हमें यही जानकारी दे रहे थे। हम उन्हें वहां से निकालने और उनकी सुरक्षित वापसी की सारी कोशिशें कर रहे थे। हमारी खोज जारी थी। यहां तक की सुषमा स्वराज ने गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल के मंत्री से भी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कई बार बात की थी।

हम अपनी बातों को लेकर साफ थे हम उन्हें मृत घोषित नहीं करना चाहते थे तब तक जब तक हमें उनके मारे जाने का कोई सबूत नहीं मिल जाता है। अगर हम ऐसा कर देते और कोई एक आदमी जीवित आ जाता तब हम क्या करते । अधिकारी ने बताया कि हमारी आशाएं तब पूरी तरह से खत्म हो गईं जब हमें पिछले साल जुलाई से वहां से फोन मिलना बंद हो गया। मोसुल की स्वतंत्रता के बाद हमने उनके जीवित होने की आशाएं छोड़ दीं और हमने उनकी बॉडी की खोज शुरू की और नतीजा अब आपके सामने है।
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