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खरगोन हिंसा: वीडियो वायरल होने के बाद कपिल मिश्रा पर लग रहे आरोप, भाजपा नेता बोले- मेरे भाषण से चार घंटे पहले हुई वारदात

Tue, 12 Apr 2022 05:22 PM IST
amit sharma अमित शर्मा
Updated Tue, 12 Apr 2022 05:22 PM IST
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सार
अमर उजाला ने कपिल मिश्रा और अन्य भाजपा नेताओं से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढंत हैं।
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Khargone Violence: After the video went viral the allegations against Kapil Mishra BJP leader said incident happened four hours before my speech
कपिल मिश्रा - फोटो : ANI

विस्तार

मध्यप्रदेश के मुस्लिम बहुल इलाके खरगोन में रविवार को रामनवमी शोभायात्रा पर पथराव करने के कारण हिंसा फैल गई। इस हिंसा में दर्जनों पुलिस के जवानों के साथ लगभग 20 नागरिकों को चोटें आई हैं। शिवराज सिंह सरकार ने उपद्रवियों पर कठोर कार्रवाई करने की बात कही है और अब तक पत्थरबाजी करने वाले 45 उपद्रवियों के घरों-दुकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया है। इसमें 16 मकान और 29 दुकानें शामिल हैं। लेकिन इसी के साथ एक वीडियो के सामने आने के बाद आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस हिंसा को भाजपा के ही एक नेता कपिल मिश्रा ने भड़काया था।



वायरल वीडियो के बारे में कहा जा रहा है कि जिस दिन खरगोन में हिंसा हुई, भाजपा नेता कपिल मिश्रा इस दिन उसी शहर में थे। कथित तौर पर उन्होंने एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे संप्रदाय विशेष के लोगों में नाराजगी पैदा हुई और इसी बीच शोभायात्रा निकाली गई। कथित तौर पर उस शोभायात्रा के दौरान भी कुछ युवकों ने आपत्तिजनक टिप्पणी की जिससे लोगों की नाराजगी भड़क गई और लोगों ने शोभायात्रा पर पथराव करना शुरू कर दिया।


हालांकि, जब इस बाबत अमर उजाला ने कपिल मिश्रा और अन्य भाजपा नेताओं से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढंत हैं। कपिल मिश्रा ने कहा कि रविवार के दिन जब यह हिंसा हुई, वे घटना स्थल से 40 किलोमीटर दूर एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। छोटा शहर होने के कारण देर शाम तक उन्हें यह खबर तक नहीं थी कि उसी शहर के किसी दूसरे हिस्से में पथराव जैसी कोई घटना भी घट चुकी है। 

भाजपा नेता ने दी सफाई
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि खरगोन हिंसा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से गलत है। खरगोन के जिस स्थान पर हिंसा हुई है, वे उस स्थान से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने अपना भाषण भी हिंसा के लगभग चार घंटे बाद दिया था और रामनवमी शोभायात्रा पर पथराव की शर्मनाक घटना उसके पहले ही घट चुकी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत है कि उनके भाषण देने से एक संप्रदाय विशेष के लोगों में आक्रोश पैदा हुआ।

मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह हमेशा से अफजल गुरू, ओसामा बिन लादेन और अन्य आतंकियों को सम्मान देते आए हैं, और हिंदुओं को आतंकी बताते रहे हैं। मुंबई में 26 नवंबर की आतंकी घटना के लिए भी संघ को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। ऐसा करके वे मुसलमानों को खुश करने के उसी सांप्रदायिक खेल को खेलते रहे हैं जिसके लिए कांग्रेस जानी जाती है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर सवाल उठाकर दिग्विजय सिंह हमेशा आतंकियों का बचाव करते आए हैं। इस बार भी वे उन पर सवाल खड़े कर उन्हीं लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जो रामनवमी शोभायात्रा पर हिंसा करने के आरोपी हैं।

हिंदुओं की एकता की बात कही
बीजेपी नेता ने कहा कि उनके भाषण के एक-एक शब्द को ठीक से सुना-समझा जाना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में हिंदुओं की एकता की बात की है। उन्होंने कहा है कि पूरे हिंदू समाज को जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर स्वयं को केवल हिंदू के रूप में देखना और बताना चाहिए। उन्होंने उन लोगों से सावधान रहने के लिए कहा है जो लोग हिंदुओं को जाति के नाम पर तोड़ने की कोशिश करते हैं।

कपिल मिश्रा ने अपने भाषण में कहा था कि जो व्यक्ति आप लोगों (हिंदुओं को) से जाति-पाति की बात करता है, यह समझ लेना कि वह आपकी ‘कश्मीर फाइल’ बनाने की तैयारी कर रहा है। वह हमारे बीच फूट डालने की कोशिश कर रहा है। भाजपा नेता ने कहा कि इस तरह की अपील एक स्वस्थ समुदाय का निर्माण करने के लिए आवश्यक है जहां जाति-पाति के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इस अपील से किसी भी ऐसे व्यक्ति को परेशानी नहीं हो सकती जो भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनते हुए देखना चाहता है।

अपने भाषण में आगे कपिल मिश्रा ने कहा था कि आप लोग कश्मीर फाइल्स देखकर समझ लें, क्योंकि यदि आज नहीं समझे तो कल आपको दिल्ली फाइल, केरल फाइल, भोपाल फाइल्स, इंदौर फाइल्स  और खरगोन फाइल्स देखना पड़ सकता है। इस तरह वे हिंदुओं को जातीय भेदभाव भुलाकर एक होने की अपील करते हैं। 

कुछ लोगों को लग रहा है कि इस अपील के जरिए कपिल मिश्रा हिंदुओं को एक संप्रदाय विशेष के खिलाफ लामबंद होने और हिंसा करने की अपील कर रहे थे। हालांकि, कपिल मिश्रा इन आरोपों से पूरी तरह इनकार करते हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल हिंदुओं में एकता स्थापित करने की बात करते हैं जिसका उन्हें पूरा अधिकार है।  

अफजल गुरू से किसको सहानुभूति
वायरल वीडियो में कपिल मिश्रा खरगोन के एक गांव में इस तरह की नारेबाजी करते हुए दिखाई पड़ते हैं, जिस घर से मूसा निकलेगा, उस घर में घुसकर मारेंगे'' और “जिस घर से बुरहान वानी निकलेगा, उस घर में घुसकर मारेंगे”। पहले कपिल मिश्रा लोगों को भाषण देने के लिए कहते हैं, इसके बाद नारे की पहली लाइन स्वयं बोलते हैं, और नारे का दूसरा हिस्सा भीड़ की तरफ से आवाज के रूप में सुनाई पड़ता है। कुछ लोगों का आरोप है कि एक इलाके में हिंसा के कुछ देर बाद कपिल मिश्रा का यह भाषण आग में घी डालने का काम कर सकता था।

कपिल मिश्रा कहते हैं कि यह समझा जाना चाहिए कि इस देश में वो लोग कौन हैं जिन्हें बुरहान वानी और मूसा जैसे आतंकियों के लिए सहानुभूति है। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्रवादी व्यक्ति बुरहान वानी और मूसा जैसे आतंकियों का समर्थन नहीं कर सकता, और जो इनका समर्थन करेगा, उनका हर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा, इसका परिणाम चाहे कुछ भी हो।

बग्गा ने कहा- वीडियो में कुछ भी गलत नहीं
वहीं, भाजपा के कुछ नेताओं ने कपिल मिश्रा के इस वीडियो को रिट्वीट किया है। उन्हें भी खरगोन हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन इन नेताओं ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी इस वीडियो को रिट्वीट किया है। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि कपिल मिश्रा के वीडियो में किसी भी व्यक्ति, समुदाय या किसी वर्ग के विरूद्ध कोई टिप्पणी नहीं कही गई है। वीडियो में सभी हिंदुओं को एक होने और जाति-पाति मिटाने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है और यही कारण है कि उन्होंने इस वीडियो को रिट्वीट किया।   

दिल्ली दंगे के दौरान भी उछला था नाम
कपिल मिश्रा अपनी विवादित टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं। दिल्ली दंगों के दौरान भी उन पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे। सीएए-एनआरसी का विरोध करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे धरना देकर बैठ गए थे। इससे सामान्य लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

इस बीच कपिल मिश्रा अपने समर्थकों के साथ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के करीब पहुंचे। उन्होंने दिल्ली पुलिस के जवानों से पूर्वी दिल्ली का रास्ता खाली कराने को लेकर कहा था कि यदि पुलिस ने 24 घंटे में रास्ता खाली नहीं कराया तो (रास्ता खाली कराने के लिए) वे सड़कों पर उतर सकते हैं। उनके इस भाषण के बाद 24 घंटे के अंदर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क गए थे जिनमें 53 लोगों की जान चली गई थी। उनके बयान को कुछ लोगों ने भड़काऊ माना था।

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