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Khabron Ke Khiladi: नेताओं की बदजुबानी पर पार्टियों की चुप्पी क्यों? विश्लेषकों ने बताई राजनीतिक पतन की वजह

Sat, 17 May 2025 05:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 17 May 2025 05:06 PM IST
सार

खबरों के खिलाड़ी में भाजपा नेता विजय शाह और समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव के सैन्य कर्मियों से जुड़े बयानों को लेकर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अवधेश कुमार मौजूद रहे।  

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Khabron Ke Khiladi India Pakistan Conflict Political Leaders Comments sparks Controversy BJP SP MP UP Experts
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से एक ओर देश के हर नागरिक को गर्व है। दूसरी ओर राजनीतिक दलों के नेताओं के कुछ बयानों पर हंगामा भी हो रहा है। इनमें से कुछ बयान तो बेहद आपत्तिजनक हैं। बड़बोले नेताओं की इसी बयानबाजी पर इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अवधेश कुमार मौजूद रहे।  
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समीर चौगांवकर: विजय शाह के बयान को किसी भी तरीके से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। भाजपा को तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा लेना चाहिए था। विजय शाह पर कार्रवाई नहीं होना यह बताता है कि राजनीतिक दलों के लिए राजनीति सर्वप्रथम है। भले मामला सेना जुड़ा ही क्यों ना हो। सत्ता में बने रहना और सत्ता के लिए जो जरूरी वोट बैंक है चाहे वो आदिवासी वोट बैंक हो चाहे दलित वोट बैंक हो, चाहे ओबीसी वोट बैंक हो, अपने राजनीतिक समीकरण में जो फिट बैठता है तो वो सर्वोपरी है। विजय शाह का बयान सोचा समझा बयान था। पूरी भाजपा ने इस पर मौन साध लिया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को शर्म आनी चाहिए। जो पार्टी संघ के संस्कारों से निकली है, उसे विजय शाह का इस्तीफा तुरंत ले लेना चाहिए था। 
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विनोद अग्निहोत्री: कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कंमाडर व्योमिका सिंह की एक ही पहचान है। वो ये कि वो भारतीय सेना की अधिकारी हैं और भारतीय हैं। इससे इतर उनकी कोई पहचान कोई भी निकालता है, चाहे वो विजय शाह हों या रामगोपाल यादव हों, तो वो गलत है। रामगोपाल यादव के बयान से भाजपा को कवर फायर जरूर मिल गया है। मुझे आश्चर्य है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस पर क्यों खामोशी साधे हुए है। वहीं, रामगोपाल यादव के बयान पर योगी आदित्यनाथ, बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने कठोर टिप्पणी की, लेकिन इन नेताओं ने विजय शाह के बयान पर कुछ नहीं कहा। जगदीश देवड़ा के बयान की बात करें उन्हें संदेह का लाभ दिया जा सकता है, कि उनकी जबान लड़खड़ा गई हो, लेकिन विजय शाह को संदेश का लाभ भी नहीं दिया जा सकता है। 

राकेश शुक्ल: दोनों मध्य प्रदेश के बड़े नेता हैं। दोनों मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री हैं। मुझे नहीं लगता है कि दोनों में से किसी की जुबान फिसली है। जो आशय अब आप बता रहें हैं वो आपको तो पहले से पता था कि इसका क्या आशय निकलेगा। जगदीश देवड़ा और विजय शाह के बयान के बाद जो हालात हैं वो केंद्रिय नेतृत्व के निर्णय और प्रदेश के नेतृत्व पर सवालिया निशान हैं। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: पक्ष हो या विपक्ष हो, देश में गंभीर से गंभीर मुद्दा राजनीतिक नफा-नुकसान की भेंट चढ़ जाता है। विजय शाह का बयान आना और बयान के बाद आज तक उनका अपनी कुर्सी पर बने रहना, ये भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। उन पर कार्रवाई नहीं होना लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या भाजपा अन्य पार्टियों से अलग है? इसी तरह जो रामगोपाल यादव ने व्योमिका सिंह पर भद्दा कमेंट किया है उस पर योगी आदित्यनाथ आलोचना क्यों कर रहे हैं, उनकी सरकार को तो रामगोपाल यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए। रामगोपाल यादव पर तो एससी एक्ट में कार्रवाई भी हो सकती है, फिर क्यों नहीं केस दर्ज किया जा रहा है।  
 
अवधेश कुमार:  यह राजनीति के पतन को दर्शाता है। हर पार्टी में ऐसे लोग आज भी हैं। इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता है। ये पार्टियों को तय करना है कि ऐसे नेताओं के साथ क्या करना है। भाजपा में जो कुछ भी पतन हुआ है वो सत्ता में आने के बाद से है। ऐसे मामले में कोई भी कार्रवाई छोटी पड़ जाएगी।
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