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Khabaron Ke Khiladi: ऑपरेशन सिंदूर पर देश में सियासत जारी, विशेषज्ञों ने बताया किसकी रणनीति किस पर भारी
Sat, 31 May 2025 09:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 31 May 2025 09:04 PM IST
सार
पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद भारत ने अपने प्रतिनिधिमंडलों को आसियान देशों से लेकर पश्चिम में अमेरिका तक भेजा है। हालांकि, घरेलू स्तर पर ही भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी मुद्दे पर खबरों के खिलाड़ी में इस हफ्ते चर्चा हुई।
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा बीते तीन हफ्ते से हर ओर हो रही है। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम को दुनिया ने देखा। अब इसे लेकर देश में सियासत भी हो रही थी। प्रधानमंत्री हर जनसभा हर रैली में इसका जिक्र कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी और अवधेश कुमार मौजूद रहे।
रामकृपाल सिंह: जो कुछ भी हुआ है तो यह व्यवहारिक है कि यह मुद्दा कुछ दिन तक रहेगा। पीओके कोई नया मुद्दा नहीं है। जैसे पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए मैं कहता हूं कि वो भारत के विरोध में बना हुआ है। उसकी कोई सांस्कृतिक पहचान नहीं है। इसे लेकर राजनेताओं बयान को मैं बहुत गंभीरता से तब तक नहीं लेता हूं, जब तक कि कोई नीतिगत फैसला न आ जाए। सभी लोग कहेंगे कि बिहार के चुनाव को देखते हुए ये सब हो रहा है। राजनीति में यह होना आम बात है। हम अगर एक बड़े संदर्भ में देखें तो जो प्रतिनिधिमंडल विदेश गए हैं। उससे एक अच्छा मैसेज जा रहा है और इसे मैं देश के लिए अच्छा मानता हूं।
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रामकृपाल सिंह: जो कुछ भी हुआ है तो यह व्यवहारिक है कि यह मुद्दा कुछ दिन तक रहेगा। पीओके कोई नया मुद्दा नहीं है। जैसे पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए मैं कहता हूं कि वो भारत के विरोध में बना हुआ है। उसकी कोई सांस्कृतिक पहचान नहीं है। इसे लेकर राजनेताओं बयान को मैं बहुत गंभीरता से तब तक नहीं लेता हूं, जब तक कि कोई नीतिगत फैसला न आ जाए। सभी लोग कहेंगे कि बिहार के चुनाव को देखते हुए ये सब हो रहा है। राजनीति में यह होना आम बात है। हम अगर एक बड़े संदर्भ में देखें तो जो प्रतिनिधिमंडल विदेश गए हैं। उससे एक अच्छा मैसेज जा रहा है और इसे मैं देश के लिए अच्छा मानता हूं।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: दोनों तरफ से जो हो रहा है वो अपनी-अपनी राजनीति का हिस्सा है। जो डेलिगेशन विदेश गए हैं, वो किसी पार्टी का पक्ष रखने नहीं गए हैं। वो देश का पक्ष रखने गए हैं। इसकी हमें सराहना करनी चाहिए कि इन दलों ने विदेश में भारत का पक्ष रखा है। उसमें राजनीतिक मतभेदों को अलग रखा गया है। पहले भी जब कोई नेता बाहर जाता था तो पार्टी की बात कोई नहीं करता था। हर कोई देश की बात करता था। वही अभी भी हो रहा है।
अवधेश कुमार: जो लोग ढिबरी और लालटेन जलाकर जीते थे वो लंबे समय तक यह यकीन नहीं कर पाए कि बिजली का आविष्कार हो गया। ऑपरेशन सिंदूर का असर आपको आने वाले 10-15 साल में दिखाई देगा। आने वाले समय में भारत को अगर विश्व का नेता बनना है तो उदाहरण प्रस्तुत करने होंगे। विपक्ष यह समझ ही नहीं पा रहा है। इस समय भारत का विराट रूप खड़ा हो रहा है। जो प्रतिनिधिमंडल गया है, उसे समझ आ रहा है कि दुनिया में भारत की हैसियत क्या है। पीओके पर भारत का स्टैंड क्लियर है। इसमें किसी को कोई संदेह होना ही नहीं चाहिए। पीओके नए रंग रूप में भारत के साथ आएगा। ये आने वाले समय में आपको दिखाई देगा।
अवधेश कुमार: जो लोग ढिबरी और लालटेन जलाकर जीते थे वो लंबे समय तक यह यकीन नहीं कर पाए कि बिजली का आविष्कार हो गया। ऑपरेशन सिंदूर का असर आपको आने वाले 10-15 साल में दिखाई देगा। आने वाले समय में भारत को अगर विश्व का नेता बनना है तो उदाहरण प्रस्तुत करने होंगे। विपक्ष यह समझ ही नहीं पा रहा है। इस समय भारत का विराट रूप खड़ा हो रहा है। जो प्रतिनिधिमंडल गया है, उसे समझ आ रहा है कि दुनिया में भारत की हैसियत क्या है। पीओके पर भारत का स्टैंड क्लियर है। इसमें किसी को कोई संदेह होना ही नहीं चाहिए। पीओके नए रंग रूप में भारत के साथ आएगा। ये आने वाले समय में आपको दिखाई देगा।
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विनोद अग्निहोत्री: ऑपरेशन सिंदूर आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया था। पीओके इसके एजेंडे में ही नहीं था। ये अलग बात है कि पीओके को लेकर इतनी ज्यादा रट लगाई गई है कि इसलिए लोगों के मन में था कि चलो लड़ाई हो गई है तो पीओके भी आ जाए। लेकिन, सरकार के इस ऑपरेशन में ऐसा कोई लक्ष्य नहीं था। देश के बाहर हम सब एक हैं। देश के अंदर हम फिर राजनीति करेंगे। शशि थरूर और सलमान खुर्शीद वही कह रहे हैं जो देश के बाहर कहना चाहिए। उसी तरह पवन खेड़ा वही कह रहे हैं जो देश के अंदर एक राजनीतिक दल को करना चाहिए।
समीर चौगांवकर: जिस तरह से केंद्र सरकार ने पूरी दुनिया में प्रतिनिधिमंडल भेजा है और उसे लेकर जिस तरह देश में बयान आ रहे हैं, जैसे जयराम रमेश का बयान, इस तरह के बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। यह आपसी एकता को कमजोर करने वाला बयान है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए था। पवन खेड़ा अगर ये बात कह रहे हैं कि भाजपा के पास कोई मुस्लिम सांसद नहीं है तो यह कोई नई बात तो नहीं है। कांग्रेस को शशि थरूर के बयानों को, जो विदेश में देश की बात रख रहे हैं, उन पर टिप्पणी से बचना चाहिए था। पीओके की जहां तक बात है तो भारत की यह कभी मंशा नहीं थी कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पीओके को हम ले लेंगे। वैसे भी लड़कर कोई चीज हथियाने से बेहतर है कि वो टूटकर आपके साथ आए।
समीर चौगांवकर: जिस तरह से केंद्र सरकार ने पूरी दुनिया में प्रतिनिधिमंडल भेजा है और उसे लेकर जिस तरह देश में बयान आ रहे हैं, जैसे जयराम रमेश का बयान, इस तरह के बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। यह आपसी एकता को कमजोर करने वाला बयान है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए था। पवन खेड़ा अगर ये बात कह रहे हैं कि भाजपा के पास कोई मुस्लिम सांसद नहीं है तो यह कोई नई बात तो नहीं है। कांग्रेस को शशि थरूर के बयानों को, जो विदेश में देश की बात रख रहे हैं, उन पर टिप्पणी से बचना चाहिए था। पीओके की जहां तक बात है तो भारत की यह कभी मंशा नहीं थी कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पीओके को हम ले लेंगे। वैसे भी लड़कर कोई चीज हथियाने से बेहतर है कि वो टूटकर आपके साथ आए।