फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Khabaron Ke Khiladi most accurate analysis of Manmohan Singh's tenure as Prime Minister and Finance Minister

Khabaron Ke Khiladi: मनमोहन सिंह के कार्यकाल और योगदान को इतिहास कैसे याद रखेगा? पढ़ें सबसे सटीक विश्लेषण

Sat, 28 Dec 2024 07:17 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 28 Dec 2024 07:17 PM IST
सार

Khabaron Ke Khiladi: Tribute To Manmohan Singh: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 1991 में उन्होंने उदारीकरण को लागू कर बड़ा कदम उठाया। अमेरिका के साथ हुए भारत के असैन्य परमाणु करार के अमल में भी उनका अहम योगदान रहा।

विज्ञापन
Khabaron Ke Khiladi most accurate analysis of Manmohan Singh's tenure as Prime Minister and Finance Minister
डॉ मनमोहन सिंह (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रोफेसर, आरबीआई गवर्नर, मुख्य आर्थिक सलाहकार, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और वित्त मंत्री जैसे पदों पर रहने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह 10 साल प्रधानमंत्री भी रहे। सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद शीर्ष पद तक पहुंचने वाले भी वे इकलौते नेता रहे। खबरों के खिलाड़ी में इस बार में उन्हीं के योगदान को याद किया गया। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राजकिशोर, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार और पूर्णिमा त्रिपाठी मौजूद थे।
विज्ञापन

विज्ञापन

मनमोहन सिंह के कार्यकाल को कैसे आंका जाएगा? 
समीर चौगांवकर: उनके व्यक्तित्व की तो विपक्ष भी तारीफ करता है। प्रधानमंत्री के तौर पर और वित्त मंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह का कार्यकाल अलग-अलग आंका जा सकता है। कांग्रेस ने उन्हें इसलिए प्रधानमंत्री बनाया क्योंकि गांधी परिवार को एक भरोसेमंद व्यक्ति चाहिए था, जो पार्टी संगठन के लिए कोई खतरा पैदा न करे। मनमोहन सिंह के चयन से पहले सोनिया गांधी के पास पीवी नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी जैसे उदाहरण थे। मनमोहन सिंह का पहला कार्यकाल अच्छा रहा, लेकिन दूसरे कार्यकाल के आखिर के वर्षों में कई तरह के घोटाले सामने आए। हालांकि, वित्त मंत्री के तौर पर उनके पांच साल सबसे अच्छे रहे। मनमोहन सिंह ने एक बुनियाद रखी, जिस पर आगे जाकर दूसरे वित्त मंत्रियों ने इमारत खड़ी की।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजकिशोर: वो आसमान था, लेकिन सिर झुकाकर चलता था। राजनीतिक तौर पर हमेशा सही बने रहने की उनकी कोई मजबूर नहीं थी। पीवी नरसिम्हा राव चाहते थे कि लीक से हटकर एक ऐसा व्यक्ति वित्त मंत्री बने, जो गिरती अर्थव्यवस्था को उबार सके। वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण लाकर वे अर्थव्यवस्था के कर्णधार बने। जब वो प्रधानमंत्री बने तो इस पद के लिए वो दूसरी पसंद थे। कांग्रेस की पहली पसंद तो सोनिया गांधी थीं। अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु करार पर उनकी हिम्मत हमेशा याद रखी जाएगी। मनमोहन सिंह सीईओ की तरह थे। वे देश चला रहे थे। राजनीति की कमान सोनिया गांधी के पास थी। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में वे काजल की कोठरी में से बेदाग होकर निकले।

आम आदमी पार्टी ने मनमोहन सिंह को भारत रत्न देने की मांग की है। इसे कैसे देखते हैं?
हर्षवर्धन त्रिपाठी: मनमोहन सिंह के कार्यकाल के समय अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह क्या-क्या कहते थे, यह भी ध्यान रखना चाहिए। मनमोहन सिंह कहते थे कि उम्मीद करता हूं कि इतिहास उदारता के साथ उन्हें आंकेगा। यह ध्यान रखना चाहिए कि इतिहास, वर्तमान और भूतकाल, सभी ने मनमोहन सिंह का मूल्यांकन अच्छा किया। कभी उनका गलत मूल्यांकन नहीं किया गया। कांग्रेस ने ही उनका मूल्यांकन नहीं होने दिया। चंद्रशेखर जब प्रधानमंत्री थे, तब आर्थिक सलाहकार के तौर पर मनमोहन सिंह ने शोध पत्र तैयार किया था। कांग्रेस के समर्थन वापस लेने से उस शोध पत्र पर अमल नहीं हो पाया। तब अमल हो जाता तो चंद्रशेखर के समय ही अर्थव्यवस्था बदल जाती। जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब हमेशा यही प्रचार किया जाता था कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सुझाव पर फैसले हो रहे हैं और कानून लाए जा रहे हैं। मनमोहन सिंह का तो कांग्रेस के भीतर अपमान होता रहा। विपक्ष ने कभी उनका अपमान नहीं किया। 


पूर्णिमा त्रिपाठी: मनमोहन सिंह अच्छे प्रधानमंत्री और अच्छे वित्त मंत्री रहे। उनकी आर्थिक नीतियों की वजह से उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे, तब विजन पीवी नरसिम्हा राव का था। उन्हीं की वजह से मनमोहन सिंह उदारवादी नीतियों पर अमल कर पाए। आज अगर हम अच्छे दिनों की बात करते हैं, तो इसकी नींव मनमोहन सिंह के वित्त मंत्री रहने के समय रखी गई थी। 2009 में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था डूब गई, तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और उनके नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था बची रही। बराक ओबामा कहते थे कि जब मनमोहन सिंह बोलते हैं, तो दुनिया सुनती है। 

तो आखिर उनका आकलन किस तरह होना चाहिए?
अवधेश कुमार: स्वतंत्र भारत के इतिहास में बगैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला मनमोहन सिंह जैसा कोई नेता नहीं मिलेगा, जो प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा हो। यह भी सच है कि पीवी नरसिम्हा राव को हटाकर मनमोहन सिंह का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। इतिहास बहुत क्रूर होता है। उनके मूल्यांकन का एक पक्ष यह भी है कि कुछ गलत फैसले भी हुए। जैसे सच्चर समिति, जिसने कई चीजों को बदल दिया। इसी के बाद 'देश के संसाधनों पर पहला हक किसका' जैसे मुद्दे पर बहस शुरू हुई। एक सच यह भी है कि अमेरिका से परमाणु करार के समय उन्होंने सत्ता जाने का खतरा मोल लेते हुए भी फैसले किए। इसमें उन्हें प्रणब मुखर्जी का साथ मिला। अपने अहम और अंतर्द्वंदों से भरे हुए क्षेत्रीय दलों के स्वार्थी नेताओं को साथ लेकर गठबंधन को चलाते हुए स्थिरता बनाए रखने की चुनौती मनमोहन सिंह के सामने थी। 

विनोद अग्निहोत्री: मनमोहन सिंह का योगदान असाधारण रहा। वे नेतृत्व के प्रति हमेशा निष्ठावान रहे। वे पीवी नरसिम्हा राव के भरोसेमंद रहे, तो सोनिया गांधी के भी भरोसेमंद रहे। दिक्कत यह रही कि कई लोग यह चाहते थे कि मनमोहन सिंह पीवी नरसिम्हा राव की तरह पेश आएं और सोनिया गांधी को सीधे चुनौती दें। मनमोहन सिंह ने यह नहीं किया। फिर भी वे रबर स्टैम्प प्रधानमंत्री नहीं थे। उन्होंने कई ऐसे फैसले किए, जिसमें सोनिया गांधी शुरुआत में सहमत नहीं थीं, लेकिन उन्होंने सोनिया गांधी को भरोसे में लेकर राजी किया। मीडिया ने हमेशा मनमोहन सिंह को निशाने पर लिया, लेकिन वे कभी मीडिया से भागे नहीं। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाई। उन्हें जो गठबंधन मिला, वह अटलजी के समय के सत्तारूढ़ गठबंधन से ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण था। अटलजी का कद और व्यक्तित्व इतना बड़ा था कि गठबंधन के सहयोगी दलों के प्रमुख उनके सामने बौने नजर आते थे। मनमोहन सिंह के समय ऐसा नहीं था। मनमोहन सिंह की कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी, शरद पवार, अर्जुन सिंह, लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान और ममता बनर्जी जैसे कद्दावर नेता रहे। लिहाजा, गठबंधन की सरकार चलाना मनमोहन सिंह के लिए ज्यादा बड़ी चुनौती थी। उन्हें यूं ही 'सिंह इज किंग' नहीं कहा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed